
दक्ष दर्पण समाचार सेवा
चण्डीगढ़।
कल्पकथा साहित्य संस्था द्वारा आयोजित 203वीं साप्ताहिक ऑनलाइन काव्य संध्या, बाल साहित्य की निश्छल नटखटता और समसामयिक बौद्धिकता का अलौकिक संगम बनकर प्रकट हुई। यह आयोजन विख्यात हास्य कवि पद्मश्री डॉ. सुरेंद्र दुबे को समर्पित भावपूर्ण श्रद्धांजलि स्वरूप सम्पन्न हुआ, जिसमें देश-विदेश के अनेक विद्वान साहित्य साधकों ने बालमन की मासूम भावभंगिमा को शब्दों के स्वरूप में पिरोया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता देहरादून (उत्तराखण्ड) से वरिष्ठ साहित्यकार श्री नंदकिशोर बहुखंडी जी ने की, जबकि मुख्य अतिथि सीवान (बिहार) से जुड़े श्री बिनोद कुमार पाण्डेय जी रहे। संचालन का दायित्व आशुकवि श्री भास्कर सिंह “माणिक” (कोंच, जालौन, उ.प्र.) तथा कल्पकथा परिवार के सक्रिय स्तंभ श्री पवनेश मिश्रा जी ने समवेत रूप से निभाया।
गुजरात की धरती से साहित्य की वाणी स्वरूप दीदी श्रीमती राधा श्री शर्मा जी ने गुरुवंदना, गणेश वंदना एवं सरस्वती वंदना के साथ शुभारंभ कर संध्या को आध्यात्मिक आभा से आलोकित कर दिया।
श्रीमती ज्योति राघव सिंह (संवाद प्रभारी, कल्पकथा साहित्य संस्था) ने बताया कि – यह काव्य संध्या “बालपन की सीख और प्रसन्नता को बनाए रखना ही सच्चा आनंद है” – इस मूल भावना को आत्मसात करते हुए सद साहित्य, हिन्दी भाषा, देशप्रेम और सनातन संस्कृति के नवोन्मेषी स्वरूप को मंच पर उतारने का माध्यम बनी।
देश-विदेश से जुड़े प्रमुख सहभागी रचनाकारों में सम्मिलित रहे –
- श्रीमती किरण अग्रवाल – प्रतापगढ़ (उ.प्र.)
- श्री बिनोद कुमार पाण्डेय – सीवान (बिहार)
- श्री सुनील कुमार खुराना – सहारनपुर (उ.प्र.)
- श्रीमती रजनी कटारे “हेम” – जबलपुर (म.प्र.)
- श्री अवधेश प्रसाद मिश्र “मधुप” – वाराणसी (उ.प्र.)
- श्री सत्यम सिन्हा – रस अल खैमाह (यू.ए.ई.)
- श्रीमती ज्योति प्यासी – जबलपुर (म.प्र.)
- श्री भास्कर सिंह “माणिक” – कोंच, जालौन (उ.प्र.)
- डॉ. जया शर्मा “प्रियंवदा” – फरीदाबाद (हरियाणा)
- श्रीमती अलका शर्मा – जम्मू (जम्मू-कश्मीर)
- श्रीमती शशिप्रभा देशवाल – पलवल (हरियाणा)
- श्री नंदकिशोर बहुखंडी – देहरादून (उत्तराखण्ड)
- श्री विष्णु शंकर मीणा – पीपल्दा, कोटा (राजस्थान)
- श्री प्रमोद पटले – रायपुर (छत्तीसगढ़)
- श्रीमती ज्योति राघव सिंह – चोगलमसर, लेह (लद्दाख)
- श्री रमेश चंद्रा गौतम – शामली (उ.प्र.)
- श्रीमती ज्योति देशमुख – बड़ोदरा (गुजरात)
- श्री सत्यम तिवारी “बनारसी” – वाराणसी (उ.प्र.)
- श्रीमती राधा श्री शर्मा – अहमदाबाद (गुजरात)
- श्री पवनेश मिश्रा – (छतरपुर म.प्र.) साहित्यिक विविधता और समसामयिक सघनता से युक्त रचनाओं में कभी बालक के नेत्रों से बहती स्वप्निल नदी दिखी, तो कहीं बालमन की कल्पना में उड़ते तितलियों के रंग बिखरे गीत, बाल कविता, सामाजिक चिंतन, सांस्कृतिक विवेचन और मानवीय चेतना के स्वर पूरे आयोजन में गुंजायमान रहे। अध्यक्षीय उद्बोधन में श्री बहुखंडी जी ने आयोजन को बहुआयामी, जनोपयोगी एवं वैचारिक समृद्धता का ध्वजवाहक बताया, वहीं मुख्य अतिथि श्री पाण्डेय जी ने सभी रचनाकारों को “बाल सुलभ आनंद की पुनर्रचना” हेतु साधुवाद देते हुए इसे साहित्य की भावभूमि पर रचा गया अनुपम प्रयास कहा। समापन पर श्री अवधेश प्रसाद मिश्र “मधुप” जी ने “सर्वे भवन्तु सुखिनः” शांति मंत्र के साथ सभी प्रतिभागियों, आयोजकों एवं श्रोताओं के प्रति हार्दिक आभार व्यक्त किया। इस काव्य संध्या ने यह प्रमाणित किया कि—
“जब साहित्य बालपन की निर्मल दृष्टि और हृदय की उदात्त भावना से लिखा जाता है, तब वह केवल मनोरंजन नहीं, भावजागरण का माध्यम बन जाता है।” कल्पकथा साहित्य संस्था के इस आयोजन ने यह सुनिश्चित किया कि साहित्य की यात्रा केवल शब्दों तक सीमित न रहे, वह पीढ़ियों को संस्कार, सोच और सृजन की सौगात दे।
