
धर्मपाल वर्मा
दक्ष दर्पण समाचार सेवा। dakshdarpan2024@gmail.com
चण्डीगढ़।
राजनीति भी एक खेल है कोई इसे शतरंज की तरह खेलता है कोई इसे कबड्डी की तरह भी खेलता है । हरियाणा की राजनीति में भाजपा के नेता पूर्व विधायक कुलदीप बिश्नोई आजकल पार्टी में उपेक्षा के कारण कुछ नाराज दिख रहे हैं उनके बागी तेवर भी सामने आए परंतु उन्हें बागी होने से बचना चाहिए और राजनीति को कबड्डी की तरह खेलना चाहिए जिसमें रेडर कभी आगे जाता है कभी पीछे हटता है कभी आक्रामक हो जाता है कभी अपना बचाव करता नजर आता है। उन्हें यह बात भी मन मस्तिष्क में रख कर चलना चाहिए कि राजनीति मौके के अनुसार उचित फैसले लेने का नाम है। उन्हें अब सब्र और परिपक्वता का परिचय देना चाहिए।

कुलदीप विश्नोई ।
अब एक बात तो सबको लगने लगी है कि कुलदीप बिश्नोई नाराज तो अब भी है लेकिन अब बागी नहीं है और भाजपा छोड़कर कहीं जाने वाले भी नहीं हैं। उन्होंने कांग्रेस में तोअपने रास्ते खुद ही बहुत ही आक्रामक होकर और पार्टी के सूत्रधार राहुल गांधी तक को सीधे नाराज करके बंद कर लिए हैं । खुद की पार्टी बनाकर देख ली है। भाजपा को ,भाजपा के कई नेताओं को चैलेंज करके भी देख लिया है परंतु राजनीति की सोच रखने वाले लोगों का मानना है कि अब कुलदीप बिश्नोई के दो चीजें ही काम आएंगी । एक सब्र, दूसरा अनुसरण।
कुलदीप बिश्नोई को आज यह बात समझ में आ गई होगी कि किसी भी नेता को अपने राजनीतिक अस्तित्व के लिए किसी न किसी सदन का नेता जरूर बना रहना चाहिए ।वह चाहे सांसद हो चाहे विधायक हो। उन्होंने समझ लिया होगा कि भाजपा में ही योग्य होते हुए भी कैप्टन अभिमन्यु ,ओम प्रकाश धनकड़ और रामविलास शर्मा जैसे नेता किस तरह से चमक खो बैठे हैं। कुलदीप बिश्नोई के लिए भी यह बुरी बात है कि वह खुद किसी सदन के सदस्य नहीं है और उनका राजनीतिक उत्तराधिकारी और पुत्र भव्य बिश्नोई भी आदमपुर की उनकी पुश्तैनी सीट से चुनाव हार चुके हैं। यह बात कुलदीप बिश्नोई के लिए इसलिए दुखद है कि इस सीट से वह खुद, उनके पिता चौधरी भजनलाल, उनकी माता जश्मा देवी और उनके यही पुत्र भी चुनाव जीतते रहे हैं। यह राजनीतिक जमीन खिसकने का एक प्रमाण कहा जा सकता है।
कुलदीप बिश्नोई के लिए एक दिक्कत और है और वह है पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर लाल। मनोहर लाल ही योजना से, तिकड़म से या एक खास रणनीति से कुलदीप बिश्नोई को भाजपा में लेकर आए थे और आज उनसे ही उनका बिगाड़ हो गया है। देखा जाए तो कुलदीप बिश्नोई का भाजपा में खूंटा मजबूत नहीं है ।उन्हें भाजपा में सुषमा स्वराज जैसी ऐसे नेता की सख्त जरूरत है जो उनका भाजपा में शामिल होने से पूर्व भी स्वाभाविक सहयोग करती थी। आज के दौर में अमित शाह उनके काम आ सकते हैं ।लेकिन इसके अलावा कुलदीप बिश्नोई को फिर से लोकप्रियता हासिल करने के लिए ,अपने राजनीतिक अस्तित्व को मजबूत करने के लिए तीन नेताओं को मन मस्तिष्क में रखकर चलना होगा ।यह है स्वर्गीय चौधरी देवीलाल, हरियाणा के दो मंत्री राव नरवीर सिंह और विपुल गोयल।
स्वर्गीय चौधरी देवीलाल इसलिए कि वह उनके लिए प्रेरणा स्रोत हो सकते हैं। वह ऐसे नेता थे जिन्होंने चुनाव जीते कम और हारे ज्यादा। परंतु वह जनता से जुड़े नेता थे और उनका एक व्यवहारिक मूल मंत्र था कि, लोकतंत्र में जो व्यक्ति लोगों के बीच में रहेगा वही नेता बनेगा। कुलदीप बिश्नोई जब चुनाव आता है या कोई दिक्कत आती है तभी लोगों के बीच में जाते हैं कार्यकर्ताओं से भी इसी तरह से मिलते हैं कभी कभार मिलते हैं टेलीफोन उनकी बहुत बड़ी कमजोरी है ।वह अपनों का फोन भी नहीं सुनते। उन्हें अपनी यह आदत सुधारनी पड़ेगी। यहां उनके लिए चौधरी देवीलाल एक प्रेरणा है।
दूसरे नेता है राव नरबीर सिंह। उन्होंने लोक दल, हविपा, भाजपा की उम्मीदवार के रूप में तीन अलग-अलग हलकों से चुनाव लड़े ,तीनों जगह जीते तीनों दलों की सरकार बनी वह तीनों सरकारों में मंत्री रहे। उन्होंने अपने पहले ही चुनाव में राव इंद्रजीत सिंह जैसे नेता को उन्हीं के घर में हराया। पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर लाल के खास है।उनके समय में ही पार्टी ने सीटिंग एम एलए होते हुए भी 2019 में उनकी टिकट काट दी थी। परंतु हालात से समझौता करते हुए सब्र का परिचय देते हुए राव नरवीर सिंह ने शांति से घर बैठना उचित समझा । लोगों के बीच में रहे जनता को उनसे सहानुभूति हो गई ।पार्टी को भी 2024 में उन्हें टिकट देनी पड़ी और राव इंद्रजीत सिंह जैसे नेता के विरोध के बावजूद वह चुनाव जीत गए आज फिर से हरियाणा की कैबिनेट मंत्री हैं।
ऐसा दूसरा उदाहरण विपुल गोयल का है वह भी मनोहर लाल के मंत्रिमंडल में मंत्री थे। 2019 में सिटिंग एमएलए रहते उनकी भी टिकट काट दी गई थी।उन्होंने भी सब्र का परिचय दिया और चुपचाप बैठे रहे। 2024 में पार्टी ने उन्हें फिर से टिकट दे दी । जनता ने सहानुभूति का परिचय दिया और वह चुनाव जीत गए वह भी ताकतवर महकमों के वजीर हैं। कुलदीप बिश्नोई को अब एक बात का और ध्यान रखना चाहिए कि वह राजनीति को प्राथमिकता दें बिजनेस को नहीं। जबकि वह यह गलती बार-बार करते आ रहे हैं। विशेषज्ञ और जानकार यह मानते हैं कि कुलदीप बिश्नोई का आज भी अपना जनाधार है और भाजपा के नेता इस बात को जानते हैं कि ज्यादा नहीं तो आदमपुर विधानसभा तथा हिसार लोकसभा क्षेत्र से कुलदीप बिश्नोई का परिवार ही भाजपा के लिए सीट निकाल कर दे सकता है। कुलदीप बिश्नोई ठंडा करके खाएंगे तो आने वाले समय में उन्हें भारतीय जनता पार्टी हिसार से टिकट देकर लोकसभा का चुनाव लड़ा सकती है और उन्हें इस क्षेत्र में अपने विरोधी जयप्रकाश जेपी को चुनाव में हराने का मौका दे सकती है। भाजपा बेशक परिवारवाद के खिलाफ बात करती हो लेकिन हालात उपयुक्त ना हो तो उसके नेता समझौता वादी मुद्रा में भी नजर आने लग जाते हैं । इसीलिए यह भी संभव है कि कुलदीप बिश्नोई भविष्य में हिसार के भाजपा के सांसद हों और भाजपा विधानसभा के चुनाव में आदमपुर से उनके बेटे भव्य बिश्नोई को ही चुनाव लड़ाने का फैसला ले ले। कहावत है कि, बीती ताहि बिसारि दे, आगे की सुधि लेइ ।जो बनि आवै सहज में, ताही में चित देइ ॥

स्वर्गीय चौधरी भजनलाल।
