
धर्मपाल वर्मा
दक्ष दर्पण समाचार सेवा
चण्डीगढ़: इंडियन नेशनल लोक दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष अभय सिंह चौटाला के लिए कभी राजनीति उनकी प्राथमिकता नहीं होती थी। वह जरूरत पड़ने पर ही राजनीतिक गतिविधियों में हिस्सा लेते थे। उनकी रुचि खेल संबंधी गतिविधियों और बिजनेस तक सीमित नजर आती थी। संकट के समय जरूर आगे आ जाते थे और थोड़ी बहुत राजनीति करते भी थे तो वह सिरसा जिले तक सीमित रहती थी। उन्होंने अपने पिता पूर्व मुख्यमंत्री चौ ओम प्रकाश चौटाला और परिवार के लिए हर मौके पर अपना योगदान दिया। उन्होंने अपने भाई अजय सिंह चौटाला को राजनीति में सपोर्ट किया और जब पिता और भाई जेल चले गए तो पूरे परिवार को संभाला ।यहां तक कि अपने खुद के बच्चों को कृषि कार्यों में लगाया और भाई के बच्चों को राजनीति में आगे करने का काम किया। इसे आप त्याग भी कह सकते हैं समर्पण भी और समझदारी भी।

उन्होंने चौधरी ओम प्रकाश चौटाला के न चाहते हुए भी अपनी भाभी नैना चौटाला को डबवाली से विधायक बनाया ,अपने एक भतीजे को सांसद। अभय सिंह की छवि एक दबंग और आक्रामक नेता की रही है। पाठकों को बता दें कि ओमप्रकाश चौटाला के साथ भी ऐसा ही था आरंभ में उनके प्रति भी नकारात्मकता के भाव दर्शाए जाते थे लेकिन जिस तरह से ओमप्रकाश चौटाला ने अपने दम पर अपने विवेक से अपने राजनीतिक कौशल से खुद को साबित करके दिखाया ।अब अभय सिंह चौटाला उसी पैटर्न पर काम करते नजर आ रहे हैं। उन्होंने न केवल अपनी एक सकारात्मक छवि बना ली है बल्कि वह अच्छे संगठन कर्ता के रूप में भी देखे जाने लगे हैं। उनकी यह छवि अब चर्चा का विषय हो गई है। अभय सिंह चौटाला के बारे में विशेषज्ञों ने भी यह मान लिया है कि राजनीतिक तौर पर वह पहले से भी ज्यादा परिपक्व और कूटनीतिक नजर आने लगे हैं। अभय सिंह ने अब पार्टी के मामले में भी आर पार की बात करनी शुरू कर दी है और वह इंडियन नेशनल लोकदल को एक कैडर बेस पार्टी बनाने की योजना पर काम कर रहे नजर आ रहे हैं।
अभय सिंह चौटाला ने पिछले दिनों इस बात के संकेत दिए कि उसकी पार्टी का वर्कर पार्टी के लिए पूरी तरह से समर्पित भाव से काम करेगा। उन्होंने रोहतक में एक बैठक को संबोधित करते हुए कहा कि
आज हमारी पार्टी के एक एक साथी ने खुल कर कह दिया है कि न हम कभी बीजेपी के साथ जाएंगे, न हम कांग्रेस के साथ जाएंगे, न हम रणजीत सिंह को अपना नेता मानेंगे और न ही अजय सिंह की पार्टी से हाथ मिलाएंगे। बेशक विरोधी उन पर भी भाजपा का सहयोगी होने का आरोप लगाएं लेकिन अब ऐसा लगता है कि अभय सिंह चौटाला बड़ी लड़ाई लड़ने के मूड में है और निश्चित तौर पर सरकार बनाने का लक्ष्य लेकर काम करना शुरू कर दिया है। वह अगले 4 साल लगातार संघर्ष करने की मुद्रा में नजर आ सकते हैं और दलित तथा पिछड़े मतदाताओं के समर्थन के मध्य नजर किसी दल से गठबंधन करने की कोशिश करते भी नजर आ सकते हैं।
