
धर्मपाल वर्मा
दक्ष दर्पण समाचार सेवा dakshdarpan2024@gmail.com
चण्डीगढ़। हरियाणा सहित पूरे देश में राज्यसभा के चुनाव के लिए कार्यक्रम तय हो चुका है ।चुनाव 16 मार्च को होगा ।मोटे तौर पर स्थिति यह है कि बेशक हरियाणा से रिटायर होने वाले दोनों सांसद भाजपा के हैं। लेकिन अब उनकी जगह जो दो सांसद चुने जाएंगे उनमें एक कांग्रेस का तो दूसरा बीजेपी का हो सकता है । यदि भाजपा एक की बजाय दो उम्मीदवार खड़े करती है या किसी एक और को समर्थन देने का ऐलान करती है तो यह बात मानी जा सकती है कि दाल में कुछ काला है और कांग्रेस में सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है ।
मतलब यह है कि ऐसा तभी हो सकता है जब कांग्रेस भूपेंद्र सिंह हुड्डा की मर्जी के खिलाफ उम्मीदवार तय करने की गलती कर ले। वरना कांग्रेस को अपना उम्मीदवार जिता कर ले जाने में कोई दिक्कत पेश आने वाली नहीं है।
राज्यसभा और हरियाणा की बात करें तो इन चुनाव में हरियाणा कई बार शर्मशार हुआ है और यहां ऐसे ऐसे खेल खेले गए हैं कि जो हुआ उसका पहले किसी को अनुमान तक नहीं था। कभी क्रॉस वोटिंग हुई ,कभी विधायक निलंबित कर दिए गए, कभी वोटिंग के दौरान स्याही बदल दी गई । कई बार कांग्रेस हाई कमान द्वारा तय किए गए उम्मीदवारों को विधानसभा में मुंह की खानी पड़ी। लेकिन लोगों ने यह भी देखा है कि जब भूपेंद्र सिंह हुड्डा के पुत्र दीपेंद्र हुड्डा उम्मीदवार बने तो न तो भाजपा ने कोई दूसरा उम्मीदवार खड़ा किया और न हीं कांग्रेस में फूट उजागर हुई।
सब जानते हैं कि जब बिना पर्याप्त संख्या बल के समर्थन के सुभाष चंद्रा जून 2016 में राज्यसभा का चुनाव लड़ने आए तो जानकार यह कह रहे थे कि उन्होंने यूं ही फॉर्म नहीं भर दिया है इसके पीछे बड़ा मामला है । बिना पूरी तैयारी के ऐसे कोई चुनाव नहीं लड़ता।यह स्थिति उस समय थी जब एडवोकेट आर के आनंद को कांग्रेस और इंडियन नेशनल लोकदल का समर्थन प्राप्त था परंतु पर्याप्त संख्या बल के बावजूद श्री आनंद चुनाव हार गए जबकि सुभाष चंद्रा जीत गए। उस समय विधानसभा में वोटिंग के दौरान स्याही बदलने वाला प्रकरण सामने आया था।
कांग्रेस को गुटबाजी का नुकसान उस समय भी हुआ जब हाई कमान ने अजय माकन जैसे बड़े नाम के उम्मीदवार को प्रत्याशी बनाया वह चुनाव जीत सकते थे परंतु आश्चर्य जनक तरीके से हार गए। कांग्रेस के किन लोगों ने उन्हें हराने का काम किया यह कांग्रेस जान तो गई परंतु साबित नहीं कर पाई।
ऐसा ही खेल उस समय खेला गया जब कार्तिकेय शर्मा अप्रत्याशित तरीके से निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में सांसद बने। इस चुनाव में भी क्रॉस वोटिंग हुई।
मौजूदा चुनाव में एक बात शीशे की तरह साफ है कि भाजपा और कांग्रेस के एक-एक उम्मीदवार तभी आएंगे जब कांग्रेस आम सहमति से और खासतौर पर भूपेंद्र सिंह हुड्डा को विश्वास में लेकर अपना उम्मीदवार तय करेगी यदि कांग्रेस हाईकमान ने अपनी मर्जी का उम्मीदवार लाने की कोशिश की तो उसे एक बार फिर इसका खामियाजा भुगतना पड़ सकता है। यह बात हम नहीं कह रहे राजनीति जानने वाले हरियाणा के बहुत लोग भी यही
मान रहे हैं। एक बात जरूर लग रही है कि भाजपा का उम्मीदवार ब्राह्मण नहीं होगा लेकिन कांग्रेस का उम्मीदवार ब्राह्मण जरूर हो सकता है। सूत्रों से जानकारी मिल रही है कि भाजपा के नेता पूर्व विधायक कुलदीप बिश्नोई राज्यसभा चुनाव में उम्मीदवारी के लिए बड़े स्तर पर लॉबिंग कर रहे हैं। उनकी दिक्कत यह है कि भाजपा का ही एक पावर सेंटर उनके रास्ते का रोड़ा बना हुआ है। जबकि भाजपा में कुछ लोग उन्हें उपयुक्त उम्मीदवार के रूप में भी देख रहे हैं लेकिन समस्या यह है की राजनीति में कई बार आपकी योग्यता ही अयोग्यता बन जाती है।
कांग्रेस की बात करें तो हरियाणा प्रदेश युवक कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष हरियाणा टूरिज्म के पूर्व अध्यक्ष चक्रवर्ती शर्मा के नाम पर सहानुभूति पूर्वक विचार हो सकता है ।कांग्रेस उनकी उम्मीदवारी से संगठन में एक सकारात्मक संदेश देने की स्थिति में है। उन्हें भूपेंद्र सिंह हुड्डा और हाई कमान दोनों के आशीर्वाद का प्रसाद इसलिए भी मिल सकता है कि वह सीधे सरल और विश्वसनीय नेता है और उनका ताल्लुक पुराने रोहतक जिले से भी है। राजनीतिक पर्यवेक्षक इस बात का दावा कर रहे हैं कि भूपेंद्र सिंह हुड्डा अब से पहले तय कर चुके हैं कि कांग्रेस का राज्यसभा का उम्मीदवार कौन होगा लेकिन वह किसी को इसकी भनक भी नहीं लगने देंगे। जब जरूरी होगा तभी सामने आएगा नाम।

