बसन्त को ऋतुओं का राजा माना जाता है। माघ शुल्क पंचमी से इसका आगमन माना जाता है। वर्ष के आरम्भ में बसन्त प्रकृति को मानो पूरी तरह नया और ताजा कर देता है। वैसे हर पर्व हमें प्रेम और शांति की शिक्षा देता है। बसन्त पंचमी का पर्व हमें प्रकृति से प्रेम और मां सरस्वती की साधना कर अपने जीवन को प्रगति के पथ पर जाने के लिए संकल्पित करने का पर्व है। बसन्त पंचमी के दिन सबसे पहले श्री गणेश जी की उपासना करें। इसके पश्चात कलश स्थापित करके सरस्वती जी की पूजा करें। जगह-जगह मां सरस्वती से ज्ञान, बुद्धि और विवेक की प्रार्थना की जाती है। विद्यार्थी वर्ग मां शारदा की वन्दना कर सफलता प्रदान करने के लिए विनय करते है।
देखा जाए तो केवल लक्ष्मी जी की कृपा से ही जीवन सफल नहीं होता। लक्ष्मी के साथ साथ जब सरस्वती की कृपा होती है तब मनुष्य जीवन की सार्थकता सिद्व होती है। होली की शुरुआत बसन्त पंचमी से ही होती है। सर्वप्रथम इसी दिन गुलाल उडाया जाता है। ब्रज में तो इस दिन से ही होली का उत्सव आरम्भ हो जाता है।
पुराणों के अनुसार इस दिन लक्ष्मी ने विष्णु जी से विवाह किया था। इस दिन ग्रामीण क्षेत्रों में तो पीले वस्त्र धारण कर महिलाएं बसन्त के आगमन का गीत गाकर उसका स्वागत करती है।

