
दक्ष दर्पण समाचार सेवा
नरवाना, 12 सितम्बर (विनय जेठी) रणदीप सिंह सुरजेवाला, सांसद व महासचिव, भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने आज नरवाना क्षेत्र के गांव दनौदा, भिखेवाला, फरैण, दबलैन, ईस्माइलपुर समेत दर्जनों गांव का दौरा कर भाजपा सरकार की लापरवाही और किसान, मजदूर, गरीब, एससी-बीसी की बर्बादी का मंजर अपनी आंखों से देखा। मुख्यमंत्री नायब सैनी इस इलाके में आए तो जरूर लेकिन किसी खेत या गांव की गली में जाकर किसान या गरीब आमजन की पीड़ा को नहीं समझा। दूसरी ओर एक या दो गांव में सडक़ पर कहकहे लगाकर किसान, मजदूर, गरीब के जले पर नमक जरूर छिडक़ गए।

नरवाना क्षेत्र में नरवाना-धरौदी के खेत आज भी पानी से लबालब है। इसके अलावा गांव दनौदा सैंथली, भिखेवाला, फरैण, दबलैन, ईस्माइलपुर सहित इलाके के अनेक गांव की फसल जल भराव से बर्बाद हो चुकी है। नरवाना क्षेत्र के कई गांव सेम की समस्या से ग्रस्त हो चुके हैं, जिसके कारण ना तो कपास और बाजरा की फसल होती है और ना ही धान की फसल। हर साल हजारों एकड़ फसल बर्बाद हो जाती है। लेकिन सरकार के पास इस समस्या से निजात दिलवाने के लिए कोई प्रबंधन नहीं है यह नायब सैनी सरकार की अपराधिक लापरवाही नहीं, तो क्या है?
अब ‘ढोल की पोल’ खुल गई है। सरकारी निकम्मेपन और नाकारापन की असलियत लोगों के सामने है। प्रदेश में बारिश से जल भराव और बा? से पहले न रोकथाम का इंतजाम हुआ, न बजट इस्तेमाल हुआ, न तटबंध पक्के किए गए, न ड्रेन, नालों और नदियों की डिसिल्टिंग, सफाई व गाद निकाली गई, न पंपिंग सेट का इंतजाम किया, न ड्रेनेज साफ किए, न इंजन लगाए गए, न मॉक ड्रिल की, न प्रशासन को मुस्तैद किया और न ही कोई इंतजाम किया। बाझ के हाहाकार, चौतरफा विनाश और भयंकर नुकसान के लिए प्राकृतिक आपदा से ब?कर नायब सैनी सरकार जिम्मेवार है।
हरियाणा के किसान और गरीब एससी-बीसी परिवार इस समय दोहरी मार झेल रहे हैं। एक ओर बाढ़ की भीषण तबाही, दूसरी ओर भाजपा सरकार की बेरुख़ी और धोखाधड़ी। सरकारी आंकड़े खुद गवाही दे रहे हैं कि प्रदेश के 6,017 गांवों के 3,80,156 किसानों ने 22 लाख 41 हजार 637 एकड़ से अधिक भूमि में फसलों के नुकसान की जानकारी पोर्टल पर दर्ज कराई है।
दुखों के बीच किसानों को राहत के नाम पर केवल पोर्टल की लंबी प्रक्रियाओं और मज़ाक़ जैसे मुआवज़े का सामना करना पड़ रहा है। लाखों किसान अब कर्ज़ के बोझ तले दब गए हैं। किसानों को राहत देने के बजाय सरकार महज़ दिखावटी घोषणाओं से काम चला रही है। नायब सैनी सरकार द्वारा घोषित 7,000 प्रति एकड़ मुआवजा किसान के साथ भद्दा मजाक है। किसानों की शुरुआती लागत ही 25,000 से 30,000 प्रति एकड़ आती है, जबकि कई जगह सालाना पट्टा 70,000 प्रति एकड़ तक देना पड़ता है। ऐसे में 7,000 का मुआवजा किसानों के साथ सरासर अन्याय और हरियाणा की खेती-किसानी को चौपट करने वाली भाजपाई नीति है। जो किसान बंटाई पर खेती करते हैं और ब्याज पर पैसे लेकर बीज-बोआई करते हैं, उनके सामने अब ‘दोहरे कर्ज़’ का संकट खड़ा हो गया है। यदि किसानों को जल्द राहत और न्याय नहीं मिला तो यह संकट राज्य की अर्थव्यवस्था और कृषि दोनों को गहरा झटका देगा। भूमिहीन मज़दूरों को अब तक एक फूटी कौड़ी तक नहीं मिली। किसान संगठन आरोप लगा रहे हैं कि भाजपा सरकार ने त्रासदी में भी गरीब परिवारों को उनके हाल पर छोड़ दिया है।
सबसे बड़ी समस्या धान किसानों की है। उन्होंने बाक़ायदा बीमा प्रीमियम भरा, मगर न तो बीमा कंपनियां क्लेम दे रही हैं और न ही सरकार अपने पोर्टल पर आवेदन स्वीकार कर रही। हालत यह है कि 12 जिलों में लाखों एकड़ धान की फसल तबाह हो गई, फिर भी किसान मुआवज़े और बीमा क्लेम से वंचित हैं। उन्होंने कहा कि भाजपा एंड कंपनी ने हर सीजन बीमा कंपनियों के ज़रिए किसानों को लूटने का एक सुनियोजित तंत्र खड़ा कर दिया है।
बाढ़ जैसी आपदा में भी राहत देने की जगह सरकार और बीमा कंपनियां किसानों से दुश्मनों जैसा सलूक कर रही हैं। प्रदेश के किसान भी भाजपा की नीतियों से परेशान हैं। कई जिलों में दौरे के दौरान किसानों से बातचीत की तो किसानों ने कहा, ‘भाजपा का डबल इंजन इस बार लूट और धोखे के डबल बुलडोजऱ में बदल चुका है, जिसने लाखों किसानों और गरीब परिवारों को संकट के दलदल में धकेल दिया है।’ उन्होंने तुरंत नुकसान की भरपाई करने की मांग सरकार से की है।
भयावह नतीजे सबके सामने हैं।
हरियाणा के 6,017 गाँव जलमग्न हैं, 11 शहर व 72 कस्बों में पानी भर चुका है। 41 से अधिक लोग जान गँवा चुके। और अब जल भराव से फैली बीमारियों के कारण 12 से अधिक मौतें हो चुकी हैं। डायरिया, चिकनगुनिया,बुखार और त्वचा संबंधी बीमारियां आज महामारी का रूप ले रही है।
किसान की 22,00,000 एक से ज्यादा फसल बाढ के पानी से डूबकर बर्बाद हो गई है। कपास हो या गन्ना या धान या सब्जियाँ, बेतहाशा नुकसान हुआ है। उद्योग धंधे पूरी तरह से चौपट हैं। अंबाला में पूरा साईंटिफिक इंस्ट्रूमेंट उद्योग व इंडस्ट्रियल एरिया कई-कई फुट पानी के नीचे है, तो बहादुरगढ में मारुति के कार यार्ड से लेकर सभी फैक्ट्रियाँ बाढ के पानी की चपेट में हैं।
हरियाणा में बाढ का एक प्रमुख कारण नायब सैनी सरकार के निकम्मेपन के चलते ड्रेनों का टूटना है। उदाहरण के तौर पर सिरसा, फतेहाबाद और हिसार में ड्रेन टूटने से बाढ आई और तबाही मची। रोहतक में सांपला ड्रेन ओवरफ्लो हो टूटने से बाढ आई। बहादुरगढ में मुंगेशपुर ड्रेन टूटने से पूरे शहर में तबाही मच गई है। मुलाणा, अंबाला में जोधा बरसाती नाला टूट गया, तो झज्झर में ड्रेन नंबर 8 टूट गई। सोनिपत में बडवासिनी गाँव के पास ड्रेन ओवरफ्लो हो खेतों में बाढ आ गई। तो नांगल चौधरी में रायपुर बांध से ओवरफ्लो हो जलभराव हो गया। हरियाणा में बाढ का असली कारण यह है।
सारे ट्यूबवैल व मोटरें खत्म हो गए हैं। सभी पीने के पानी के वॉटरवर्क्स बाढ के पानी से दूषित हो गए हैं। सैकडों की संख्या में मवेशी बह गए हैं। गाँव की अंदरूनी व लिंक सडकें सब बाढग्रस्त हैं।
न तैयारी, न बाढ प्रबंधन, न जल भराव रोकथाम – यही है नायब सैनी सरकार का अपराधिक चेहरा
एक तरफ पूरा हरियाणा बाढ से ग्रस्त है, तो दूसरी ओर प्रदेश के हवा-हवाई मुख्यमंत्री, श्रीमान नायब सैनी वीडियो शूट और जुबानी जमाखर्च में व्यस्त हैं।प्रदेश में बारिश से पहले कहीं भी न तो ड्रेनों की सफाई की गई, और न ही बाढ की रोकथाम के कोई और कदम उठाए गए। मुख्यमंत्री सहित सारी सरकार केवल चुटकुले सुनाने में व्यस्त रही। इसका परिणाम आज हरियाणावासी भुगत रहे हैं।
भाजपा सरकार द्वारा न तो राज्य फ्लड कंट्रोल बोर्ड की बैठक बुला बारिश के सीजन से पहले बाढ प्रबंधन व रोकथाम का प्रोटोकॉल तैयार किया गया, न ही निर्देश दिए गए, न ही बजट आवंटन किया गया। मुख्यमंत्री द्वारा न ही बाढ प्रबंधन व रोकथाम के लिए जिला कलेक्टर्स की बैठक बुलाई, न ही हिदायत दी, न ही जिला स्तर पर ड्रेन और नदियों के तटों को मजबूत करने का कोई पुख्ता इंतजाम किया गया, न ही कटाव को रोकने के लिए मिट्टी से भरे कट्टों व मशीनरी का इंतजाम किया गया, न ही छोटे और बडे पंपिंग सेट्स व ऑपरेटर्स का इंतजाम किया गया, तथा न ही और जरूरी कदम उठाए गए। बाढ से हाल बेहाल, असल में सरकारी निकम्मेपन व आपराधिक लापरवाही का नतीजा है।
जान-माल के नुकसान के बावजूद नहीं जाग रही नायब सैनी सरकार – न मुआजवा दे रही, न कारगर कदम उठा रही
आज तक भी बाढ राहत व बचाव कार्यों के लिए भाजपा सरकार ने हृष्ठक्रस्न, पैरा मिलिट्री, सेना या किसी अन्य केंद्रीय एजेंसी से मदद लेने की कोई पहल नहीं की। दूसरी ओर, मोदी सरकार भी ऐसे सोई पडी है, जैसे हरियाणा में कुछ हुआ ही न हो।
लाखों किसानों ने 22,00,000 एक से अधिक फसल की बर्बादी का ब्यौरा तो सरकारी पोर्टल पर दर्ज करवा दिया। असल में 25 से 27 लाख एक भूमि पर खडी फसल नष्ट हो गई है। सवाल सीधा है। नायब सैनी सरकार इमरजेंसी सर्वे कराकर सात दिन के भीतर 50,000 रुपया प्रति एक मुआवजा देने की घोषणा क्यों नहीं कर रही? पोर्टल-पोर्टल क्यों खेला जा रहा है? मुख्यमंत्री यह क्यों नहीं बताते कि 50,000 रुपया प्रति एक? का मुआवजा किसान को कितने दिन में देंगे?
41 से अधिक जानें जाने की खबरें आई हैं। इन परिवारों को 50 लाख रुपये की राहत राशि कब तक दी जाएगी, मुख्यमंत्री जवाब दें।
लाखों एक भूमि जलमग्न है। यही रहा तो शायद मौजूदा फसल तो नष्ट हो गई, अगली फसल भी न हो पाए, ऐसा खतरा है। श्रीमान नायब सैनी बताएं कि इंजन लगाकर खेतों से खडे पानी की निकासी कितने दिन में करेंगे?
हजारों मवेशी बह गए, मर गए या गुम हो गए। हर मवेशी का रूपए 50,000 से 100,000 का मुआवजा सरकार कितने दिन में देगी।
हजारों मकान या तो ध्वस्त हो गए, या पूर्णत: या आंशिक तौर से क्षतिग्रस्त हो गए। लोगों के मकानों में रूपए 200,000 से 10,00,000 तक का नुकसान हुआ है। श्रीमान नायब सैनी बताएं कि क्या 30 दिन में सर्वे करवाकर नुकसान के अनुरूप मुआवजा देंगे?
किसानों के ट्यूबवैल व मोटरें बाढ के पानी से खत्म हो गईं। हर क्षतिग्रस्त ट्यूबवैल का रूपए 75,000 प्रति ट्यूबवैल का मुआवजा क्या 30 दिन के अंदर दिया जाएगा।
गाँव की लिंक सडकें, खेतों की सडकें, व स्टेट हाईवे, स्कूल व चौपाल इत्यादि बाढ से क्षतिग्रस्त हैं। मुख्यमंत्री श्री नायब सैनी बताएं कि क्या अगले 30 दिनों में 2,300 बाढग्रस्त गाँव सहित सभी गाँव में जहाँ-जहाँ नुकसान हुआ है, वहाँ पंचायतों को स्पेशल फंड देकर इन सब सार्वजनिक संपत्तियों का पुननिर्माण या मरम्मत करवाएंगे।
हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सैनी को हैलीकॉप्टर से जमीन पर उतरकर बाढ राहत का काम करने की जरूरत है। थोडे दिन के लिए ‘कॉमेडी शो’ पर विराम लगाएं। नरवाना और धरौदी के बीच खेतों में दोनों तरफ जलभराव है और इसमें से काफी इलाका सेमग्रस्त है। नरवाना क्षेत्र के गांव दनौदा, भिखेवाला, फरैण, दबलैन, ईस्माइलपुर समेत दर्जनों गांव की गालियां और खेत जलभराव से ग्रस्त हैं। हमारे दबाव में मुख्यमंत्री, श्रीमान नायब सैनी, नरवाना से टोहाना वाया धमतान तो जरूर गए, लेकिन नरवाना क्षेत्र में गाड़ी से उतरकर बाढग़्रस्त किसी खेत या गांव की गली में जाकर किसान या गरीब आमजन की पीड़ा को नहीं समझा। भाजपा के नेताओं और मुख्यमंत्री ने क्षेत्र के किसान, मजदूर गरीब की कोई सुध नहीं ली।
