
धर्मपाल वर्मा
दक्ष दर्पण समाचार सेवा
चण्डीगढ़ ।
(पॉलिटिकल डेस्क)
हरियाणा में सत्तारुढ़ भारतीय जनता पार्टी में भी कांग्रेस की तरह है बहुत लोगों को धड़ेबाजी नजर आती है। पुराने लोगों को उस दौर की भी याद आने लगती है जब 1968 में चौधरी बंसीलाल मुख्यमंत्री बने थे और उन्हें पूर्व मुख्यमंत्री भगवत दयाल शर्मा ने बनवाया था। तब ऐसी स्थिति थी कि मुख्यमंत्री के पद से हटने के बाद भी भगवत दयाल शर्मा मुख्यमंत्री पद का लालच नहीं छोड़ पाए थे और शासन प्रशासन में बहुत दखल देते थे ।लोग बंसीलाल को डमी चीफ मिनिस्टर बताने लगे थे लेकिन सब जानते हैं कि ऐसा सर्वदा चलना कठिन होता है कुछ ऐसी स्थिति अब भी ऐसे ही महसूस की जा रही है ।
बेशक मनोहर लाल केंद्र में मंत्री हैं लेकिन आम राय यह है कि हरियाणा में सरकार में उनका दखल इस तरह से रहा है जैसा कभी भगवत दयाल शर्मा का रहा करता था परंतु सब जानते हैं कि बंसीलाल ज्यादा दिन दबाव में नहीं रहे और फिर हुआ क्या।
हरियाणा में लोग देख रहे हैं कि बेशक मनोहर लाल खुद यह बात कहते हो कि मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी अपने विवेक से कम कर रहे हैं और इस तरह के दखल का कोई सवाल नहीं है लेकिन राजनीति में बहुत चीज छुपती नहीं बल्कि धीरे-धीरे ही सही सामने आ जाती हैं। क्योंकि इन्हीं कारणों से कहा जाता है कि दीवारों के भी कान होते हैं।
आप माने या ना माने ,लेकिन यह सच्चाई है कि अफसरशाही में मनोहर लाल का दबदबा अब भी है और वह अफसरों को पसंद की पोस्टिंग को लेकर आमतौर पर प्रयासरत नजर आते रहते हैं । यहां तक उनकी थोड़ी बहुत ही सही अब भी चल रही है लेकिन जानकार इस बात का दावा कर रहे हैं कि संगठन में मनोहर लाल को इस तरह की कामयाबी मिलने में इसलिए कठिनाई हो रही है कि यह काम अंदर खाने ही सही अमित शाह के हाथों में है और यह आज से नहीं लंबे समय से उनके हाथ में रहा है ।अब तो भाजपा शासित प्रदेशों में भी अमित शाह की खुली खुलती है बंधी बनती है।
आप जानते हैं कि मनोहर लाल एक बार फिर शत्रु जीत कपूर को डीजीपी लगवाने की कोशिश में थे यदि कपूर के नाम पर सहमति नहीं होती तो उनका दूसरा उम्मीदवार आलोक मित्तल थे परंतु यहां उनकी नहीं चल पाई और अजय सिंहल डीजीपी बना दिए गए परंतु सब जानते हैं कि नरेंद्र बिजारणिया करनाल में ही एसपी कैसे लगे। यह भी कि शत्रुजीत कपूर को डीजी आइटीबीपी लगवाने का अनूठा काम किसने किया ।
बात यहीं समाप्त नहीं हुई यदि पसंदीदा अफसर कपूर डीजीपी नहीं लगे तो आईएएस अफसर सुधीर राजपाल होम सेक्रेटरी कैसे बन गए। आम आदमी इन चीजों को बेशक न समझे परंतु जानकार हर उठा पटक से वाकिफ रहते है । लोग कहते हैं कि यह मनोहर लाल ही थे जिन्होंने सेवा निवृत्ति के बावजूद अनुराग अग्रवाल को मुख्य सचिव के रूप में 1 वर्ष की एक्सटेंशन दिलाई।
लेकिन संगठन को लेकर मनोहर लाल के जो प्रयास सामने आ रहे हैं उन पर गौर करने की जरूरत है ।हम यह नहीं कहते कि वह मौजूदा अध्यक्ष को बदलने की महिम प्रत्यक्ष तौर पर चला रहे हैं परंतु वह नया अध्यक्ष जरूर चाहते हैं । मनोहर लाल शायद इतना ध्यान जरूर रखने लगे हैं कि अब वह किसी पंजाबी को आगे करने की गलती से बचना चाहते हैं लेकिन कभी दलित तो कभी अग्रवाल के प्रतिनिधित्व की बात करते जरूर नजर आते हैं ।लेकिन यहां एक बात शीशे की तरह साफ है कि संगठन में हरियाणा में ही नहीं पूरे देश में लगभग वही होगा या हो रहा है जो गृहमंत्री अमित शाह चाहते हैं। अमित शाह हरियाणा में मुख्यमंत्री नायब सैनी की ही पीठ नहीं थपथपा रहे हैं बल्कि उनकी पसंद ,मर्जी और प्राथमिकताओं पर अपनी मोहर भी लगा रहे हैं।
कुछ लोग यह भी कहते हैं कि भाजपा में चार-पांच विधायक पूर्व विधायक जो मुख्यमंत्री की पसंद है उनमें मोहनलाल बडोली भी एक हैं।जाहिर है जो मुख्यमंत्री चाहते हैं वही अमित शाह भी चाह रहे हैं। यही कारण है कि अब बड़ौली को लगातार दूसरी बार अध्यक्ष के रूप में काम करने से कोई रोक नहीं पाएगा।
इसके पीछे और भी कई कारण है । बडोली की मदद करने वाले लोगों के पास उनके पक्ष में काफी ऐसे तथ्य हैं जो उनके पक्ष को मजबूत करते हैं। मोहनलाल बडोली अभी किसी सदन के सदस्य नहीं है। उन्हें राज्यसभा में भी नहीं भेजा जा सकता क्योंकि हरियाणा से दो ब्राह्मण पहले ही राज्यसभा में है। ऐसी में अपने प्रधान को घर बैठने की गलती भाजपा कैसे कर सकती है। परफॉर्मेंस देखिए, उनके नेतृत्व में विधानसभा के चुनाव में भाजपा ने शानदार प्रदर्शन किया । उसके बाद म्युनिसिपालिटी के चुनाव में भाजपा को ऐतिहासिक सफलता मिली । यह भी कि मोहनलाल बडोली सर्वाधिक स्वीकार्य, व्यवहारिक, सरल और शांत स्वभाव के व्यक्ति हैं मिलनसार हैं घमंडी नहीं है। आप समझ सकते हैं कि जो काम करना ही अमित शाह जैसे नेताओं को है उसमें किसी और के दखल को कैसे बर्दाश्त किया जाएगा। मोहनलाल बडौली के खिलाफ उनके विरोधी जिस अपराधिक मामले की बात करते थे उसमें कोर्ट द्वारा क्लीन चिट दे दी गई है ।ऐसे में बडोली को रोक पाना बहुत कठिन काम है। कुछ लोग तो यहां तक कह देते हैं कि भाजपा के हालात यह है कि मोहनलाल बड़ौली तब तो बदले भी जा सकते हैं जब मनोहर लाल उनकी खुली वकालत करनी शुरू कर दें , अब नहीं। यह बीजेपी की अंदरूनी स्थिति का एक सच भी है। यहां एक बात और महत्वपूर्ण यह है कि बडोली भाजपा ही नहीं आरएसएस में भी अपना हस्तक्षेप और प्रभाव रखते हैं।
अब भाजपा तीन नगर निगमों के चुनाव की तैयारी में है । उसका फोकस पंजाब के विधानसभा चुनाव पर भी है। जहां मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी भाजपा के चेहरे के रूप में देखे जा रहे हैं । ऐसे में मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के मजबूत होने के हालात भी मोहनलाल बड़ौली के भी काम आ रहे हैं। यही कारण है कि जानकार इस बात का दावा कर रहे हैं कि मोहनलाल बडोली को अध्यक्ष बनाए रखना के आदेश लिखकर रख दिए गए हैं ,इनकी घोषणा मात्र बाकी है।
