
धर्मपाल वर्मा
दक्ष दर्पण समाचार सेवा
कालका।
हरियाणा में पिछले दिनों स्थानीय स्वशासन के चुनाव में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी को तीन नगर निगमों ,कुछ नगरपालिकाओं और एक नगर परिषद चुनाव में अपनी ताकत दिखाने का अवसर मिला और अधिकांश जगह उसे विजय श्री प्राप्त हुई।
अब जब 2027 की आरंभ में हरियाणा के पड़ोस में पंजाब और हिमाचल प्रदेश में विधानसभा के चुनाव हो रहे होंगे उन्हीं दिनों में इन दो प्रदेशों की सीमा से लगे गेटवे ऑफ हरियाणा मतलब कालका में नगर परिषद के चुनाव भी हो रहे होंगे।
पिछले चुनाव के बाद यहां अब एक बड़ा बदलाव यह हो चुका है कि अब लतिका शर्मा नहीं शक्तिरानी शर्मा कालका की भाजपा की विधायक हैं और यहां लोगों को एक के बदले एक प्रतिनिधि मुफ्त में मिल गया है। मतलब एक साथ दो प्रतिनिधि काम कर रहे हैं। मतलब यह है कि लोगों ने वोट एक उम्मीदवार मतलब शक्ति रानी शर्मा को दिया लेकिन उनके लिए काम शक्ति रानी ही नहीं उनके सांसद पुत्र कार्तिकेय शर्मा भी कर रहे हैं ।आने वाले समय में शायद शक्ति रानी के स्थान पर कार्तिकेय ही विधानसभा का चुनाव लड़ें इसलिए यहां जो भी काम होता है उसमें दोनों मां बेटे परस्पर तालमेल बनाकर ही करते हैं । इन दोनों का दखल केवल कालका में ही नहीं बल्कि पूरे पंचकूला में देखने को मिल रहा है।
विकास और निर्माण कार्यों में उनकी रुचि और प्रगति जग जाहिर है। विनोद शर्मा का परिवार न केवल व्यावसायिक तौर पर पेशेवर है बल्कि परिवार के लोग राजनीति भी इसी तरीके से करते हैं ।अंबाला शहर में मंत्री के रूप में जो रुतबा विनोद शर्मा का था वैसा ही अब इस परिवार का कालका में देखने को मिल रहा है। आपको बता दे कि अर्चना गुप्ता के भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष बनने के बाद कई कारणों से विनोद शर्मा के परिवार का पक्ष और मजबूत होने वाला है ।संगठन में उनके हस्तक्षेप का जल्दी ही नजारा देखने को भी मिल सकता है।
कालका नगर परिषद के चुनाव में 1 वर्ष से भी कम का समय शेष है लेकिन तैयारी अभी से शुरू हो गई है ।कालका पिंजौर में जिस तरह से विकास कार्य हो रहे हैं उसके पीछे भी एक कारण यह है कि शक्ति रानी शर्मा इस मामले में लेश मात्रा भी लापरवाह नहीं है।
कार्तिकेय शर्मा इस बात को लेकर संतुष्ट होंगे कि उन्होंने पंचकूला नगर परिषद निगम के चुनाव के समय दो पार्षद उम्मीदवारों के नाम की संस्तुति की ,दोनों को टिकट मिला और दोनों चुनाव भी जीत गए। जीत नेता को ही नहीं उसके कार्यकर्ताओं को भी उत्साह और ऊर्जा प्रदान करती है । यही कारण है कि अब विधायक शक्ति रानी शर्मा उनके पुत्र राज्यसभा सांसद कार्तिकेय शर्मा ने कालका नगर परिषद के 2027 में होने वाले चुनाव को लेकर अभी से अपनी तैयारियां शुरू कर दी हैं । जहां सभी वार्डों के संभावित उम्मीदवारों के नामों पर मंथन हो रहा है वहीं चेयरमैन पद के लिए भी किसी उपयुक्त उम्मीदवार की तलाश की जा रही है ।राजनीति में बहुत काम बिना बताए परंतु सोच समझकर किए जाते हैं। कालका की राजनीति में रुचि रखने वाले सभी लोग आमतौर पर यह मानकर चल रहे हैं कि आगामी चुनाव में कालका नगर परिषद के मौजूदा चेयरमैन कृष्ण लाल लांबा के नाम पर विचार होने के आसार बहुत कम है। बेशक वह भाजपा के चुनाव चिन्ह पर जीते परंतु उनकी उम्मीदवारी के पीछे जो लोग थे, उनका अब असर और हस्तक्षेप लगभग शून्य हो गया है। श्री लांबा बेशक विरोध और विवाद आदि से बचे रहे हैं लेकिन उन्हें एक शार्प, कामयाब और विजनरी चेयरमैन के रूप में पहचान नहीं मिली है। राजनीतिक विश्लेषक यह मानकर चल रहे हैं कि भाजपा को कालका में नगर परिषद के नए चेयरमैन उम्मीदवार की तलाश है। विनोद शर्मा का परिवार इस मामले में ऐसा उम्मीदवार सामने लेकर आ सकता है कि प्रतिद्वंदी कांग्रेस को चुनाव शुरू होने से पहले ही पसीने छूटने लगें। कांग्रेस के लिए कालका का यह चुनाव पंचकूला से भी ज्यादा घातक शर्मनाक और निराशाजनक हो सकता है यह हम नहीं कह रहे बल्कि कालका क्षेत्र से ही आवाज आ रही है। जानकार एक बात का दावा कर रहे हैं कि पिछले चुनाव में कांग्रेस की टिकट के चेयरमैन पद के प्रबल दावेदार नवदीप शर्मा उर्फ नबी असल तो फिर से चुनाव लड़ने के मूड में नहीं है, उन्हें टिकट मिलने के आसार भी नहीं लग रहे हैं। टिकट न मिलने से नाराज और निराश होकर नबी ने पिछला चुनाव निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में लड़ा था कालका के पूर्व विधायक प्रदीप चौधरी कालका विधानसभा क्षेत्र के चुनाव में हार के बाद चमक को चुके हैं परंतु वह नबी का विरोध शायद ही छोड़े। बेशक चुनाव 1 साल बाद है लेकिन भाजपा ने अभी से यहां चुनाव के पक्ष में माहौल बनाना शुरू कर दिया है और इससे भाजपा को निश्चित तौर पर लाभ होने के आसार नजर आ रहे हैं । चुनाव को लेकर आम आदमी पार्टी में भी कुछ हलचल नजर आ रही है।

