
बसपा नेता बृजपाल छप्पर।
धर्मपाल वर्मा
दक्ष दर्पण समाचार सेवा dakshdarpan2024@gmail.com
चण्डीगढ़
अंबाला वह लोकसभा क्षेत्र है जहां एक बार 1998 में बहुजन समाज पार्टी ने जीत हासिल करके दिखाई थी। बेशक उस समय बसपा ने यह चुनाव इनेलो के साथ गठबंधन में लड़ा था लेकिन आज भी बसपा इस लोकसभा क्षेत्र में निर्णायक स्थिति में है । इतनी निर्णायक कि मजबूत उम्मीदवार के दम पर वह एक बार फिर जीत के सपने देखने लगी है। इतना जरूर कहा जा सकता है कि जीत की गारंटी बेशक न हो लेकिन बसपा का एक संभावित उम्मीदवार अंबाला कांग्रेस के मौजूदा सांसद को पसीने जरूर छुटा सकता है मतलब उसकी जीत में रोड़ा बन सकता है, उसका नाम है बृजपाल छप्पर।
मिली जानकारी के अनुसार बहुजन समाज पार्टी का थिंक टैंक बृजपाल छप्पर को अंबाला सुरक्षित लोकसभा क्षेत्र से उपयुक्त और मजबूत उम्मीदवार मानता है और इसी दम पर उन्हें चुनाव लड़ने को कहा जा सकता है। छप्पर समर्थक भी इस संभावना से इनकार नहीं करते।पिछले विधानसभा चुनाव में बसपा प्रत्याशी के रूप में चुनाव में उतरे थे और 50000 से भी ज्यादा वोट लेकर भी हार गए थे। उनकी पत्नी पिंकी छप्पर भी इंडियन नेशनल लोकदल की प्रत्याशी के रूप में सढौरा विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ चुकी है। छप्पर दंपति इंडियन नेशनल लोकदल छोड़कर कांग्रेस में शामिल हो गया था परंतु पिछले विधानसभा में चुनाव में टिकट के प्रबल उम्मीदवार होते हुए भी उन्हें कांग्रेस का टिकट नहीं मिल पाया तो बृजपाल बागी हो गए और उन्होंने बहुजन समाज पार्टी प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ा।
बता दे कि लोकसभा के चुनाव के समय बृजपाल छप्पर का परिवार कांग्रेस में था इसलिए उन्होंने पार्टी के उम्मीदवार की इतनी मदद की कि भाजपा उम्मीदवार कांग्रेस की इसी लीड की पूर्ति करने में असफल रही और चुनाव हार गई। देखा जाए तो इस चुनाव में अंबाला के जो विधानसभा क्षेत्रों में सढौरा शुद्ध तौर पर निर्णायक इसलिए था कि इस हलके मे कांग्रेस के पक्ष में लगभग 1 लाख वोट पड़े थी।
बृज पाल छप्पर की दिक्कत यह है कि उन्होंने जिन लोगों से कांग्रेस के पक्ष में मतदान कराया था उन की शिकायत यह है कि कांग्रेस सांसद ने उनकी अपेक्षा के अनुरूप काम नहीं किया विकास कार्यों में अपेक्षित रुचि नहीं ली और सांसद बनने के बाद दूरी बनाकर चल पड़े। शायद बृजपाल छप्पर रोज-रोज के उलाहनों से तंग और क्षुब्ध है यही कारण है उन्होंने अब लोगों को यह कहना शुरू कर दिया है कि वह भी कांग्रेस के पक्ष में एक तरफा मतदान कराने और और उम्मीदवार को जीत दिलाने के लिए जिम्मेदार और दोषी हैं। इन परिस्थितियों का लाभ बसपा के नेता निश्चित तौर पर लेना चाहेंगे।

श्री बृजपाल छप्पर ने दक्ष दर्पण से बातचीत करते हुए कहा कि पार्टी पार्टी का आदेश हुआ तो वह अंबाला से लोकसभा का चुनाव भी लड़ने के लिए तैयार रहेंगे लेकिन इस तरह की महत्वपूर्ण और रणनीतिक फैसले पार्टी हाई कमान को ही लेने होते हैं।
एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि राजनीति संभावनाओं का खेल है बसपा और इंडियन नेशनल लोकदल में पहले ही नहीं पिछले विधानसभा चुनाव में भी गठबंधन हुआ है और यह आने वाले चुनाव में भी इसलिए संभव है कि जनता में इसे व्यवहारिक समझौता माना जाता है ।
अंबाला के मामले में तीन चीज विशेष तौर पर उभर कर आती हैं एक यह है कि भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस के उम्मीदवार की हार जीत का अंतर 49000 ही था और इंडियन नेशनल लोकदल तथा बीएसपी ने अलग-अलग चुनाव लड़ा था । बीएसपी के उम्मीदवार थे पवन रंधावा को 23587 वोट मिले जब कि इंडियन नेशनल लोकदल के उम्मीदवार गुरप्रीत सिंह को। 89 86 वोट पड़े थे। यहां हमें समझ लेना चाहिए कि उसे समय इंडियन नेशनल लोकदल का वह रुतबा नहीं था जो अब है। इन दोनों को जोड़ लिया जाए तो कुल वोटो की संख्या 32 569 होती है। यहां हम अपेक्षाकृत ज्यादा मजबूत उम्मीदवार बृजपाल छप्पर की उम्मीदवारी और उनके अपने गृह विधानसभा क्षेत्र सढौरा की स्थिति का आकलन करें तो एक बात साफ हो जाती है कि अगले चुनाव में बसपा और इनेलो का गठबंधन हुआ और बृजपाल छप्पर उम्मीदवार के रूप में मैदान में आए तो कांग्रेस को जीत के लिए निश्चित तौर पर तरसना पड़ेगा। आप समझ सकते हैं कि 2024 में इसी बृजपाल छप्पर ने बसपा की टिकट पर सढौरा से चुनाव लड़ा तो उन्हें 53000 के वोट मिले थे। यह भी सब जानते हैं कि लोकसभा के चुनाव के समय बृजपाल छप्पर कांग्रेस में थे और उन्होंने कांग्रेस के उम्मीदवार वरुण मुलाना के पक्ष में न केवल जम कर प्रचार किया बल्कि इस हलके में उनके रिकॉर्ड लीड को भी सुनिश्चित करने का काम किया। यहां एक बात बहुत महत्वपूर्ण यह है कि बृजपाल छप्पर अपने विधानसभा क्षेत्र सढौरा से बाहर अंबाला लोकसभा क्षेत्र के कई और हल्को में भी अपनी पहचान और साख के दम पर वोट बटोर सकते हैं। उनके प्रति कई हल्कों में सहानुभूति साफ नजर आती है। अब देखने वाली बात यह है कि 2019 से पहले प्रस्तावित परिसीमन होता है या नहीं, बसपा और इनेलो में गठबंधन होता है या नहीं और बृजपाल छप्पर ही चुनाव में उम्मीदवार होते हैं या नहीं। एक बात जरूर है कि इनेलो और बसपा में गठबंधन हुआ तो अंबाला सीट बसपा के खाते में जाएगी और बसपा के पास बृजपाल छापर से मजबूत दूसरा कोई उम्मीदवार नहीं है।
