
दक्ष दर्पण समाचार सेवा
पुण्डरी
पुण्डरीक तीर्थ पर श्रीराम मन्दिर के प्रांगण, में राम नवमी के उपलक्ष में जन कल्याणार्थ हेतु श्रीराम कथा का आयोजन किया गया है जिसमें परम पूज्य आदरणीय श्री संतोष जी महाराज अपनी सुमधुर वाणी से राम कथा का रसास्वाद करा रहे हैं।
श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि
भारतीय इतिहास में सबसे देदीप्यमान आदर्श चरित्र भगवान् राम का ही है। यह बहुत वर्षों से हिंदू जाति का पथ-प्रदर्शक रहा है और इसी से यहाँ के निवासी अपने कर्तव्य-पालन की शिक्षा पाते रहे हैं। सच पूछा जाये तो पिछली अनेक शताब्दियों से विदेशियों की सभ्यता तथा संस्कृति के आक्रमण से हिंदू संस्कृति की रक्षा का श्रेय भगवान् राम की पुण्य गाथा को ही है, जिसके मुकाबले का आदर्श चरित्र संसार की और कोई जाति उपस्थित नहीं कर सकी है।
भगवान् राम के चरित्र की सबसे बड़ी विशेषता यही है कि उन्होंने आजीवन अपने हानि-लाभ, सुख-दुःख की परवाह न करके एकमात्र कर्तव्य पालन को ही अपना लक्ष्य रखा और उसके लिए कैसा भी कठिन से कठिन प्रसंग सम्मुख क्यों न आ जाये, वे पश्चात्पद न हुए। इतना ही नहीं, वे बड़ी से बड़ी हानि के अवसर पर भी कर्तव्य की रक्षा के लिए सहर्ष प्रस्तुत हो जाते थे और तनिक भी विचलित न होते थे।

