
धर्मपाल वर्मा
दक्ष दर्पण समाचार सेवा
पंचकूला।
बेशक भारतीय जनता पार्टी की ओर से यह कहा गया था कि नगर निगम चुनाव के संदर्भ में 20 अप्रैल को चुनाव समिति की बैठक होगी और इसमें सभी उम्मीदवारों के नाम घोषित कर दिए जाएंगे। लेकिन ऐसा हुआ नहीं है और उम्मीदवारों को लेकर पार्टी में ही सहमति नहीं बन पाई है । अब अब पक्ष विपक्ष दोनों के दिलों की धड़कने तेज़ हो गई है।सूत्र बता रहे हैं कि पंचकूला और सोनीपत में भाजपा दौनो निवृत्तमान मेयरों की टिकट काटने की तैयारी में है लेकिन नए उम्मीदवारों पर भी सहमति नहीं बन पा रही है। यह जो देरी है इसका कारण पार्टी की रणनीति नहीं बल्कि मजबूरी है। इस मामले में पार्टी सोनीपत में फिर से इस फार्मूले को अप्लाई करती नजर आ रही है जो नगर निगम केएक पूर्व चुनाव में अप्लाई की गई थी।
तब यह तय किया गया था कि जहां विधायक पंजाबी था वहां अग्रवाल समाज के व्यक्ति को टिकट दी गई थी और जहां विधायक अग्रवाल थे वहां पंजाबी को मेयर उम्मीदवार बनाया गया था। यमुनानगर में ओबीसी को मौका दिया गया था।
सोनीपत में भाजपा का विधायक पंजाबी है इसीलिए पिछले चुनाव में अग्रवाल उम्मीदवार के रूप में राजीव जैन को टिकट दी गई थी। अब किसी नए-अग्रवाल उम्मीदवार की तलाश की खबर है।
पंचकूला में स्थिति सबसे ज्यादा रोचक इसलिए हो गई है कि बेशक पंचकूला में भाजपा का विधायक नहीं है परंतु पार्टी का एक पावर सेंटर मेयर उम्मीदवार के रूप में एक पंजाबी के नाम को आगे कर रहा है। इन नेताओं को शायद यह गुमान है कि उम्मीदवार से कमल के फूल का महत्व ज्यादा है। बात यह है कि पार्षद का चुनाव हार चुके पंजाबी उम्मीदवार को मेयर प्रत्याशी के रूप में प्रस्तुत करने की कोशिश की जा रही है जिसे लोग गलती और गलतफहमी की संज्ञा दे रहे हैं। यह मामला
पार्टी हाई कमान में हिचकोले खा रहा बताया गया है।अब एक नई चर्चा और शुरू हो गई है और वह यह है कि भाजपा ने इन परिस्थितियों में इसी तरह की कोई गलती करके कमजोर और अस्वीकार्य उम्मीदवार को मैदान में उतार दिया तो पंचकूला में निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में पूर्व मेयर उपेंद्र कौर अहलूवालिया के न केवल निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में मैदान में आने की संभावनाएं बढ़ जाएगी बल्कि चुनाव बहुत ही रोचक हो जाएगा।
लोग इन संभावनाओं पर न केवल चर्चा कर रहे हैं बल्कि उन्हें याद आ रहा है कि पहले जहां गुरुग्राम नगर निगम में निर्दलीय मेयर चुनी गई थी वहीं पिछले चुनाव में मानेसर नगर निगम की मेयर के रूप में निर्दलीय उम्मीदवार इंद्रजीत चुनाव जीतने में सफल हुई थी। उन्होंने भाजपा के अधिकृत उम्मीदवार को चुनाव में पटकनी दी थी। यही कारण है कि लोग पंचकूला नगर निगम के भाजपा के मेयर उम्मीदवार को लेकर बहुत उत्सुक दिखाई दे रहे हैं। उत्सुकता का एक कारण यह भी है कि 2024 के विधानसभा चुनाव में भाजपा को पंचकूला में हर का मुंह देखना पड़ा था। पंचकूला अग्रवाल समाज के लोगों के लिए कई कारणों से खास भी है। अब देखना है कि ऊंट किस करवट बैठता है।
