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दक्ष दर्पण समाचार सेवा dakshdarpan2022@gmail.com
बरसात के मौजूदा सीजन में भूस्खलन और कई नालो के पुल बह जाने के कारण पंचकूला जिले के कालका पिंजौर क्षेत्र के लोगों को आवागमन की दुष्कर स्थितियों से दो-चार होना पड़ रहा है ।संबंधित विभाग एक महीना बीत जाने के बाद भी नालागढ़ पिंजौर मुख्य मार्ग पर वैकल्पिक पुल बनाने और आवागमन को सुचारू बनाने का काम पूरा नहीं कर पाया है ।इस अव्यवस्था को लेकर कर लोगों में भारी नाराजगी देखी जा रही है। लोग कहते हैं कि विकास कार्यों का ढिंढोरा पीटने वाली सरकार नागरिकों के लिए रास्ते भी नहीं बना पा रही तो यह उसके लिए डूब मरने की बात है। इस क्षेत्र में लोग मुख्य मार्गों के अलावा कुछ छोटे-छोटे नदी नालों को भी पैदल ही पार करने को मजबूर हैं ।
10 जुलाई के आसपास भारी वर्षा के बाद नालागढ़ रोड पर किरतपुर गांव के पास और आगे इसी मार्ग पर हिमाचल प्रदेश की सीमा के पास दो नालों के पुल गिर जाने के बाद कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं हुई है और यहां आवागमन पूरी तरह से ठप्प पड़ा है। स्थानीय नागरिकों और इस क्षेत्र में आने जाने को मजबूर लोगों को टूटे पुल वाले जोखिम भरे रास्तों पर पैदल जाना पड़ रहा है नाला पार करते समय हर व्यक्ति को यह डर भी सताता रहता है कि कहीं पीछे से ज्यादा पानी न आ जाए और वह पानी के वेग में बह ना जाए। यहां विकट स्थिति तो उन महिला अध्यापकों की है जो इस क्षेत्र में स्कूलों में पढ़ाने जा रही हैं। उनके लिए इसी रास्ते से पैदल चलकर स्कूल जाना एक मजबूरी बन गई है।
नागरिकों के लिए रास्ते बनाना ऐसा काम है जो सरकार प्रशासन और विभाग ही कर सकता है परंतु बड़े शर्म की बात यह है कि पुल बनाना तो दूर अभी पाइप आदि डालकर ऐसी व्यवस्था भी नहीं की गई है कि कम से कम जरूरतमंद और आने जाने वाले लोग दोपहिया वाहनों से आने जाने लग जाए। मार्ग अवरुद्ध हो जाने से जहां लोगों का दैनिक जीवन प्रभावित हो रहा है वहीं व्यावसायिक गतिविधियों भी ठप्प होकर रह गई हैं। हिमाचल प्रदेश का बद्दी औद्योगिक क्षेत्र और कई बड़े शैक्षणिक संस्थान इस रोड पर आजू बाजू स्थित है । हिमाचल प्रदेश में अपने गंतव्य और कालका पिंजौर क्षेत्र के गांवों में जाने के लिए लोगों को बहुत दूर के वैकल्पिक रास्तो का सहारा लेना पड़ रहा है। 2 किलोमीटर जाने के लिए 20 किलोमीटर लंबा रास्ता तय करना कितना अव्यवहारिक है इसे आसानी से समझा जा सकता है। लोग कहते हैं कि 1 महीने से ऐसे लग रहा है कि इस समस्या को लेकर सरकार के कान पर जूं तक नहीं रेंग रही है।
इस बारे में पड़ताल के बाद पता चला कि यहां पुल बनाने का काम राष्ट्रीय राजमार्ग अधिकरण को करना है और यहां पुल बनाने का काम शुरू कर दिया गया है जिसमें समय लगेगा। अधिकरण ने मढा वाला में पुल बनाकर चालू कर दिया है जल्दी ही किरतपुर वाला पल भी तैयार हो जाएगा इसलिए पुल बनने तक हालातो से समझौता करना सब की विवशता है।
