
दक्ष दर्पण
चंडीगढ़, 30 सितंबर 2026।
ऑल इंडिया अम्बेडकर महासभा (रजि.) चंडीगढ़ प्रदेश के अध्यक्ष राजबीर सिंह भारतीय ने चंडीगढ़ प्रशासन से अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) एवं अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) से संबंधित नागरिकों, बच्चों और युवाओं के जाति प्रमाण-पत्र जारी करने की प्रक्रिया को और अधिक सरल, पारदर्शी, समयबद्ध एवं जनहितैषी बनाने की मांग की है।
राजबीर सिंह भारतीय ने कहा कि जाति प्रमाण-पत्र महज एक कागज नहीं, बल्कि हजारों जरूरतमंद बच्चों और युवाओं के शिक्षा, छात्रवृत्ति, प्रतियोगी परीक्षाओं, सरकारी नौकरियों, आरक्षण तथा विभिन्न सरकारी योजनाओं का लाभ प्राप्त करने से जुड़ा महत्वपूर्ण दस्तावेज है। प्रमाण-पत्र जारी करने में अनावश्यक देरी किसी पात्र व्यक्ति के अवसर को प्रभावित कर सकती है।
उन्होंने कहा कि चंडीगढ़ प्रशासन के स्तर पर SC/OBC प्रमाण-पत्रों के लिए सत्यापन तथा निर्धारित समय-सीमा की व्यवस्था पहले से मौजूद है। Migration मामलों में मूल राज्य से genuineness/verification रिपोर्ट लेने का प्रावधान भी है। अब आवश्यकता इस बात की है कि इस व्यवस्था को व्यवहार में इतना सरल और प्रभावी बनाया जाए कि सत्यापन के नाम पर पात्र आवेदक को अनावश्यक रूप से महीनों तक परेशान न होना पड़े।
“जब सत्यापन की व्यवस्था है, तो पात्र लोगों को बार-बार कार्यालयों के चक्कर क्यों?”
राजबीर सिंह भारतीय ने कहा कि प्रशासन को ऐसी व्यवस्था पर विचार करना चाहिए जिसमें आवेदक द्वारा प्रस्तुत पुराने सरकारी रिकॉर्ड, पारिवारिक दस्तावेजों तथा अन्य उपलब्ध प्रमाणों की जांच के साथ-साथ नम्बरदार, संबंधित पार्षद, निर्वाचित जनप्रतिनिधि, पटवारी, तहसीलदार अथवा सक्षम/राजपत्रित अधिकारी की सत्यापन रिपोर्ट को नियमानुसार सहायक प्रमाण के रूप में स्वीकार करने की स्पष्ट व्यवस्था हो।
उन्होंने कहा कि अंतिम प्रमाण-पत्र सक्षम अधिकारी द्वारा सरकारी रिकॉर्ड और लागू नियमों के अनुसार ही जारी किया जाए, लेकिन सत्यापन की प्रक्रिया में अनावश्यक जटिलता और दोहराव को समाप्त किया जाना चाहिए।
कानूनी पेचीदगी है तो जनहित में नियम बदलना भी प्रशासन की जिम्मेदारी:
राजबीर सिंह भारतीय ने कहा कि यदि चंडीगढ़ प्रशासन के मौजूदा नियमों या कानूनी प्रावधानों में किसी कारण से पात्र नागरिकों के प्रमाण-पत्र जारी करने में व्यावहारिक कठिनाई अथवा कानूनी पेचीदगी सामने आ रही है, तो उस समस्या का समाधान निकालना भी प्रशासन की जिम्मेदारी है।
उन्होंने कहा कि आवश्यकता पड़ने पर प्रशासनिक नियमों, अधिसूचनाओं अथवा सक्षम स्तर पर आवश्यक कानूनी प्रावधानों में संशोधन का प्रस्ताव तैयार किया जाना चाहिए और जहां मामला संसद अथवा केंद्र सरकार के स्तर से जुड़ा हो, वहां उचित माध्यम से संशोधन की पहल की जानी चाहिए।
“बाबासाहेब डॉ. भीमराव अम्बेडकर ने संविधान के माध्यम से समानता, न्याय और अधिकारों की मजबूत नींव रखी। समय और आवश्यकता के अनुसार कानूनों और नियमों में संशोधन होते रहे हैं। इसलिए यदि किसी मौजूदा व्यवस्था में जनहित की कमी है तो उसे सुधारने के लिए इच्छाशक्ति के साथ पहल करना जरूरी है।”
फर्जी प्रमाण-पत्र रोकें, लेकिन वास्तविक पात्र व्यक्ति परेशान न हो:
उन्होंने कहा कि फर्जी जाति प्रमाण-पत्रों को रोकने के लिए कड़ी और निष्पक्ष जांच आवश्यक है, लेकिन जांच की प्रक्रिया ऐसी नहीं होनी चाहिए कि वास्तविक और पात्र नागरिक ही प्रमाण-पत्र प्राप्त करने के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटता रहे।
प्रशासन को “सत्यापन भी—सुविधा भी” के सिद्धांत पर व्यवस्था विकसित करनी चाहिए।-
उन्होंने मांग की कि—
आवेदन प्रक्रिया को अधिक सरल और नागरिक-अनुकूल बनाया जाए।
ऑनलाइन एवं ऑफलाइन दोनों माध्यमों से आवेदन की सुविधा प्रभावी रूप से उपलब्ध हो।
दस्तावेजों में कमी होने पर आवेदक को स्पष्ट रूप से बताया जाए कि कौन-सा दस्तावेज आवश्यक है।
एक ही दस्तावेज या सत्यापन बार-बार मांगने की व्यवस्था समाप्त की जाए।
Migration मामलों में मूल राज्य से verification को समयबद्ध और ट्रैक करने योग्य बनाया जाए।
निर्धारित समय में verification रिपोर्ट न आने पर संबंधित विभाग द्वारा स्वतः reminder और follow-up किया जाए।
पात्र आवेदक को केवल तकनीकी अथवा प्रक्रियात्मक कारणों से अनावश्यक रूप से परेशान न किया जाए।
आवेदन अस्वीकार होने की स्थिति में लिखित कारण और अपील की स्पष्ट जानकारी दी जाए।
कॉलेज दाखिले, छात्रवृत्ति, प्रतियोगी परीक्षा एवं सरकारी नौकरी जैसी समय-सीमा वाली आवश्यकताओं वाले विद्यार्थियों और युवाओं के मामलों को प्राथमिकता दी जाए।
“प्रमाण-पत्र की देरी से किसी बच्चे और युवा का भविष्य प्रभावित नहीं होना चाहिए”
राजबीर सिंह भारतीय ने कहा कि चंडीगढ़ एक ऐसा केंद्र शासित प्रदेश है जहां बड़ी संख्या में परिवारों की सामाजिक एवं प्रशासनिक पृष्ठभूमि पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश और देश के अन्य राज्यों से जुड़ी हुई है। ऐसे परिवारों के बच्चों और नई पीढ़ी को कई बार पुराने रिकॉर्ड एवं मूल राज्य से सत्यापन की प्रक्रिया में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।
उन्होंने कहा कि प्रशासन को ऐसी व्यवस्था बनानी चाहिए जिसमें दस्तावेजों की वास्तविकता की जांच भी हो और पात्र नागरिक को समय पर प्रमाण-पत्र भी मिले।
उन्होंने चंडीगढ़ के प्रशासक, सलाहकार, संबंधित प्रशासनिक विभागों तथा SDM अधिकारियों से आग्रह किया कि SC, ST एवं OBC प्रमाण-पत्रों से जुड़ी व्यावहारिक कठिनाइयों की समीक्षा कर सरल, पारदर्शी, जवाबदेह और समयबद्ध व्यवस्था लागू की जाए।
राजबीर सिंह भारतीय ने कहा—
“जनता-जनार्दन को अपने अधिकार का प्रमाण लेने के लिए बार-बार सरकारी दफ्तरों के धक्के नहीं खाने चाहिए। यदि किसी व्यवस्था में कमी है तो उसे बदलना शासन-प्रशासन की जिम्मेदारी है। जनहित में नियमों को सरल बनाना ही सुशासन की पहचान है।”
उन्होंने कहा कि पात्र बच्चों, युवाओं और नागरिकों को केवल प्रमाण-पत्र की प्रक्रिया के कारण उनके संवैधानिक एवं सरकारी अधिकारों से वंचित नहीं होना चाहिए।
