
दक्ष दर्पण समाचार सेवा
कैथल (कृष्ण प्रजापति): कलायत हल्के के समाजसेवी मनोज चहल कोटड़ा ने हरियाणा में गांव-गांव लाइब्रेरी खोलने के अभियान को ऐतिहासिक और बेमिसाल पहल बताया। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ किताबों तक सीमित कदम नहीं है, बल्कि यह आने वाली पीढ़ियों के भविष्य को सुरक्षित बनाने और समाज में नई चेतना जगाने का माध्यम है। मनोज चहल ने कहा कि इस पहल से नई पीढ़ी शिक्षित होगी, फसल और नस्ल दोनों बचेंगी और गांवों में जागरूकता बढ़ेगी। जब शिक्षा फैलेगी तो रोजगार के नए अवसर खुलेंगे, अंधविश्वास और कुरीतियों पर रोक लगेगी और समाज अपनी असली ताकत को पहचानेगा।
उन्होंने कहा कि जब गांव का युवा पढ़ेगा-लिखेगा तो वह आंख मूंदकर किसी भी राजनीतिक दल या नेता पर निर्भर नहीं रहेगा, बल्कि सवाल-जवाब करेगा और सत्ता से जवाबदेही मांगेगा। यही लोकतंत्र की असली मजबूती है। मनोज चहल ने युवाओं को प्रेरित करते हुए कहा कि दो रोटी कम खा लो लेकिन पढ़ाई कभी मत छोड़ो। उच्च शिक्षा हर हाल में जरूरी है, क्योंकि यही परिवार, समाज और देश को नई दिशा देती है।उन्होंने कहा कि यह लाइब्रेरी आंदोलन केवल वर्तमान नहीं बल्कि भविष्य के भारत को आकार देगा। पढ़ा-लिखा समाज ही असली स्वतंत्रता और प्रगति की राह तय करता है।
मनोज चहल ने कहा कि शिक्षा ही असली आज़ादी है, यही आज के समय की सबसे बड़ी जरूरत है।
