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धर्मपाल वर्मा
दक्ष दर्पण समाचार सेवा
आप इस बात को जरूर स्वीकार करेंगे कि आमतौर पर शिकार घेर कर किया जाता है। उसके लिए बाकायदा तैयारी भी की जाती है । यह काम चोरी चोरी चुपके चुपके और समझदारी से इस तरह से किया जाता है कि शिकार को भनक तक नहीं लग पाती। यह बात राजनीति मामलों में भी खूब देखने को मिलती है। जब दिल्ली में विधानसभा के चुनाव हुए तो आरंभिक और सामान्य राय यह थी कि इस चुनाव में आम आदमी पार्टी की सीटों की संख्या घट सकती है लेकिन सरकार अरविंद केजरीवाल ही बनाएंगे। लेकिन भारतीय जनता पार्टी ने साबित कर दिया कि उसे माहौल बनाना आता है मतलब माहौल बनाना ही राजनीति है।

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सारा देश जानता है कि भाजपा ने अरविंद केजरीवाल को जब यह कहकर घेरने की कोशिश की कि वे यमुना को साफ करने में असफल रहे है तो वह पलट कर यह जवाब भी नहीं दे पाए कि क्या केंद्र की भाजपा सरकार ने गंगा को साफ करने का काम करके दिखा दिया है। कारण यह है कि वे चुनाव के आरंभिक दौर में ही विचलित हो गए थे मतलब कर दिए गए थे।
भाजपा दिल्ली के चुनाव में इतनी तैयारी मे थी कि उसने न केवल सरकार बनाई बल्कि अरविंद केजरीवाल को विधानसभा में भी नहीं पहुंचने दिया और चुनाव हरा कर घर बैठा दिया।
अब देश की जागरूक जनता यह महसूस कर रही है कि भारतीय जनता पार्टी ने पंजाब में भी अब इसी तरह के ऑपरेशन की शुरुआत कर दी है और भारतीय जनता पार्टी तीन टास्क लेकर पंजाब विधानसभा में बड़ी दस्तक देने की तैयारी में लग गई है। भगवंत मान की सरकार को चलता करना है। आम आदमी पार्टी को किनारे लगा देना है और कांग्रेस तथा आम आदमी पार्टी में घुसपैठ करना है।
जिसने अपनी चाणक्य नीति से दिल्ली में जीत दर्ज की बिहार में चकित करने वाले परिणाम लाकर दिखाएं उसी को अब पंजाब में अपने राजनीतिक दाव पेच आजमाने का मौका मिलने वाला है, उसका नाम है अमित शाह।
भारतीय जनता पार्टी और अमित शाह पंजाब में किस तरह की योजना पर काम कर रहे हैं इसे समझना मुश्किल नहीं है। यहां हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी को नायाब नेता के रूप में पेश करने की योजना है। बीजेपी ने पंजाब में उन्हें एक चेहरे के रूप में सामने कर दिया हैं।
हम बार-बार एक बात कहते रहे हैं कि पंजाब भारतीय जनता पार्टी के लिए एक पॉलिटिकल लैबोरेट्री है और इस बार भाजपा पंजाब में विधायकों की गिनती बढ़ाने की बजाय विधानसभा में दस्तक देने की तैयारी में है ।इसके लिए यह भी संभव है कि शिरोमणि अकाली दल भारतीय जनता पार्टी की मदद में आकर खड़ा हो जाए। हाल में पंजाब में पंचायत समितियों के चुनाव में एक संदेश गया है कि अकाली दल और भाजपा मिलकर ही पंजाब में आम आदमी पार्टी को शिकस्त दे सकते हैं।
चुनाव में अभी 1 वर्ष से ज्यादा का समय शेष है। चुनाव से पहले भाजपा पंजाब के लोगों को कई ऐसे संदेश देने में सफल हो सकती हैं जिनका उसे राजनीतिक लाभ आसानी से मिलेगा ।
राजनीतिक पर्यवेक्षक यह दावा करने लगे हैं कि भाजपा पंजाब के चुनाव के समय न केवल भगवंत मान सरकार को चलता करना चाहेगी बल्कि आम आदमी पार्टी को भी प्रदेश और देश के राजनीतिक परिदृश्य से प्रभावहीन और शुन्य करना चाहेगी। भारतीय जनता पार्टी पंजाब विधानसभा के 2027 के चुनाव को एक मौके के रूप में देख रही है । खबर यह है कि उसके नेता पंजाब पर काबिज होकर एक दो नहीं अपने कई इरादों को अमली जामा पहनने के सपने लेते आ रहे हैं।
पंजाब के चुनाव को लेकर हरियाणा परदेस भाजपा के लिए एक लॉन्चिंग पैड की तरह से है। पिछले विधानसभा सत्र में हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी जिस तरह पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान की मुद्रा में पगड़ी बांध कर सदन में पहुंचे तो इसके मायने हरियाणा ही नहीं पंजाब की जनता को भी समझ आ गए थे।
ऐसा लगता है कि पार्टी ने हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी को ऑपरेशन पंजाब की जिम्मेदारी दे दी है। वह जितनी बार पंजाब गए हैं एक राजनीतिक संदेश देकर वापस आए हैं।
नायब सिंह सैनी चुनाव तक पंजाब के मतदाताओं को हरियाणा के उदाहरण पेश करते हुए कई संदेश देने की तैयारी में है। भाजपा को इनका चुनाव में लाभ हो सकता है। वह संदेश दे रहे हैं कि हरियाणा में पंचायती राज संस्थाओं को सरकार खुले हाथ से अनुदान दे रही है। यह कि हरियाणा में महिलाओं को ₹2100 मासिक आर्थिक सहायता दी जा रही है ।हरियाणा में देश में वृद्धावस्था पेंशन रूप में सबसे अधिक₹3200 की राशि दी जा रही है ।
इसके अलावा यह भी कि दैनिक उपयोग की काफी चीजें हरियाणा में सस्ती है पंजाब में महंगी है। हरियाणा में दो दर्जन फसलें एमएसपी पर खरीदी जा रही है। हरियाणा में औद्योगिक विस्तार बड़े स्तर पर हुआ है खेलों में हरियाणा की उपलब्धि भाजपा शासन में विशेष उपलब्धि के रूप में देखी जा रही है। भाजपा एक बार फिर यह नारा दे सकती है कि हम पंजाब को फिर से देश का एक नंबर का प्रदेश बनाएंगे। आदि आदि।
पिछले दिनों अमित शाह पंचकूला में कई कार्यक्रमों में हिस्सा लेने पहुंचे तो उन्होंने मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की मुक्त कंठ से प्रशंसा की। राजनीति जानने वालों ने इस बात पर भी विशेष तौर पर गौर किया है। अब लोगों ने समझ लिया है कि नायब सिंह सैनी फ्री हैंड होकर काम करते नजर आएंगे और हरियाणा में भाजपा के किसी बड़े नेता का हस्तक्षेप रहेगा तो उसका नाम भी अमित शाह ही है।
सूत्र बता रहे हैं कि अब अमित शाह न केवल पार्टी संगठन को अपने ढंग से चलाएंगे बल्कि वह भाजपा शासित प्रदेशों में भी नीति निर्धारण करेंगे। प्रधानमंत्री ने शायद उन्हें इसके लिए अधिकृत भी कर दिया है। नीतीन नबीन पार्टी का कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाने का फैसला भी इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।
ऐसा लगता है कि पार्टी ने हरियाणा में संगठन के मामले में मौजूदा प्रदेश अध्यक्ष को ही एक और मौका देने का फैसला कर लिया है और जल्दी ही इसकी घोषणा होने वाली है। ऐसा करके भी भारतीय जनता पार्टी यह संदेश देना चाहती है कि अब हरियाणा में वही होगा जो मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी चाहेंगे । प्रदेश अध्यक्ष के रूप में मोहनलाल बडोली का बने रहना तय है। भाजपा ने यह फैसला लिखकर छोड़ दिया है केवल घोषणा बाकी है। कुल मिलाकर यह कहा जा सकता है कि भाजपा पंजाब में भी लंबे समय के बाद डबल इंजन की सरकार की परिकल्पना के दम पर चुनाव में उतर सकती है।

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