
सांसद बृजेंद्र सिंह हिसार की बजाय सोनीपत से भी लड़ सकते हैं चुनाव।
धर्मपाल वर्मा
डीडी न्यूज नेटवर्क (पॉलिटिकल डेस्क) चण्डीगढ़ । dakshdarpandaily @gmail.com
आज 16 मार्च है निर्वाचन आयोग संसदीय चुनाव 2024 की तारीखों की घोषणा कर रहा है हरियाणा में भारतीय जनता पार्टी आज कल में ही सभी 10 सीटों के उम्मीदवार तय कर देगी लेकिन कांग्रेस इस मामले में काफी पीछे है और उसे अपने उम्मीदवारों की सूची जारी करने में समय लगेगा। इसलिए जब तक दोनों प्रमुख राजनीतिक दलों के उम्मीदवारों के नाम सामने नहीं आते तब तक यह जानने में समय लगेगा की किस लोकसभा सीट पर क्या स्थिति है। बेशक भारतीय जनता पार्टी एक बार फिर 10 की 10 सीटे जीतने का दावा कर रही हो। भारतीय जनता पार्टी ने 6 सीटों पर अपने उम्मीदवार घोषित कर दिए हैं ।दो सीटिंग एमपी चुनाव नहीं लड़ रहे हैं जो चार बाकी हैं उनमें एक और सिटिंग एमपी को टिकट मिलने वाली नहीं है वह सीट है सोनीपत। सोनीपत से सटी रोहतक सीट पर भी सिटिंग एमपी डॉक्टर अरविंद शर्मा को टिकट नहीं दिए जाने के समाचार प्राप्त हो रहे हैं लेकिन स्थिति कुछ ऐसी बन रही है की अंत में डॉक्टर अरविंद शर्मा को रोहतक से ही चुनाव लड़ाना पड़ सकता है। यहां उनके विकल्प के रूप में दो नाम और सामने आए हैं। एक ओमप्रकाश धनखड़ और दूसरे बाबा बालक नाथ। बाबा बालक नाथ पहले अलवर से सांसद थे अब राजस्थान में तिजारा से विधायक हैं ।यदि उन्हें रोहतक से लड़ाया गया वह जीत गए तो फिर तिजारा से त्यागपत्र देना पड़ेगा उप चुनाव कराना पड़ेगा। बाबा बालक नाथ लंबे समय से राजस्थान की राजनीति कर रहे हैं हरियाणा में उनकी राजनीतिक गतिविधियां लगभग शून्य हैं ।ऐसे में उन्हें टिकट देने का औचित्य जनता की ही समझ में नहीं आ रहा है । इसके अलावा जहां तक ओमप्रकाश धनखड़ का सवाल है वह दीपेंद्र के मामले में बहुत कमजोर प्रत्याशी सिद्ध होंगे यह पार्टी भी जानती है। वे 2014 में इसी सीट से भाजपा उम्मीदवार थे मोदी की आंधी में भी हार गए थे ।असल में ओमप्रकाश धनखड़ का कहीं जनाधार ही नहीं है और उन्हें पार्टी कहीं से टिकट देने को भी तैयार नहीं है। ऐसे में फिर बचा कौन। केवल डॉक्टर अरविंद शर्मा। वह जीतेंगे या हारेंगे यह बाद की बात है लेकिन आज भी यह आम मान्यता है कि रोहतक में दीपेंद्र को डॉक्टर अरविंद शर्मा ही हरा सकता है । मतलब वह सबसे मजबूत उम्मीदवार है। भारतीय जनता पार्टी के नेताओं को इस बात का भी पता है कि डॉक्टर अरविंद शर्मा को टिकट नहीं दी गई उन्हें खाली छोड़ दिया गया तो वह चुप बैठने वाले नहीं है।

ओलंपियन योगेश्वर दत्त एक मौका और मिल सकता है भाजपा की टिकट पर चुनाव लड़ने का।
अब बात करते हैं सोनीपत की। पार्टी ने यहां भी यह मन बना लिया है कि ब्राह्मण को टिकट देनी हैं। उम्मीदवार दो ही है मोहनलाल बडोली विधायक और योगेश्वर दत्त ओलंपियन। मोहनलाल और योगेश्वर में से किसी को भी टिकट दी जा सकती है मामला 50-50 है परंतु मोहनलाल को टिकट नहीं दी गई तो वह हरियाणा प्रदेश भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष के उम्मीदवार भी हैं। हाल में विधायक हैं इसलिए योगेश्वर दत्त को मौका मिलने के आसार बन रहे है। कुछ लोग डॉक्टर अरविंद शर्मा को भी सोनीपत से टिकट दिए जाने की बात कर रहे हैं।

डॉक्टर अरविंद शर्मा मजबूरी भी जरूरी भी ।
इस समय भारतीय जनता पार्टी का नेतृत्व गैर जाट मतदाताओं को फ़ोकस करता नजर आ रहा है। ऐसे में एक दो गैर जाट उम्मीदवार बढ़ जाए जाट घट जाए तो भाजपा को कोई नुकसान नहीं हो सकता। पार्टी नेताओं को ही यह एहसास हो गया है कि जाट अमूमन भाजपा के पक्षधर है ही नहीं। इसलिए पार्टी हिसार के मामले में बड़ा फैसला ले सकती है जहां पिछड़ा वर्ग ए को प्रतिनिधित्व देते हुए कुम्हार समुदाय के रणबीर गंगवा को टिकट मिल सकती है। पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर लाल उनके पक्षधर हैं। यहां कैप्टन अभिमन्यु टिकट के प्रबल दावेदार हैं। टिकट कुलदीप बिश्नोई भी मांग रहे हैं लेकिन परिवारवाद उनका रास्ता रोकता है। क्योंकि उनका बेटा आदमपुर से विधायक है। उन्हें टिकट दी गई तो फिर पार्टी की कई और नेता अपने परिजनों के लिए टिकट मांगेंगे ।भारतीय जनता पार्टी इस मामले में समझौता करती नजर नहीं आ रही।
इंडिया गठबंधन द्वारा कुरुक्षेत्र लोकसभा सीट आम आदमी पार्टी के लिए छोड़ने और आम आदमी पार्टी द्वारा डॉ सुशील गुप्ता जैसे मजबूत उम्मीदवार को मैदान में उतारे जाने के फैसले के बाद कुरुक्षेत्र सीट भी हॉट सीट बन गई है। भारतीय जनता पार्टी अ इनपने मुख्यमंत्री की इस सीट को बड़े मार्जिन से जीत कर एक संदेश देना चाहती है। ऐसे में बड़े उम्मीदवार की तलाश भी की जा रही है और उम्मीदवार लगभग तय कर लिया गया है। कुरुक्षेत्र के कांग्रेस के पूर्व सांसद नवीन जिंदल की पत्नी शालू जिंदल को कुरुक्षेत्र से भारतीय जनता पार्टी की टिकट दिए जाने के आसार बन रहे हैं। वे जहां मजबूत उम्मीदवार हो सकती हैं वही उनके नाम पर भारतीय जनता पार्टी अग्रवाल समाज और महिला वर्ग दोनों को प्रतिनिधित्व दे सकता है।

राज बब्बर हरियाणा से कांग्रेस के उम्मीदवार तो हो सकते हैं पर प्राथमिकता फरीदाबाद गुरुग्राम नहीं।
चर्चा कांग्रेस की।
अब हम कांग्रेस की चर्चा भी कर लेते हैं। यहां एक सवाल तो यह बना हुआ है कि पार्टी की नेत्री कुमारी शैलजा अंबाला से चुनाव लड़ेंगी या सिरसा से। वैसे भारतीय जनता पार्टी यह मानकर चल रही है कि कुमारी शैलजा सिरसा से ही लड़ने वाली हैं। यही कारण है कि डॉक्टर अशोक तंवर को टिकट दी गई है। कुमारी शैलजा का नाम अंबाला और सिरसा दोनों सीटों से भेजा गया है। बताते हैं कि भूपेंद्र सिंह हुड्डा चाहते हैं कि कुमारी शैलजा अंबाला से चुनाव लड़े लेकिन शैलजा की प्राथमिकता सिरसा बताई गई है ।पार्टी में यह मानने वाले लोगों की संख्या भी कम नहीं है कि शैलजा अंबाला से भी चुनाव लड़ सकती है लेकिन अंबाला से नहीं लड़ी तो कांग्रेस किस उम्मीदवार को मैदान में उतारे यह भी एक बड़ा सवाल बना हुआ है।

अंबाला में कांग्रेस के मजबूत उम्मीदवार के रूप में देखे जा रहे हैं चौधरी लहरी सिंह।
आपको बता दें कि पार्टी में निष्पक्ष सोच रखने वाले काफी लोग पूर्व मंत्री चौधरी लहरी सिंह को अंबाला लोकसभा क्षेत्र से कांग्रेस का उपयुक्त उम्मीदवार मानते हैं। चौधरी लहरी सिंह वैसे तो काफी लंबे समय से चुनावी राजनीति से तौबा कर चुके हैं एक तरह से रिटायरमेंट ले चुके हैं लेकिन ऐसा माना जा रहा है कि वह पार्टी के प्रस्ताव को स्वीकार भी कर सकते हैं ।इस समय उन्हें पार्टी का करनाल जिले का इंचार्ज बनाया गया है ।चौधरी लहरी सिंह जमीन से जुड़े व्यवहारिक और लोकप्रिय नेता है ईमानदार हैं। इस समय पूर्व मुख्यमंत्री चौधरी भूपेंद्र सिंह हुड्डा के करीबी है । 1977 में पहली बार रादौर से जनता पार्टी की टिकट पर विधायक बने थे। उसके बाद 1991 में हरियाणा विकास पार्टी की टिकट पर जीते बाद में कांग्रेस में शामिल हो गए थे। रादौर के अलावा पंचकूला विधानसभा क्षेत्र में उनका व्यक्तिगत हस्तक्षेप किसी से छुपा नहीं है। वह पंचकूला में ही रहते हैं।वे कांग्रेस पार्टी के लिए उपयुक्त उम्मीदवार हो सकते हैं। कांग्रेस के उम्मीदवार के रूप में पार्टी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष फूलचंद मुलाना के पुत्र और विधायक वरुण चौधरी के बारे में यह माना जा रहा है कि वे अभी विधानसभा की ही राजनीति करना चाहते हैं । मतलब उनकी लोकसभा के चुनाव में उतनी रुचि नहीं है।उसके बाद कुछ और नाम भी हैं। सिक्ख चेहरे के रूप में बलविंदर खेड़ा यमुनानगर रीजन से मेहनती नेता बृजपाल छप्पर भी टिकट के लिए प्रयास कर रहे हैं अंबाला से दो बार कांग्रेस के उम्मीदवार के रूप में भाग्य आजमाने वाले वाले पूर्व विधायक राजकुमार वाल्मीकि एक बार फिर टिकट मांग रहे बताए गए हैं। नायब सैनी के मुख्यमंत्री बन जाने के बाद दो लोकसभा क्षेत्रों में भारतीय जनता पार्टी को स्वाभाविक मजबूती मिलेगी। उनमें कुरुक्षेत्र के अलावा अंबाला भी है क्योंकि अंबाला मुख्यमंत्री का गृह जिला है। ऐसे में कांग्रेस को अंबाला में उम्मीदवार का फैसला बहुत सोच समझ कर लेना पड़ेगा।
कांग्रेस में कुछ और सवाल यक्ष प्रश्न बने हुए हैं ।भूपेंद्र सिंह हुड्डा भिवानी महेंद्रगढ़ से राव दान सिंह के लिए टिकट मांग रहे हैं। उन्हें कई कारणों से मजबूत उम्मीदवार माना जा रहा है कांग्रेस के हुड्डा समर्थक कार्यकर्ता और नेता राव दान सिंह को विनिंग कैंडिडेट के रूप में प्रस्तुत कर रहे हैं लेकिन भिवानी के लोग ही नहीं प्रदेश में भी बहुत लोग यह मानने को तैयार नहीं कि किरण चौधरी की लड़की श्रुति चौधरी को टिकट नहीं मिलेगी। कांग्रेस में एक चर्चा फिल्म स्टार राज बब्बर को लेकर भी है यह प्रस्ताव भी भूपेंद्र सिंह हुड्डा का बताया गया है। राज बब्बर की ओर से प्राथमिकता फरीदाबाद है इससे दो बातें जरूर हो सकती हैं एक तो कांग्रेस पंजाबी समुदाय को प्रतिनिधित्व दे पाएगी दूसरा राज बब्बर को फरीदाबाद के यूपी से के सीमावर्ती क्षेत्र का लाभ मिलेगा। अब फरीदाबाद में भूपेंद्र सिंह हुड्डा के नजदीकी और रिश्तेदार करण दलाल टिकट मांग रहे हैं ऐसे में श्री हुड्डा राज बब्बर को फरीदाबाद से लड़ाने को कैसे तैयार होंगे। फरीदाबाद से प्रख्यात पत्रकार जगजीत शर्मा भी टिकट के लिए कोशिश कर रहे हैं उन्हें कुमारी शैलजा रणदीप सुरजेवाला जैसे नेताओं का ही आशीर्वाद प्राप्त हो सकता है वे स्थानीय उम्मीदवार तो हैं ही ब्राह्मण भी है।
कांग्रेस में एक सवाल यह भी है कि भारतीय जनता पार्टी छोड़कर कांग्रेस में आए सांसद बृजेंद्र सिंह हिसार से चुनाव लड़ेंगे या सोनीपत से। पता चला है कि चौधरी भूपेंद्र सिंह हुड्डा जयप्रकाश को छोड़कर संपत सिंह के पुत्र को हिसार से टिकट देने के पक्ष में हैं। ऐसे में एक रणनीति के तहत वह बृजेंद्र सिंह को सोनीपत से टिकट देने के प्रस्ताव को भी हरी झंडी मिल सकती है। चौधरी वीरेंद्र सिंह ने भी 2009 में सोनीपत से टिकट मांगी थी। बृजेंद्र सिंह सोनीपत आए तो कांग्रेस की समस्या समाप्त हो जाएगी वह है उम्मीदवार की। चौधरी वीरेंद्र सिंह ने हाल में श्रीमती सोनिया गांधी से मिलने का समय मांगा है उनकी भेंट कब होगी उसके बाद भी कुछ नई चीजें सामने आएंगी। यहां एक बड़ा सवाल यह है कि किसी तरह भी चौधरी वीरेंद्र सिंह अपने पुत्र विजेंद्र सिंह को सोनीपत से टिकट दिलाने में सफल हो गए तो हरियाणा में कांग्रेस पार्टी का कलेवर बदल जाएगा और इसके बहुत बड़े अर्थ निकलेंगे यह फैसला हरियाणा की राजनीति में भी निर्णायक साबित हो सकता है। जहां तक बृजेंद्र सिंह का सवाल है वह दोनों सीटों में किसी पर भी लड़ने को तैयार हो सकते हैं लेकिन क्योंकि हिसार में वह काम नहीं कर पाए इसलिए उनकी प्राथमिकता सोनीपत भी हो सकती है। कुछ भी कहो इस समय हरियाणा में एक स्थिति जरूर है कि बेशक भारतीय जनता पार्टी 10 की 10 सीट जीत जाए लेकिन एकतरफे मुकाबले होने के हालात नहीं है ।


उद्योगपति एवं पूर्व सांसद नवीन जिंदल की पत्नी श्रीमती शालू जिंदल हो सकती है कुरुक्षेत्र से भाजपा की प्रत्याशी ।
