
धर्मपाल वर्मा
दक्ष दर्पण। नई दिल्ली
उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ के त्यागपत्र के बाद कांग्रेस में अब एक उत्साह दिखने लगा है । धनखड़ का खुला विरोध करने वाली कांग्रेस के नेता उनके प्रति सहानुभूति दिखाते नजर आ रहे हैं । धनकड़ भाजपा के अकेले नेता नहीं है जो कांग्रेस के लिए उपयोगी होने जा रहे हैं बल्कि ऐसे नेता कई और भी बताए जा रहे हैं।
पहले श्री धनखड़ की चर्चा कर लेते हैं।
उपराष्ट्रपति ने राज्यसभा के सभापति के रूप में कांग्रेस और कांग्रेस के नेताओं को कई बार इस तरह के दर्द दिए हैं कि उनके खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने की एक नहीं दो बार कोशिशें की गई ।यह अलग बात है कि एक बार लाया गया अविश्वास प्रस्ताव खारिज कर दिया गया जबकि दूसरी बार तैयारी हुई परंतु प्रस्ताव लाया नहीं जा सका ।धनखड़ कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को कई बार झटका देते रहे उनके साथ सहज नहीं रह पाए लेकिन अब कांग्रेस को धनखड़ से सहानुभूतिपूर्ण तरीके से व्यवहार करती नजर आ रही है। पाठक जान ले कि त्यागपत्र देने से कुछ ही दिन पहले श्री धनखड़ ने इन्हीं मल्लिकार्जुन जी को अपने सरकारी बंगले पर बुलाया उनसे बंद कमरे में बात की। निश्चित तौर पर कुछ राजनीतिक बातें भी की होंगी। श्री धनखड़ ने इसी बंगले पर इसी दौर में बंद कमरे में ही अरविंद केजरीवाल और संजय सिंह से लंबी बात की तो आप समझ सकते हैं कि इस सूचना के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के दिल पर क्या बीती होगी । कुछ लोग कहते हैं कि सत्यपाल मलिक की तरह राजनीति करने के प्रयास करते दिख रहे धनखड़ कांग्रेस के नजदीक आने को मजबूर होने वाले हैं। कांग्रेस विशेष कर राहुल गांधी जो आज भी भारतीय जनता पार्टी के लिए सिर दर्द बने हुए हैं धनखड़ के माध्यम से उन लोगों के नाम और उनकी कारस्तानियों का पता लगाने की कोशिश कर सकते हैं जो है तो कांग्रेस में लेकिन काम करते हैं भाजपा के लिए। राहुल गांधी अपने तरीके से धनखड़ से बहुत कुछ मालूम और हासिल कर सकते हैं । जानकार कहते हैं कि यह बात जल्दी ही सामने भी आ जाएगी ।अब सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि क्या धनखड़ अपने समुदाय मतलब जाटों से और किसानों को मौजूदा प्रकरण की सच्चाई बताने की कोशिश करेंगे। मतलब कोई प्रेस कांफ्रेंस करने की हिम्मत जुटा पाएंगे या नहीं।आज यह बहुत महत्वपूर्ण सवाल बना हुआ है। यह दोनों वर्ग हर हाल में सच्चाई जानना चाहते हैं और दोनों वर्ग अब कांग्रेस के नजदीक भी नजर आ रहे हैं इस अवस्था का लाभ श्री धनखड़ को राजस्थान में विशेष तौर पर मिल सकता है। श्री धनखड़ की कमजोरी यह है कि लोग जहां उन्हें विद्वान के रूप में देखते हैं वही उन्हें कुछ लोग चापलूस भी मान कर चलते हैं। अब देखते हैं कि श्री धनखड़ राजनीति में सक्रिय होंगे या फिर घर बैठ जाएंगे। लेकिन कांग्रेस निश्चित तौर पर उनसे कुछ ना कुछ हासिल जरूर करना चाहेगी।
अब यह जान लीजिए कि पंजाब में भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष सुनील जाखड़ अब नाम के अध्यक्ष रह गए हैं ।उनके समानांतर पार्टी ने अश्वनी शर्मा को कार्यकारी अध्यक्ष बनाकर एक तरह से जाखड़ को उनकी राजनीतिक हैसियत से रूबरू कराने की कोशिश करनी शुरू कर दी है ।भाजपा पंजाब के अगले विधानसभा चुनाव में नए कलेवर में नजर आ सकती है और सुनील जाखड़ और उनके कांग्रेस विधायक भतीजे एक बार फिर पाशा पलटने की कोशिश करते नजर आ सकते हैं। पता चला है कि पंजाब के ही कुछ लोग कांग्रेस में सुनील जाखड़ के परिवार की उपयोगिता की चर्चा में जुट गए हैं। इस नजरिए से देखा जाए तो सुनील जाखड़ भी कांग्रेस के लिए बहुत कुछ जानने का जरिया बन सकते हैं। आज भी बहुत लोग कांग्रेस को ही भाजपा का विकल्प मानकर चल रहे हैं उन्हें भाजपा के हालात अच्छे नजर नहीं आ रहे हैं । इस मामले में हरियाणा की बात करें तो राजनीतिक पर्यवेक्षक यह है मानने लगे हैं कि भाजपा में शामिल हुए कांग्रेस के नेता कुलदीप बिश्नोई का भी एक तरह से भाजपा में दम घुट रहा है। यदि वह भाजपा छोड़ने का फैसला लेंगे तो एक बार फिर उनका डेस्टिनेशन कांग्रेस ही हो सकता है।
लेकिन कुलदीप बिश्नोई का परिवार विदेश में सेटल होने की मुद्रा में नजर आने लगा है। उनके दोनों पुत्रों के एक एक पुत्र का जन्म यूएसए में हुआ है । उन दोनों को अमेरिका की नागरिकता मिलने में कोई दिक्कत नहीं आएगी। कुछ लोगों को कुलदीप बिश्नोई भाजपा से नाराज और दूर जाते दिख रहे हैं परंतु अभी यह संभव नजर नहीं आ रहा इसके पीछे कई कारण बताए जा रहे हैं।कई नेताओं की बॉडी लैंग्वेज के कारण भी कांग्रेस में उत्साह का संचार हो सकता है।

