
फतह सिंह उजाला
दक्ष दर्पण समाचार सेवा ।
पटौदी। देश ने एक ऐसा अजूबा दृश्य देखा, जिसने भारतीय लोकतंत्र की आत्मा को झकझोर कर रख दिया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी का 75वाँ जन्मदिन जिस तरह से “अश्वमेध यज्ञ” की भव्यता के साथ मनाया गया, वह किसी लोक-उत्सव से अधिक, एक सुसंगठित सत्ता का दबंग प्रदर्शन जैसा प्रतीत हुआ। देश के प्रमुख दैनिक समाचार पत्र न जाने कितने अन्य बड़े-बड़े उद्योगपतियों द्वारा दिए गए पूरे-पन्ने के विज्ञापनों से पटे पड़े थे। ये विज्ञापन प्रधानमंत्री को जन्मदिन की शुभकामनाएँ देने के नाम पर सत्ता और पूँजी के गठजोड़ की खुली नुमाइश कर रहे थे। यह वही पूँजी है जिसे सरकार की नीतियों ने लगातार मजबूत किया है, और कल उसने अपनी कृतज्ञता को अरबों रुपये खर्च कर देशवासियों की आँखों के सामने परोसा। ग्लोबल हैप्पी बर्थडे सेलिब्रेशन की संज्ञा देते हुए यह प्रतिक्रिया सुप्रीम कोर्ट की एडवोकेट एवं वरिष्ठ कांग्रेस नेत्री श्रीमती पर्ल चौधरी के द्वारा व्यक्त की गई।
उन्होंने कहा दिन ढलते-ढलते इस “महाजन्मदिन बधाई यज्ञ” में खेल और सिनेमा की नामचीन हस्तियाँ भी शामिल हो गईं। विश्वनाथन आनंद जैसे अंतरराष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी से लेकर शाहरुख़ ख़ान, आर. माधवन, विक्रांत मेसी, आमिर ख़ान, सैफ अली ख़ान पटौदी, सुनील शेट्टी जैसे फ़िल्म सितारे वीडियो संदेशों के ज़रिये सोशल मीडिया पर “महा-आरती” गाने लगे। लोकतांत्रिक राजनीति में यह एक खतरनाक संकेत है, जब सांस्कृतिक और खेल जगत की लोकप्रिय हस्तियाँ सत्ता की छाया में अपनी चमक नापने लगें। सबसे चौंकाने वाली बात रही देश के सबसे बड़े उद्योगपति मुकेश अंबानी का यह कथन, जिसमें उन्होंने भारत के 100 वर्ष पूरे होने यानी 2047 तक मोदी जी के प्रधानमंत्री बने रहने की कामना कर दी। यदि ऐसा होता है तो उस समय मोदी जी की उम्र 97 वर्ष होगी, एक ऐसा समय जो सनातन परंपरा के अनुसार संन्यास का भी अंतिम चरण माना जाता है। क्या यही है लोकतांत्रिक भारत का सपना, जहाँ सत्ता को व्यक्ति-पूजा में बदलकर एक शाश्वत राज की आकांक्षा की जाए?
केवल लोकतांत्रिक मर्यादाओं का अपमान
श्रीमती चौधरी ने कहा भाजपा के शीर्ष नेताओं को #MyModiStory नामक हैशटैग के तहत अपने संस्मरण साझा करने का आह्वान किया गया। देर रात खबरें आईं कि अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, इंग्लैंड और खाड़ी देशों में भी टैक्सियों, बस-स्टैंडों और फुटपाथों पर प्रधानमंत्री को बधाई देने वाले बिलबोर्ड्स चमक रहे थे। ऐसा दृश्य किसी लोकतांत्रिक गणराज्य के लिए नहीं, बल्कि उत्तरी कोरिया जैसे किसी निरंकुश शासन या साम्राज्यवादी तंत्र के लिए अधिक स्वाभाविक प्रतीत होता है।सबसे गंभीर प्रश्न यह है कि इस पूरे विज्ञापन-यज्ञ को “गोदी मीडिया” ने किस उत्साह से प्रसारित और प्रचारित किया। दिन भर चैनलों पर एक व्यक्ति की “महिमा-कथा” सुनाई जाती रही, जबकि युवाओं की बेरोज़गारी, हर घर महँगाई, महिलाओं का स्वास्थ्य एवं दवाई, बच्चों की पढ़ाई किसानों की परेशानियाँ, और घटती लोकतांत्रिक संस्थाओं की विश्वसनीयता जैसे असल मुद्दे कहीं गायब रहे। लोकतंत्र का मूल तत्व है, विचारों का आदान-प्रदान, सत्ता की जवाबदेही और संस्थाओं का संतुलन। परन्तु जब प्रधानमंत्री का जन्मदिन एक राष्ट्रीय आयोजन में बदल जाए, जब सत्ता के इर्द-गिर्द पूँजी, मीडिया और मनोरंजन जगत इस प्रकार से कतारबद्ध हो जाए, तब यह न केवल लोकतांत्रिक मर्यादाओं का अपमान है बल्कि आने वाले समय का गंभीर ख़तरा भी।
लोकतंत्र में व्यक्तिपूजा किसी भी नेता के लिए अस्वीकार्य
उन्होंने अपनी बात जारी रखते हुए कहा भारत के संविधान में विश्वास रखने वाले हर सख्श का यह स्पष्ट मत है कि किसी भी लोकतंत्र में व्यक्तिपूजा का यह स्तर, चाहे वह किसी भी नेता के लिए हो, अस्वीकार्य है। लोकतंत्र व्यक्ति से बड़ा है, पद से बड़ा है, और सत्ता से भी बड़ा है। प्रधानमंत्री को व्यक्तिगत रूप से दी गई शुभकामनाओं पर आपत्ति नहीं हो सकती, परन्तु जब यह शुभकामनाएँ अरबों रुपये के विज्ञापन यज्ञ में बदल जाएँ और लोकतांत्रिक विमर्श को दबाने का माध्यम बनें, तो यह लोकतंत्र की आत्मा पर चोट है। आज आवश्यकता है कि देश का हर जागरूक नागरिक इस प्रवृत्ति को पहचाने। नेताओं का मूल्यांकन उनके कार्यों और नीतियों पर होना चाहिए, न कि उनके जन्मदिनों पर होने वाले महा छपास आयोजनों पर। भारत का लोकतंत्र सदियों की मेहनत और बलिदानों से बना है; इसे किसी एक व्यक्ति की भव्य छवि में समेटना उस इतिहास के साथ अन्याय होगा।
“वन नेशन और वन हैप्पी बर्थडे सेलिब्रेशन”
कांग्रेस नेत्री पर्ल चौधरी ने कहा लोकतंत्र का असली उत्सव सत्ता के विकेंद्रीकरण और जन-भागीदारी में है, न कि किसी एक नेता के चारों ओर रचा गया महिमामंडन का “विज्ञापन यज्ञ”। यही सच्ची सेवा होगी उस भारत माता को, जिसने हमें आज़ाद और लोकतांत्रिक बनाया। “वन नेशन, वन हैप्पी बर्थडे सेलिब्रेशन” के शोर में अधिकतर देशवासी, महान समाज सुधारक श्रद्धेय “रामास्वामी नायकर पेरियार” जी की 146वीं जयंती मिस कर गए ।वहीं सदियों से मनाए जाने वाले “विश्वकर्मा पूजा” का त्योहार भी थोड़ा इस विज्ञापन यज्ञ में खो सा गया । अंत में उन्होंने कहा खैर, “बिलेटेड हैप्पी बर्थडे मोदी जी”।
