
कपाल मोचन/व्यासपुर — नन्द सिंगला
हरियाणा के पवित्र तीर्थस्थल कपाल मोचन में आयोजित वार्षिक मेला इस वर्ष भी श्रद्धा, भक्ति और उत्साह के वातावरण में हुआ। यह मेला न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि हरियाणा की सांस्कृतिक और सामाजिक एकता का जीवंत प्रतीक भी है। इस मेले में देशभर से हजारों श्रद्धालु, साधु-संत, महिला, पुरुष और बच्चे बड़ी श्रद्धा के साथ पहुंचे और पवित्र सरोवरों में स्नान कर पुण्य लाभ प्राप्त किया।
मेले के प्रथम दिन से ही तीर्थ क्षेत्र में आस्था का सागर उमड़ पड़ा। श्रद्धालुओं ने सर्वप्रथम गऊ-बच्छा घाट, ऋणमोचन सरोवर और सूरजकुंड सरोवर में डुबकी लगाकर भगवान से अपने परिवार, समाज और देश की समृद्धि की कामना की। कहा जाता है कि यहां स्नान करने से पापों का नाश होता है और जीवन में नई ऊर्जा का संचार होता है।
स्नान के उपरांत श्रद्धालुओं ने मंदिरों में दर्शन किए, प्रसाद ग्रहण किया और पूजा-अर्चना कर अपनी आस्था व्यक्त की। पूरे मेला परिसर में धार्मिक भजन, कीर्तन और प्रवचनों की गूंज से वातावरण भक्तिमय बना रहा। मेले में लगे विविध झूले, सांस्कृतिक झांकियां और लोकनृत्य कार्यक्रमों ने लोगों का मनोरंजन भी किया।
हरियाणा सरकार, स्थानीय प्रशासन और पुलिस विभाग की ओर से मेले में किए गए उत्कृष्ट प्रबंधों की सभी ने सराहना की। सुरक्षा व्यवस्था कड़ी और सुव्यवस्थित रही। हरियाणा पुलिस, एनडीआरएफ, स्वास्थ्य विभाग, और स्वच्छता कर्मियों ने मिलकर मेले को सफल बनाने में अहम भूमिका निभाई। प्रशासन द्वारा पर्याप्त जल व्यवस्था, चिकित्सा शिविर, ट्रैफिक नियंत्रण, पार्किंग स्थल और लाइटिंग की विशेष व्यवस्था की गई थी।
स्वच्छता के दृष्टिकोण से भी कपाल मोचन मेला इस बार अनुकरणीय रहा। पूरे क्षेत्र में सफाई अभियान निरंतर चलता रहा और श्रद्धालुओं को स्वच्छ वातावरण में पूजा-अर्चना का अवसर मिला। हरियाणा सरकार के “स्वच्छ हरियाणा – स्वस्थ हरियाणा” अभियान की भावना इस मेले में स्पष्ट रूप से दिखाई दी।
कपाल मोचन मेला केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि समाज में एकता, प्रेम और सद्भावना का संदेश देने वाला अवसर है। यहां सभी धर्मों, वर्गों और क्षेत्रों से आए लोग एक साथ मिलकर श्रद्धा का उत्सव मनाते हैं, जो हरियाणा की गंगा-जमुनी संस्कृति की झलक प्रस्तुत करता है।
इस अवसर पर श्रद्धालुओं ने कहा कि ऐसी पवित्र यात्राएं न केवल मन को शांति और आत्मिक बल प्रदान करती हैं, बल्कि सामाजिक एकता को भी सुदृढ़ करती हैं। कपाल मोचन जैसे तीर्थ स्थलों पर आकर मनुष्य स्वयं को ईश्वर के निकट महसूस करता है और जीवन के वास्तविक उद्देश्य को समझने की प्रेरणा प्राप्त करता है।
सभी श्रद्धालु मेले की पवित्रता और प्रशासन की सराहना करते हुए इस संकल्प के साथ लौटे कि आने वाले वर्षों में भी वे इस पुण्य पर्व में भाग लेकर अपनी आस्था को नमन करेंगे और समाज में प्रेम, शांति तथा सद्भावना का संदेश फैलाते रहेंगे।
