
प्रियंका के लिए माकूल हो सकता है हरियाणा का लोकसभा क्षेत्र सोनीपत !
धर्मपाल वर्मा
दक्ष दर्पण समाचार सेवा dakshdarpan2022@gmail.com
चंडीगढ़
पिछले दिनों सोशल मीडिया पर जब यह खबर वायरल हुई कि कांग्रेस के नेता राहुल गांधी हरियाणा में सोनीपत जिले के बरोदा विधानसभा क्षेत्र के एक गांव मैं अचानक खेतों में धान की रोपाई कर रहे किसानों के बीच में पहुंच गए और उन्होंने खेत में पानी में खड़े होकर धान की पौध की रोपाई भी की। यह भी खबर आई कि राहुल गांधी ने इन्हीं किसानों के साथ नाश्ता भी किया। बताया यह गया था कि राहुल गांधी ने शिमला जाते हुए अचानक किसानों के बीच में जाने का फैसला किया। उस समय काफी लोगों को यह लग रहा था कि राहुल गांधी अचानक ही किसानों के बीच में इसलिए पहुंच गए होंगे कि इस तरह के निर्णय करते रहना उनके स्वभाव में है। परंतु बाद में सवाल उठा कि यदि जीटी रोड से जा रहे राहुल गांधी को सामान्य तौर पर यही काम करना था तो उस दौरान जीटी रोड पर सारे कृषि क्षेत्र में धान लगाने का काम चल रहा था तो वह 50 किलोमीटर अंदर क्यों चले गए । राहुल गांधी को कैसे पता चला होगा कि उस समय मदीना गांव के किस किसान के खेत में धान लगाने की सारी औपचारिकताएं पूरी हैं। मतलब धान की पौध रोकने के लिए खेत में पानी भर देने जैसा काम कर रखा है। सुबह 7:00 बजे उनके लिए यूं अचानक नाश्ता कैसे आ गया। जबकि अमूमन खेत में काम करने वालों के लिए भोजन की व्यवस्था दोपहर के समय होती है।
मतलब यह है कि बाद में यह बात बहुत लोगों की समझ में आ गई कि यह शुद्ध तौर पर एक सियासी इवेंट की तरह आयोजित किया गया कार्यक्रम था । बाद में मीडिया में यह चर्चा भी हुई कि इस इवेंट की तैयारी की बागडोर दीपेंद्र हुड्डा और बरोदा के विधायक इन्दू राज भालू ने संभाल रखी थी । राहुल गांधी के खेत में जाने के कुछ देर बाद विधायक इन्दू राज नरवाल भी मौके पर पहुंच गए थे।
राहुल गांधी ने खेत में विद्यमान महिलाओं की प्रियंका गांधी से टेलीफोन पर बात कराई फिर प्रियंका ने सबको अपने दिल्ली स्थित आवास पर आमंत्रित किया और कुछ दिन बाद लगभग 40 महिलाएं एक बस में सवार होकर प्रियंका गांधी के आवास पर दिल्ली पहुंची। महिलाओं ने सोनिया गांधी और प्रियंका गांधी के साथ नृत्य भी किया।
कई बार लोग कुछ घटनाओं को सामान्य दृष्टिकोण से हटकर अपने ही नजरिया से देखने लगते हैं और उनकी सोच सार्थक साबित हो जाती है। इसमें कोई संदेह नहीं कि राजनीतिक व्यक्ति और चुनाव एक सिक्के के दो पहलू हैं।
इसी संदर्भ में आपको बता दें कि ज्यों ही इस घटना के साथ प्रियंका गांधी का नाम जुड़ा , राजनीतिक सोच रखने वाले कुछ लोगों ने इस बात पर भी चर्चा करनी शुरू कर दी कि कहीं ऐसा तो नहीं कि कांग्रेस के नेता और पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा गांधी परिवार को इस बात के लिए
तैयार कर रहे कि वह प्रियंका गांधी को सोनीपत लोक सेवा क्षेत्र से चुनाव लड़ाने को तैयार करें।

मदीना गांव पहुंचे राहुल गांधी ने खेत में ट्रैक्टर चला कर भी देखा।
सोनीपत लोकसभा क्षेत्र राष्ट्रीय राजधानी नई दिल्ली के साथ सटा हुआ ऐसा लोकसभा क्षेत्र है जिसे गांधी परिवार बड़ी आसानी से संभाल सकता है। भूपेंद्र सिंह हुड्डा जहां रोहतक लोकसभा क्षेत्र को लेकर चिंतित हैं वहीं उनकी चिंता सोनीपत भी है और वह जानते हैं कि एक हल्का मजबूत होने से दूसरा भी निश्चित तौर पर मजबूत होगा ।प्रियंका गांधी के सोनीपत से चुनाव लड़ने की स्थिति में रोहतक में दीपेंद्र हुड्डा की जीत की संभावनाएं पहले से भी ज्यादा बढ़ जाएगी और इससे हरियाणा की सभी 10 सीटों पर लाभ होता नजर आएगा। बहुत लोग इसे इसलिए उपयोगी योजना मानते हैं कि गांधी परिवार में जहां श्रीमती सोनिया गांधी उत्तर प्रदेश में रायबरेली से चुनाव लड़ती आ रही है वहीं राहुल गांधी ने अमेठी के बाद वायनाड को अपना चुनाव क्षेत्र बना लिया है परंतु अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी की महासचिव के रूप में काम करने वाली और उत्तर प्रदेश को विशेष तौर पर कांग्रेस के लिए अनुकूल बनाने का प्रयास कर रही प्रियंका गांधी उत्तर प्रदेश में ही अपने लिए कोई सुरक्षित लोकसभा क्षेत्र नहीं तलाश कर पा रही हैं ।योगी आदित्यनाथ के उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री बनने के बाद लोकसभा में चुनाव में भी उत्तर प्रदेश कांग्रेस के लिए कठिन होता जा रहा है ।ऐसे में प्रियंका गांधी के लिए सोनीपत लोकसभा क्षेत्र एक विचारणीय विषय हो सकता है । बेशक 2019 में खुद भूपेंद्र सिंह हुड्डा सोनीपत लोकसभा क्षेत्र से चुनाव हार गए लेकिन अब बदली हुई परिस्थितियों में जिस तरह से यहां कांग्रेस की मजबूती की खबरें आ रही है उसे देखते हुए भूपेंद्र सिंह हुड्डा और दीपेंद्र हुड्डा गांधी परिवार को उनकी लोकप्रियता का हवाला देकर इससे संभावना को सिरे चढ़ाने का प्रयास कर सकते हैं।
यह एक विशेष विचारणीय विषय है कि भूपेंद्र सिंह हुड्डा ऐसी स्थिति में विशेष तौर पर सोनीपत लोकसभा क्षेत्र के सभी नौ विधानसभा क्षेत्रों में मतदाताओं में हरियाणा में कांग्रेस की सरकार बनने और खुद मुख्यमंत्री बनने की पक्की संभावनाओं का संकेत देकर एक खास संदेश देने की स्थिति में भी आ सकेंगे।
भूपेंद्र सिंह हुड्डा आजकल हर मामले में जहां फूंक फूंक कर कदम रख रहे हैं वहीं अपने राजनीतिक कौशल का परिचय भी देते आ रहे हैं। वह जानते हैं कि यदि प्रियंका गांधी उनकी पहल पर सोनीपत लोकसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ने को तैयार हो गई तो इसके न केवल अच्छे परिणाम सामने आएंगे बल्कि उनके पहले खुद मुख्यमंत्री बनने और फिर दीपेंद्र हुड्डा को मुख्यमंत्री बनाने के स्वप्न भी साकार हो सकेंगे।
ऐसे में पार्टी में उनके विरोधी इसी बात को जानकार बिलों में घुस जाएंगे कि प्रियंका गांधी भूपेंद्र सिंह हुड्डा की पहल पर चुनाव लड़ने को तैयार हो गई है।
यहां यह जान लेना भी जरूरी है कि सोनीपत लोकसभा क्षेत्र में तीन विधानसभा क्षेत्र जींद जिले के हैं इसलिए यह भी जरूरी है कि इस तरह का बड़ा फैसला लेते समय कांग्रेस के सूत्रधार नेता हरियाणा के दूसरे नेताओं को भी विश्वास में जरूर लेंगे। यहां रणदीप सिंह सुरजेवाला जिनका गृह जिला जींद ही है, को भी नीति निर्धारण में शामिल करना जरूरी होगा और हरियाणा की कांग्रेस की बड़ी दलित नेत्री कुमारी शैलजा को विश्वास में लिए बिना यह फैसला सिरे नहीं चढ़ पाएगा।
बेशक 2014 से भारतीय जनता पार्टी सोनीपत से चुनाव जीतती आ रही है परंतु 1977 में अस्तित्व में आए सोनीपत लोकसभा क्षेत्र में 1984 1991 2009 में कांग्रेस के उम्मीदवार विजयी रहे हैं। सोनीपत से पूर्व उप प्रधानमंत्री स्वर्गीय चौधरी देवीलाल 1980 में सांसद रहे वहीं पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय चौधरी चरण सिंह ने भी सोनीपत से चुनाव लड़ने की कोशिश की परंतु एक साजिश के तहत उनका नामांकन रद्द हो जाने के कारण चुनाव नहीं लड़ पाए । इसके अलावा 1989 में चौधरी देवीलाल ने पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय वी पी सिंह को सोनीपत से चुनाव लड़ने को तैयार कर लिया था लेकिन फ्लाइट लेट होने के कारण वह नामांकन पत्र दाखिल करने से चूक गए। उसके बाद सोनीपत से एक वरिष्ठ पत्रकार कपिल देव शास्त्री को टिकट दिया गया और उन्हें भी सांसद बनने का मौका मिला।
सोनीपत ऐसा लोकसभा क्षेत्र है जहां से चुनाव लड़ने के लिए पूर्व केंद्रीय मंत्री चौधरी वीरेंद्र सिंह ,भाजपा के नेता कैप्टन अभिमन्यु ही नहीं पूर्व केंद्रीय मंत्री जयप्रकाश की भी रुचि रही है। सोनीपत हरियाणा का दूसरा ऐसा लोकसभा क्षेत्र है जिसने देश को डॉक्टर अरविंद शर्मा के रूप में एक निर्दलीय सांसद दिया।
इस समय कांग्रेस की चिंता सोनीपत से एक सक्षम और मजबूत उम्मीदवार लाकर चुनाव जीतने की है ।ऐसे में यदि प्रियंका गांधी सोनीपत से चुनाव लड़ने को तैयार हो जाती है तो पार्टी को एक मजबूत उम्मीदवार मिल जाएगा और प्रियंका गांधी को चुनाव लड़ने के लिए एक ऐसा लोकसभा क्षेत्र जो दिल्ली से सटा हुआ है। राजनीतिक पर्यवेक्षक यह मानते हैं कि सोनीपत में जाट मतदाताओं की संख्या रोहतक से भी ज्यादा है जो भूपेंद्र सिंह हुड्डा के कारण तथा गैर जाट मतदाता उम्मीदवार के रूप में प्रियंका गांधी के कारण कांग्रेस को वोट देने की लिए एकजुट हो सकते हैं। प्रियंका गांधी खुद को पंजाबी परिवार की बहु बता कर भी कांग्रेस के लिए वोट मांगती हैं ।जाहिर है उन्हें यह विश्वास है कि पंजाबी मतदाता भी उन्हें सपोर्ट करते हैं ।ऐसे में उन्हें सोनीपत लोकसभा क्षेत्र के शहरों में खास समर्थन प्राप्त हो सकता है।
हम यह नहीं कहते की प्रियंका गांधी सोनीपत लोकसभा क्षेत्र से जरूर चुनाव लड़ेंगी लेकिन राजनीति में बहुत कुछ ऊपर नीचे होता रहता है अप्रत्याशित फैसले होते हैं और नेताओं के चुनाव क्षेत्र भी बदलते रहते हैं। ऐसे में उपरोक्त संभावना से इनकार भी नहीं किया जा सकता। यहां एक बार फिर कहा जा सकता है कि लगता तो नहीं पर हो भी सकता है।

गांव की महिलाओं के साथ खेत में ही नाश्ता करते राहुल गांधी।

इतिहास बन सकती है राहुल गांधी की यह पहल ।

इस बार फिर रोहतक के साथ सोनीपत भी जीतने की कोशिश में दिन-रात एक कर रहे हैं भूपेंद्र सिंह हुड्डा और दीतेंद्र हुड्डा।
