
दक्ष दर्पण समाचार सेवा
गोहाना, 2 नवंबर। गुरु भाई सतनाम सिंह जोधका ने कहा कि समागम केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं बल्कि आत्मिक जागृति और जीवन के सच्चे उद्देश्य को पहचानने का अवसर है। संत समागम का मुख्य उद्देश्य हर मानव तक ईश्वर ज्ञान यानी ब्रह्मज्ञान का संदेश पहुंचाना है, ताकि हर व्यक्ति अपने मन से अज्ञान का अंधकार मिटाकर आत्मिक शांति और पवित्रता का अनुभव कर सके। कार्यक्रम में कैबिनेट मंत्री डॉ अरविंद शर्मा ने शिरकत की और गुरुओं का आर्शीवाद लिया। आसन कलां गद्दीशीन भाई सतनाम सिंह जोधका शनिवार को देर रात गुरु नानक धर्मशाला में आयोजित रैन सभाई कीर्तन समागम में प्रवचन रहे थे। इस दौरान उन्होंने कहा कि प्रेम, नम्रता, भक्ति और एकता का वातावरण इस समागम को दिव्य बनाता है। संतों और भक्तों की संगति, सत्संग के संदेश, कविताएँ, भजन, प्रवचन और गुरु चर्चा से पूरे परिसर में एक अनोखी भक्ति-भावना फैल जाती है। उन्होंने कहा कि आत्ममंथन के माध्यम से यह संदेश है कि ईश्वर को पाने के लिए पहले स्वयं को समझना आवश्यक है। अपने भीतर झाँककर यह देखना कि क्या हम आलोचना, ईर्ष्या, और द्वेष से मुक्त हैं या नहीं। गुरुओं की शिक्षाएं हमें यही सिखाती हैं कि अपने मन को नकारात्मकता से मुक्त करके प्रेम और सेवा के भाव में जियें। समागम में पहुंचे कैबिनेट मंत्री डॉ अरविंद शर्मा ने कहा कि गुरुओं व साधू संतों ने ही हमेशा से ही समाज के कल्यान के लिए संदेश दिया है और समाज को सही रास्ता दिखाने का काम किया है।

उन्होंने कहा कि सच्ची भक्ति केवल शब्दों से नहीं, बल्कि कर्मों से होती है। जब हम हर कार्य में ईश्वर को शामिल करते हैं, सेवा, ध्यान और सत्संग को प्राथमिकता देते हैं, तभी मन की वास्तविक शांति प्राप्त होती है।

ब्रह्मज्ञानी व्यक्ति संसार में रहते हुए भी माया से ऊपर होता है, वह हर स्थिति में निरंकार की इच्छा को स्वीकार करता है और जीवन को कृतज्ञता के भाव से जीता है। सच्चा भक्त वही है जो दुःख-सुख में सम रहता है, शिकायत नहीं करता और हर परिस्थिति में ईश्वर की कृपा को पहचानता है।

कैबिनेट मंत्री डॉ अरविंद शर्मा ने गुरु नानक धर्मशाल के निर्माण के लिए 11 लाख रुपये देने की भी घोषणा की। इस अवसर पर सभा प्रधान सुरेश मक्कड़, सोनू मक्कडद्व, रवि सिंधवानी, मनोज बजाज, दिक्षांत, सुरेश अरोड़ा, पारस वधवा, साहिल वधवा आदि उपस्थित रहे।
