
धर्मपाल वर्मा
दक्ष दर्पण समाचार सेवा dakshdarpan2024@gmail.com
नई दिल्ली। हरियाणा में संसदीय चुनाव को लेकर कांग्रेस की रणनीति को आम आदमी समझ रहा है। वह यह कि पार्टी टिकटों के मामले में कोई जल्दबाजी नहीं करना चाहती। फूक फूक कर कदम उठाए जा रहे हैं ।इसका एक कारण यह भी है कि पार्टी राज्य में भाजपा के अलावा दो तीन अन्य राजनीतिक दलों के उम्मीदवारों की सूची को मध्य नजर रखते हुए फैसला लेना चाहती है। पार्टी इंडियन नेशनल लोकदल जननायक जनता पार्टी और बहुजन समाज पार्टी के उम्मीदवारों की सूची का अध्ययन भी करेगी ।
पाठकों को यह समझ लेना चाहिए कि भिवानी महेंद्रगढ़ में जेजेपी की ओर से राव बहादुर सिंह के प्रत्याशी के रूप में सामने आने के बाद अब कांग्रेस के राव दान सिंह को टिकट मिलने के आसार कम हो गए हैं। लेकिन गुरुग्राम से राज बब्बर के उम्मीदवार होने के बाद किसी यादव को भिवानी महेंद्रगढ़ में टिकट देने की जरूरत कांग्रेस की मजबूरी भी बन सकती है।
कांग्रेस अपने सबसे मजबूत और अनुभवी उम्मीदवारों को मैदान में उतारने पर भी विचार कर सकती है ।इसमें हाल में कांग्रेस में शामिल हुए दिग्गज नेता चौधरी बीरेंद्र सिंह को हिसार से और किरण चौधरी को भिवानी महेंद्रगढ़ से टिकट दी जा सकती है। चौधरी बीरेंद्र सिंह के पुत्र और हिसार के निवर्तमान सांसद बृजेंद्र सिंह को विधानसभा चुनाव में उचाना से टिकट देने के प्रस्ताव पर विचार किया जा सकता है। ऐसा ही भिवानी महेंद्रगढ़ के मामले में भी संभव है। जहां किरण चौधरी को लोकसभा चुनाव लड़ा कर उनकी पुत्री श्रुति चौधरी को तोशाम से विधानसभा का चुनाव लड़ाने की योजना के तहत कोई फैसला लिया जा सकता है। वैसे इस समय तक कांग्रेस की सोच बृजेंद्रसिंह को हिसार और श्रुति चौधरी को भिवानी महेंद्रगढ़ से चुनाव लड़ाने की बताई गई है। कांग्रेस अभी करनाल और सोनीपत में कोई मजबूत और स्वीकार्य उम्मीदवार नहीं ढूंढ पाई है। करनाल से अभिनेता संजय दत्त का नाम चला था लेकिन उन्होंने चुनाव नहीं लड़ने का संदेश खुद ही दे दिया। सोनीपत में किसी जाट को चुनाव लड़ाने की संभावना बहुत कम है। पार्टी ब्राह्मण उम्मीदवार के लिए भी सीट तय नहीं कर पा रही है। तीन लोक सभा क्षेत्र ऐसे हैं जहां ब्राह्मण को उनके संख्या बल के आधार पर टिकट दी जा सकती है ।यह है करनाल, सोनीपत और फरीदाबाद। यही कारण है कि हरिद्वार नगर परिषद के पूर्व अध्यक्ष और कांग्रेस के नेता सतपाल ब्रह्मचारी को सोनीपत से टिकट देने की चर्चा चल रही हैं। सूत्र बता रहे हैं कि पार्टी के दो बड़े नेता वरिष्ठता के नाम पर भूपेंद्र सिंह हुड्डा को रोहतक से चुनाव लड़ाने पर जोर दे रहे हैं। वह दीपेंद्र हुड्डा के राज्यसभा सांसद होने की दुहाई देकर बेवजह रिस्क नहीं लेने का तर्क देकर हाई कमान का ध्यान आकृष्ट करने में लगे हुए हैं। जबकि पार्टी के कुछ नेता हुड्डा को चुनाव लड़ने की बजाय लड़ाने की भूमिका में उपयोगी बता कर उपरोक्त प्रस्ताव को खारिज कर चुके हैं।

यहां यह समझना भी जरूरी है कि चौधरी वीरेंद्र सिंह के कांग्रेस में आने के बाद हरियाणा में एसआरके ग्रुप का नाम बदलकर बीएसआरके या एसआरके बी भी हो सकता है। चौधरी वीरेंद्र सिंह मंच से बेशक रणदीप सुरजेवाला को अपने मामा का बेटा और भूपेंद्रसिंह हुड्डा को बूआ का बेटा बताते हो परंतु कांग्रेस में उनकी एंट्री का सूत्रधार एसआरके ग्रुप है।


अंबाला सुरक्षित सीट पर कुमारी शैलजा को रिप्लेस कर सकते हैं विधायक वरुण चौधरी
अंबाला लोकसभा क्षेत्र से मुलाना के कांग्रेस के विधायक वरुण चौधरी को कांग्रेस के संभावित उम्मीदवार के रूप में देखा जा रहा है ।वरुण अंबाला में पार्टी के उपयुक्त उम्मीदवार माने जा रहे हैं। वरुण चौधरी युवा ऊर्जावान और प्रगतिशील कांग्रेस नेता तो है ही, उनके परिवार की राजनीतिक पृष्ठभूमि उन्हें अन्य उम्मीदवारों से मजबूत और उपयुक्त बनाती है। वह बेशक पहली बार विधायक बने हैं लेकिन जनता में ,विधानसभा में और मीडिया में भी उन्होंने अपनी राजनीतिक परिपक्वता का परिचय दिया है। कई मामलों में वरुण भाजपा की प्रत्याशी बंतो कटारिया पर निश्चित तौर पर भारी पड़ेंगे ऐसा इस क्षेत्र के जानकार मानकर चल रहे हैं। वरुण चौधरी 1968 से चुनावी राजनीति में संलग्न हरियाणा के कांग्रेस के वरिष्ठ नेता फूलचंद मौलाना के पुत्र हैं। श्री मुलाना हरियाणा प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष और दो बार हरियाणा के शिक्षा मंत्री रह चुके हैं। श्री मुलाना भी इस क्षेत्र में सकारात्मक पहचान वाले नेता के रूप में जाने जाते हैं ।कभी चौधरी भजनलाल के करीबी हुआ करते आज भूपेंद्र सिंह हुड्डा की गुड बुक्स में है। 1982 में निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में भी चुनाव जीत चुके श्री मुलाना अब सक्रिय राजनीति से रिटायर हो चुके हैं लेकिन उनका पुत्र चुनाव लड़ेगा तो उन्हें इस सक्रिय भूमिका में देखा जा सकता है। फरीदाबाद गुरुग्राम सोनीपत और करनाल में उम्मीदवार तय करते समय कुछ बड़े फेरबदल भी हो सकते हैं। लेकिन सिरसा से कुमारी शैलजा और रोहतक से दीपेंद्र हुड्डा का चुनाव लड़ना लगभग तय है। कांग्रेस 15 अप्रैल से पहले कोई सूची जारी करती नजर नहीं आ रही है।
