
धर्मपाल वर्मा
दक्ष दर्पण समाचार सेवा dakshdarpan2024@gmail.com
नईदिल्ली।
बिहार के विधानसभा चुनाव के बाद हरियाणा में भाजपा में बड़े फैसले लिए जा सकते हैं। भारतीय जनता पार्टी पंजाब के चुनाव को देखते हुए भी हरियाणा में कुछ ना कुछ नया करने की कोशिश कर सकती है। इस समय उसे यह फैसला भी लेना है कि उसका प्रदेश अध्यक्ष मोहनलाल बडोली ही यथावत काम करता रहे या फिर उसे बदला जाए। भारतीय जनता पार्टी अपने राष्ट्रीय अध्यक्ष का फैसला भी नहीं कर पा रही है। ऐसे में मौजूदा अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा को भी एक्सटेंशन दिए जाने की खबरें आ रही है और ऐसा इसलिए हो रहा है कि पार्टी के नेता और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में किसी एक उम्मीदवार के नाम पर सहमत नहीं हो पा रहे हैं। आरएसएस में ब्राह्मण लॉबी की कोशिश जगत प्रकाश मुंडा को ही राष्ट्रीय अध्यक्ष बने रहने के हक में रही तो यह काम आसान भी हो सकता है। आप सब जानते हैं कि आर एस एस की कोशिश के बाद ही हरियाणा में भाजपा और जेजेपी का गठबंधन टूटा था और मुख्यमंत्री भी बदल गया था।
एक बात शीशे की तरह साफ है कि जेपी नड्डा के भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष के रूप में काम करते हुए भाजपा की हरियाणा शाखा के अध्यक्ष का चुनाव हुआ तो निश्चित तौर पर एक बार फिर मोहनलाल बडोली ही अध्यक्ष बनेंगे। मतलब बने रहेंगे।
यह बात आम चर्चा में है कि हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी तो चाहते ही यह हैं कि हरियाणा में सरकार और संगठन में तालमेल बना रहे और मोहनलाल बडौली ही अध्यक्ष के रूप में कार्य करते रहें। अध्यक्ष बनने के बाद उनकी परफॉर्मेंस भी भाजपा के लिए अनुपम रही है। एक तो कारण यह है कि इन दोनों में परस्पर स्वाभाविक तालमेल है दूसरा पार्टी के भी कुछ बड़े नेता इसी बात के पक्ष में है। मुख्यमंत्री श्री सैनी जानते हैं कि बडोली को हटाकर कोई भी नया अध्यक्ष बनेगा तो इस बात की आशंका है कि वह उस ग्रुप का होगा जो उनके पैर उखाड़ने में लगा हुआ है। माना जा रहा है कि ऐसा अध्यक्ष मोहनलाल बडोली की तरह तालमेल बनाकर चलने वाला नहीं बल्कि अलग दरबार लगाकर अपनी चलाने वाला होगा। वह राज्य में नया पावर सैंटर बनकर गतिरोध पैदा करने का काम कर सकता है। इससे भाजपा के संगठन और सरकार में गतिरोध पैदा होने के आसार बढ़ जाएंगे। ऐसा पार्टी के ही कई बड़े नेता भी महसूस कर रहे बताए गए हैं।
सुरेंद्र पूनिया, जेपी दलाल, असीम गोयल, दीपक मंगला संजय भाटिया आदि जिनके नाम अध्यक्ष के रूप में आगे आ रहे हैं, में से कोई भी यदि अध्यक्ष बन गया तो आप समझ सकते हैं कि सरकार और संगठन में किस तरह का तालमेल बन पाएगा !
आपको बता दें कि भारतीय जनता पार्टी हाई कमान में जितने लोग मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के पक्ष में है उतने ही मोहनलाल बडोली की वकालत करते नजर आ रहे हैं।
यह बात भी शीशे की तरह साफ है कि मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी यदि मोहनलाल बडोली को अध्यक्ष बनाए रखने में सफल हो गए तो वह डम्मी मुख्यमंत्री वाले टैग से मुक्त हो जाएंगे।
यह सच्चाई भी है कि भारतीय जनता पार्टी यदि वास्तव में नायब सिंह सैनी को एक तरह से बंसीलाल बनाना चाहती है तो उसे मुख्यमंत्री की इच्छा और अपेक्षाओं को ध्यान में रखते हुए मोहनलाल बडोली को इसी तरह से एक्सटेंशन देनी होगी जैसे चीफ सेक्रेटरी ओर डीजीपी हरियाणा को दी गई थी। बताते हैं कि पार्टी के एक बड़े और राष्ट्रीय नेता इस मुहिम पर ही लगे हुए हैं। भारतीय जनता पार्टी बिहार के चुनाव को लेकर न केवल गंभीर है बल्कि चिंतित भी है। पार्टी ने बिहार में कमजोरी को भांपते हुए हरियाणा के विधायकों की ड्यूटी विशेष तौर पर चुनाव प्रचार में लगाई है।
मोहनलाल बडोली इस समय किसी सदन के सदस्य नहीं है इसलिए पार्टी के लिए समर्पित भाव से काम कर रहे हैं । अपना पूरा वक्त पार्टी और संगठन को दे रहे हैं।मध्य मार्गी विचार के नेता है । पार्टी उन्हें एक बार फिर सोनीपत लोकसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ाने की तैयारी में है। ऐसे में उन्हें अध्यक्ष के रूप में दूसरी बार मौका मिल सकता है।
यदि पार्टी हाई कमान ने मुख्यमंत्री को मजबूत करने की सोच के दृष्टिगत मोहनलाल बडोली को ही मौका दे दिया तो फिर आप यह मानकर चल सकते हैं कि हरियाणा में मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी कई नायाब फैसले लेने की स्थिति में आ जाएंगे और वह अपनी मर्जी के अधिकारियों और खास सहयोगियों को आगे लाने में देर नहीं लगाएंगे। बहुत लोग इस बात का बड़ी बेसब्री से इंतजार भी कर रहे हैं। हरियाणा के ज्यादातर भाजपा विधायक चाहते हैं कि पार्टी हाई कमान हरियाणा में शासन प्रशासन के मामले में आर पार की बात करके चले। जहां तक हरियाणा के जागरूक लोगों का मानना है वह भी यह मानते हैं कि प्रदेश में सत्तारूढ़ दल में और सरकार में तालमेल बिगड़ गया तो यह भाजपा के लिए ठीक नहीं रहेगा इसलिए उसके नेताओं को अब ठोस और कठोर फैसले लेने होंगे। हरियाणा के लोग राजनीतिक तौर पर काफी जागरुक है और वह इस बात को अच्छी तरह से समझ रहे हैं कि प्रदेश अध्यक्ष ही नहीं मुख्यमंत्री को बदलने का प्रचार भी भाजपा की एक खास लॉबी के लोग ही कर रहे हैं।
पार्टी के नेता यह भी जान लें कि प्रदेश में जहां दलित समुदाय भारतीय जनता पार्टी के खिलाफ नजर आने लगा है, आगे भी चूक हुई तो पिछड़े वर्ग के लोग भी कहीं और शिफ्ट होने में देर लगाने वाले नहीं हैं !
