दक्ष दर्पण समाचार सेवा
चण्डीगढ़।
कांग्रेस के नेता और सांसद रणदीप सिंह सुरजेवाला जहां विचारशील, प्रगतिशील और मध्य मार्ग जैसी कार्य शैली के नेता और कानून के विशेषज्ञ के रूप में जाने जाते हैं वहीं वह राजनीति में पत्रकारिता करते भी देखे जाते हैं। यह देखा गया है कि उन्हें जब भी मौका मिलता है वह सरकार की बखिया उधेड़ते हुए ऐसे बयान दे जाते हैं कि सरकार को उसके जवाब देने में भी पसीने छूटने लग जाते हैं। उन्होंने अपने ताजा बयान में कहा है कि
बड़ी बड़ी डिग्रियां महज़ कागज़ का टुकड़ा बनकर रह गई हैं, सारी मेहनत बेकार जा रही है और भर्ती के इंतजार में “ओवरएज” हो रहे युवाओं के सामने अब गुजारे का संकट है !
एमए, बीएड, सीटेट, एचटेट, नेट और पीएचडी तक पास कर चुके युवा नौकरी के इंतजार में ओवरएज होकर चाय का ठेला लगाने, स्वीपर और चपरासी का काम करने, दिहाड़ी मजदूरी करने और दुकानों में नींबू-मिर्ची टांग कर गुजारे को मज़बूर हैं !
मगर धोखे की गारंटी बनी भाजपा सरकार ने तो “भर्ती के झांसे” और “कटऑफ के फांसे” को ही, प्रदेश के युवाओं को “नौकरी न देने का औज़ार” बना लिया है !
“कटऑफ के कपट” के कारण ही हरियाणा लोक सेवा आयोग #HPSC के पिछले 21 महीने में निकाले क्लास-1 और क्लास-2 की 55 भर्तियों में 31% पद खाली रह गए हैं !
सरकारी विभागों के हजारों पद खाली होने के बावजूद जनवरी-2025 से सितंबर-2026 तक कुल 6,222 पदों की ही भर्ती निकली, मग़र इसमें भी 1905 पद खाली रह गए !
नौकरी की बजाय नौजवानों को धोखा देने की भाजपाई बदनीयती के कारण ही 90% भर्तियों में पद खाली रह गए हैं !
वैसे तो भर्ती और नौकरी के नाम पर “चुनावी झांसा” देना भाजपा का “फ़ेवरेट फंडा” है, मगर “कटऑफ के फंदे” का “नायब फार्मूला” भाजपा ने 2023 से लागू किया…इसके बाद तो अब एक ही भर्ती परीक्षा दो-दो बार कराने पर भी पद नहीं भरे जा रहे !
अब जरा “7 भर्तियों के शिगूफे” में खाली पदों का “नायब धोखा” देखिए…
▪️पीजीटी (कंप्यूटर साइंस) के 1711 पद में 1672 पद खाली,
▪️दोबारा परीक्षा के बाद भी 1672 में से 593 पद खाली,
▪️असिस्टेंट प्रोफेसर (अंग्रेजी) के 613 पदों में 462 पद खाली,
▪️एएमओ (AMO) के 805 पदों में 233 पद खाली,
▪️पीजीटी (फिजिकल एजुकेशन) के 249 पदों में 200 पद खाली,
▪️टीजीटी (बायोलॉजी) के 42 पदों में 36 खाली,
▪️साइंटिस्ट (एचसीपीसीबी) के 16 पदों में 12 खाली !
इतना ही नहीं भाजपा के इस शातिराना खेल से प्रदेश में लगभग हर भर्ती कोर्ट-कचहरी के चक्कर में उलझ रही है, सरकार ने खुद बताया है कि करीब 3000 से ज्यादा याचिकाएं नौकरियों की अड़चन में दाखिल हुईं हैं…
ज़ाहिर है इससे प्रदेश के युवा लगन, मेहनत और काबिलियत के बावजूद भी नौकरी न मिलने से घोर हताशा और निराशा में जीने को मज़बूर हैं !
अभी कुछ दिन पहले ही पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने सहायक प्रोफेसर भर्ती मामले में नायब सरकार को आईना दिखाते हुए HPSC को नए सिरे से परिणाम जारी करने का आदेश दिया था !
कारण- अगस्त 2024 में भर्ती विज्ञापन जारी करते समय HPSC ने “नेट क्वालीफाई” होने की शर्त को जून-2025 में आते आते “नेट कटऑफ” की शर्त से बदल दिया था !
इससे हरियाणा में भाजपा का “दलित, पिछड़े और गरीब वर्ग के युवाओं से हकमारी और हेरा-फेरी की साजिश” अदालत में भी बेनकाब हो गई थी !
दरअसल “न्यूनतम कटऑफ के औजार” से भाजपा, सबसे ज्यादा वंचित और ग़रीब परिवारों के बच्चों के भविष्य पर प्रहार कर रही है !
अब तो प्रदेश के लोग यही कह रहे हैं कि अगर भाजपा को हरियाणा के बच्चों को नौकरी देनी ही नहीं है तो “नौकरी के नाम पर नौटंकी” और “अयोग्यता के नाम पर अपमानित” करने का गंदा खेल बंद कर देना चाहिए !
