
धर्मपाल वर्मा
दक्ष दर्पण समाचार सेवा
चण्डीगढ़ ।
लंबे समय तक सत्ता में रही देश की सबसे पुरानी राष्ट्रीय पार्टी इंडियन नेशनल कांग्रेस को लेकर पूरे देश में यह मान्यता है हो गई है कि गुटबाजी और पार्टी के मठाधीशों ने इस दल का बेड़ा गर्ग करने का काम किया है। कांग्रेस की एक पहचान यह भी है कि टिकटों के वितरण के समय नेता आपस में इस तरह से भिड़ जाते हैं कि फैसला करते-करते नामांकन पत्र दाखिल करने की तारीख सर पर आ जाती है। अनुशासन की कमी ने भी कांग्रेस का भट्ठा गुल किया है लेकिन अब लगता है कि यही बीमारी भारतीय जनता पार्टी को भी लग गई है।
इस समय राज्य में स्थानीय स्वशासन के 7 शहरों में जो चुनाव हो रहे हैं उनको लेकर लोग यह सोचने और समझने को मजबूर हो गए हैं कि उलटी गंगा पहाड़ चढ़ रही है ।
जिस कांग्रेस में गुटबाजी थी उसने तो अपने सभी चेयरमैन और मेयर उम्मीदवारों के नामों की घोषणा कर दी है लेकिन इस मामले में भाजपा इतनी फिसड्डी साबित हुई है कि मामला चुनाव कमेटी, मुख्यमंत्री, पूर्व मुख्यमंत्री केंद्रीय गृहमंत्री ,संसदीय बोर्ड की सदस्य सुधा यादव से लेकर हरियाणा के कैबिनेट मंत्री विपुल गोयल तक पहुंच गया है लेकिन अभी तक एक भी चेयरमैन या मेयर उम्मीदवार का नाम फाइनल नहीं हो पाया है। नामांकन पत्र दाखिल करने की अंतिम तारीख 25 अप्रैल है आज 22 अप्रैल है ।हो सकता है फैसला 24 अप्रैल तक लटक जाए।
इस चुनाव में सबकी नजर नगर निगमों और उसमें मेयरों के चुनाव को लेकर है ।इनमें दो शहर ऐसे हैं जहां विधानसभा के चुनाव में कांग्रेस ने भाजपा को मात दी है यह है पंचकूला और अंबाला शहर।
इस समय टिकट बांटने के मामले में जिस तरह से भाजपा पीछे रही है उससे जहां बीजेपी समर्थक हताश और निराश हैं वहीं कांग्रेस के लोग उत्साहित हैं। उनमें उत्साह इसलिए भी है कि भाजपा में गुटबाजी साफ दिखाई देने लगी है । ऐसे में कमजोर उम्मीदवार या दबाव के कारण उपयुक्त उम्मीदवार मैदान में नहीं आए तो इसका लाभ निश्चित तौर पर कांग्रेस पार्टी को मिलेगा। यह भी देखा जा रहा है कि भाजपा के लोग इस बात को लेकर ओवर कॉन्फिडेंट है कि कमल के चुनाव चिन्ह की इतनी ब्रांडिंग हो चुकी है कि उसके नाम से कमजोर उम्मीदवार भी चुनाव जीत सकता है।
भारतीय जनता पार्टी में उभरी गुटबाजी इस तरह से सामने आ गई है कि लोगों को यह पता चल गया है कि कौन-कौन क्या कर रहा है। किसकी क्या कोशिश है कौन क्या चाहता है।
लोग यह भी समझ गए हैं कि भारतीय जनता पार्टी दो निवर्तमान मेयरों की टिकट काटना चाहती है।
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यह भी कि बड़े-बड़े नेता भी पार्षदों की उम्मीदवारी में गहन रुचि ले रहे हैं ।भाजपा के नेताओं के सामने यह बड़ी चुनौती है कि वह तीनों नगर निगमों में एक बार फिर पार्टी के झंडे को बुलंद करके दिखाएं। पार्टी इस चुनाव के परिणामों को पंजाब के विधानसभा के चुनाव में भी एक उपलब्धि के रूप में प्रस्तुत करना चाहते हैं।
