
दक्ष दर्पण न्यूज़ नेटवर्क
पंचकुला, 12 मई डीडी न्यूज नेटवर्क
संसार में अमन, शांति कायम करने के लिए युगदृष्टा बाबा हरदेव सिंह जी ने ‘‘एकत्व में सद्भाव,’’ ‘‘वसुधैव कुटुम्बकम्,’’ और ‘‘एक को जानो, एक को मानो, एक हो जाओ’’ इत्यादि जैसे अनेक दिव्य संदेश दिये जिसमें निसंदेह लोक कल्याण की भावना निहित है। उन्होंने परस्पर प्रेम और मिलवर्तन के भावों को सुदृढ़ करने के लिए ‘‘दीवार रहित संसार’’ की सुंदर कल्पना को भी साकार रूप प्रदान किया।
यह शब्द संजय सूरी, मेंबर इंचार्ज, भवन निर्माण ने पंचकूला में रविवार को आयोजित सत्संग में कहे। उन्होंने कहा कि समर्पण केवल सुनना नही होता बलिक उसे जीवन मे अपनाकर व जीवांत करना भी होता है। सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज भी आज यही समझा रहे हैं कि समर्पित जीवन लोभ, लालच , अहंकार जैसे अवगुणों से रहित होता है।
उन्होंने आगे समझाया कि एक समर्पण है और दूसरा चुनाव यानी चयन है। समर्पण के बाद चुनाव समाप्त हो जाता है। जब मन के सारे भाव , आकांक्षाएं समर्पित कर दी जाती हैं तो सब कार्य सरलता से हो जाते है।
बाबा हरदेव सिंह जी द्वारा दी गयी शिक्षायों को अपने शब्दों तक ही नहीं बलिक उसे जीवन मे अपनाना ही सही मायनों में समर्पण है।
पंचकूला के संयोजक एस के सोनी जी ने संजय सूरी, मेंबर इंचार्ज, भवन निर्माण का अभिवादन किया।
