
धर्मपाल वर्मा
दक्ष दर्पण समाचार सेवा
पंचकूला।
हरियाणा की अघोषित राजधानी पंचकूला के लोगों ने जहां कुछ दिन पहले लोकसभा और विधानसभा के चुनाव की गहमागहमी में हिस्सा लिया था वहीं उन्हें इसी वर्ष एक बार फिर चुनाव में अपनी पसंद के उम्मीदवारों को चुनने का मौका मिलने वाला है ।
पंचकूला में इसी वर्ष दिसंबर तक नगर निगम के चुनाव हो सकते हैं । क्योंकि मौजूदा निगम का कार्यकाल दिसंबर में समाप्त होने जा रहा है। इस चुनाव को लेकर लोगों में यह जिज्ञासा अभी से बनी हुई है कि भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार के रूप में चुनाव जीते मौजूदा मेयर कुलभूषण गोयल को पार्टी एक बार फिर मौका देगी या किसी नए उम्मीदवार को मैदान में उतरेगी। उधर प्रतिद्वंदी के रूप में कांग्रेस की उम्मीदवार पंचकूला नगर निगम की प्रथम मेयर उपेंद्र कौर आहलूवालिया भी उम्मीदवार होंगी या नहीं। कहने का मतलब यह है कि इस बार भी पिछले चुनाव की तरह कुल भूषण गोयल और उपेंद्र कौर अहलूवालिया में ही मुकाबला होगा या उम्मीदवार बदलेंगे।
कुलभूषण गोयल और उनके समर्थकों को यह यकीन जरूर होगा कि जिस तरह करनाल में एक ही उम्मीदवार को लगातार तीन बार मौका दिया गया है तो यह अवसर उन्हें भी मिल सकता है लेकिन भारतीय जनता पार्टी की नीतियों और निर्णय को लेकर कोई भविष्यवाणी करना सही नहीं होता। पार्टी के लोग कई बार अप्रत्याशित फैसले ले लेते हैं। ऐसा ही पंचकूला में भी हो सकता है।
जहां तक कांग्रेस का सवाल है, यह आम मान्यता है कि पूर्व मेयर श्रीमती उपेंद्र कौर आहलूवालिया बहुत मजबूत उम्मीदवार हैं। लेकिन कांग्रेस में जो गुटबाजी है और विधायक को लेकर लोगों में जो आम राय है उसे देखते हुए कुछ लोग नए उम्मीदवार के मैदान में आने की अपेक्षा किए हुए हैं। उनका यह मानना है कि विधायक किसी और उम्मीदवार के लिए कोशिश कर सकते हैं। उनका उम्मीदवार कौन होगा यह वक्त बताएगा लेकिन वक्त यह भी बताएगा कि उस समय पंचकूला में पार्टी में मुख्य सूत्रधार कौन होगा और उम्मीदवार को तय करने का कौन सा फार्मूला प्रयुक्त किया जाएगा।
यदि समय पर चुनाव हुआ तो आज ही यह बात साफ नजर आ रही है कि चुनाव बहुत रोचक होगा और कांग्रेस अपनी पिछली गलतियों, चुनाव में हुए षडयंत्रों से सबक जरूर लेगी। यह भी देखना होगा कि उस समय कांग्रेस का जिला अध्यक्ष कौन होगा।
श्रीमती अहलूवालिया के बारे में एक बात जरूर कहनी पड़ेगी कि उन्होंने पिछले विधानसभा चुनाव में पंचकूला विधानसभा क्षेत्र से टिकट के लिए आवेदन किया था। उन्हें टिकट मिला नहीं कुछ लोग यह मानकर चल रहे थे कि वे निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव में उतर सकती हैं लेकिन परिवार ने और समर्थकों ने उस समय धैर्य का परिचय दिया और चुनाव नहीं लड़ने का फैसला लिया । ऐसे में अब उनका मेयर के लिए टिकट का दावा और मजबूत हो गया है।
नगर निगम के पिछले चुनाव में हरियाणा में कांग्रेस भाजपा को बहुत मजबूत चुनौती नहीं दे पाई लेकिन परिस्थितियां यह संकेत दे रही है कि पंचकुला नगर निगम का चुनाव बहुत ही रोचक होने जा रहा है। क्योंकि देश में ही नहीं प्रदेश में भी कई चीजें तेजी से बदल रही हैं।
