
फतह सिंह उजाला
दक्ष दर्पण समाचार सेवा dakshdarpan2022@gmail.com गुरुग्राम । श्री काशी सुमेरु पीठाधीश्वर अनन्त श्री विभूषित पूज्य जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी नरेन्द्रानन्द सरस्वती जी महाराज का आगमन ढूहा बिहरा गाँव में सरयू तट पर स्वामी ईश्वर दास ब्रह्मचारी “मौनी बाबा” द्वारा आयोजित नव कुण्डीय अद्वैत शिवशक्ति अति महायज्ञ में हुआ । इस अवसर पर द्वादश ज्योतिर्लिंग की स्थापना स्वामी ईश्वर दास जी महाराज “मौनी बाबा” द्वारा पूज्य शंकराचार्य जी महाराज के पावन सानिध्य में विधि विधान से मंत्रोच्चारण से की गई ।

द्वादश ज्योतिर्लिंग स्थापना के अवसर पर पूज्य शंकराचार्य जी महाराज ने कहा कि हमारी पौराणिक मान्यता के अनुसार भगवान शिवजी जहाँ-जहाँ स्वयं प्रकट हुए, उन्हीं द्वादश स्थानों पर स्थित शिवलिंगों को पवित्र ज्योतिर्लिंगों के रूप में पूजा जाता है । इन द्वादश ज्योतिर्लिंगों के न सिर्फ दर्शन करने पर शिव भक्त को विशेष फल की प्राप्ति होती है, अपितु इनका प्रतिदिन नाम लेने मात्र से जीवन के सभी दु:ख दूर हो जाते हैं। ज्योतिर्लिंग अर्थात् ‘व्यापक ब्रह्मात्मलिंग’ जिसका अर्थ है ‘व्यापक प्रकाश’ । जो शिवलिंग के बारह खण्ड हैं । शिवपुराण के अनुसार- ब्रह्म, माया, जीव, मन, बुद्धि, चित्त, अहंकार, आकाश, वायु, अग्नि, जल और पृथ्वी को ज्योतिर्लिंग कहा गया है । भगवान शिव के आठ द्वारपाल हैं- नन्दी, स्कन्द, रिटी, वृषभ, भृंगी, गणेश, उमामहेश्वर और महाकाल और 8 गण हैं- नन्दी, श्रृंगी, भृगिरिटी, शैल, गोकर्ण, घण्टाकर्ण, वीरभद्र और महाविकट । प्रत्येक देवी-देवता की प्रिय वनस्पतियाँ होती हैं, उन्हीं वनस्पतियों से अपने-अपने आराध्य की पूजा की जाती हैं । उन्होंने बताया भगवान शिवजी की प्रिय वनस्पतियाँ-रुई, पीला कनेर, बिल्वपत्र, शमी पत्र, कमल, बकुल, धतूरा सभी तरह के सुगंधी फूलों के साथ नीलकमल विशेष हैं, और इन्हीं वनस्पतियों से भगवान शिव की पूजा करनी चाहिए । विधि अनुसार पूजन से इच्छित फल की प्राप्ति निश्चित रूप से होती है । आज मौनी बाबा ने द्वादश ज्योतिर्लिंग की स्थापना करके भक्तों के लिए द्वादश ज्योतिर्लिंगों के दर्शन-पूजन को शिवभक्तों के लिए बहुत ही सुगम कर दिया है । भगवान शिव सभी भक्तों एवम् श्रद्धालुओं की हर मनोकामना पूर्ण करेंगें । इस अवसर पर स्वामी बृजभूषणानन्द सरस्वती, यज्ञाचार्य पं रेवती रमण तिवारी, मान्धाता जी, अमरीश तिवारी, मधुप पाण्डेय सहित भारी संख्या में सनातनधर्मी श्रद्धालु उपस्थित थे ।
