
धर्मपाल वर्मा
दक्ष दर्पण चण्डीगढ़।
भारत ही नहीं पूरी दुनिया उस समय हैरान रह गई जब भारत और पाकिस्तान के बीच शनिवार (10 मई) को संयुक्त राज्य अमेरिका के हस्तक्षेप के बाद चीज फायर की घोषणा हुई परंतु सहमति के कुछ ही घंटों बाद पाकिस्तान ने सीजफायर का उल्लंघन कर भारत में जम्मू कश्मीर, पंजाब तथा राजस्थान के कई ठिकानों पर गोलीबारी शुरू कर दी। इस मामले में विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान पाकिस्तान से इन उल्लंघनों और स्थिति से गंभीरता और जिम्मेदारी के साथ निपटने का आह्वान किया। एक बात शीशे की तरह साफ है कि संघर्ष के इन 4 दिनों में भारत ने पाकिस्तान की बुरी गति बना दी थी। भारतवर्ष की ताकत को दुनिया ने देखा और समझा कि उसकी तीनों सेना कितनी पेशेवर और सक्षम है। प्रक्षेपास्रों का सफल प्रक्षेपण और दुश्मन देश की मिसाइल्स को शत प्रतिशत इंटरसेप्ट करने का रिकॉर्ड भारत के नाम हो चुका है ।उसकी इस उपलब्धि ने विरोधियों के पसीने छुड़ा दिए हैं। चीन जिसके हथियारों का पाकिस्तान युद्ध में प्रयोग कर रहा था, ने भी यह समझ लिया होगा कि सीजफायर की घोषणा करने से पहले भारत ने पाकिस्तान की कमर तोड़ने काम काम कर दिया।
लोगों ने मीडिया में पढ़ा है कि भारतीय वायुसेना ने बीते 4 दिनों में पाकिस्तान के लाहौर स्थित एयर डिफेंस सिस्टम को खत्म कर दिया. इसके अलावा उसके 3 एयरबेस पर ताबड़तोड़ हमला कर उनके हौसले पस्त कर दिए. उनके राडार सिस्टम को खत्म कर दिया । यही कारण था कि पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ माफी मांगने लगे और सीज फायर की अपील करते नजर आए ।
भारत ने पाकिस्तान के जिन चार एयरबेस को निशाना बनाया, इनमें मुरीद,चकवाल, , नूर खान एयरबेस, रहीम यार खान और रफीकी एयरबेस (पंजाब) शामिल थे। भारत के एयर डिफेंस सिस्टम S-400 ने पाकिस्तान के हवाई हमलों को निष्क्रिय कर दिया। चार दिन के इस संघर्ष में भारत के इस सिस्टम को एक कारगर हथियार के रूप में देखा गया। यह भी एक वजह थी जिसके कारण पाकिस्तान काफी डर गया. इस बीच शनिवार दोपहर 3:35 बजे पाकिस्तान DGMO का भारत के DGMO का कॉल आया. दोनों के बीच सहमति बनी कि कोई हमला न हो। हालांकि, 12 मई को फिर से दोनों देशों के DGMO बात करेंगे।
भारत ने ऑपरेशन सिंदूर के तहत पाकिस्तान और POK में स्थित 9 आतंकी ठिकानों पर हमला कर उनके 100 आतंकियों को मार दिया। आपको एक बात बता दें कि युद्ध विराम की सहमति के बाद भी पाकिस्तान ने इसका उल्लंघन किया तो इससे भारत को दो खास लाभ हुए हैं। एक यह की पूरी दुनिया ने यह मान लिया कि पाकिस्तान विश्वसनीय देश नहीं है। अब भारत इस स्थिति में आ गया है कि भविष्य में पाकिस्तान से कोई गलती हुई तो वह सभी देशों को यह कहने की स्थिति में आ गया है कि आप बीच में ना आए अब पाकिस्तान से हम खुद निपटेंगे । ऐसी स्थिति ए भी तो पाकिस्तान के पक्ष में बहुत देश खड़े ही नहीं होंगे। इस युद्ध से चीन को यह समझ में आ गया है कि भारत अब उसका भी मुकाबला करने की ओर अग्रसर हो रहा है और उसकी गिनती अमेरिका रूस चीन के बाद दुनिया की चौथी महाशक्ति के रूप में होने लगी है। जहां तक अमेरिका का सवाल है उसकी समझ में एक बात जरूर आ गई होगी कि पाकिस्तान का पक्ष लेना उसके लिए कभी भी लाभदायक नहीं रहेगा। इस चक्कर में उसके भारत के साथ संबंध खराब हो जाएंगे।
भारत-पाकिस्तान में सीजफायर की घोषणा सबसे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ही सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर एक पोस्ट के जरिए की थी।उन्होंने लिखा कि अमेरिका की मध्यस्थता में एक लंबी रात तक चली बातचीत के बाद, मुझे यह घोषणा करते हुए खुशी हो रही है कि भारत और पाकिस्तान पूर्ण और तत्काल युद्धविराम पर सहमत हो गए हैं. हालांकि, भारत ने सीजफायर के लिए अपनी शर्त भी रखी, जिसको अमेरिका ने माना. इससे पहले भारत ने साफ शब्दों में कह दिया था कि अगर सीमा पार से कोई भी हमला होता है तो उसे एक्ट ऑफ वॉर माना जाएगा।
वहीं भारत के हमले को देखकर पाकिस्तानी रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ अमेरिका को फोन लगाकर सीजफायर की मांग करने लगे, जिसके बाद मार्को रोबियो ने भारत कॉल लगाकर सारी बात बताई और सीजफायर पर सहमति मांगी.
पाकिस्तानी सेना ने मानी हमले की बात
पाकिस्तानी सेना के प्रवक्ता जनरल अहमद शरीफ चौधरी ने यह स्वीकार किया कि भारत ने इन तीन एयरबेसों पर फाइटर जेट्स के माध्यम से एयर-टू-सर्फेस मिसाइलों से हमला किया है. उन्होंने इसे आक्रामक कार्रवाई करार दिया, लेकिन उन्होंने नुकसान के स्तर को सार्वजनिक नहीं किया. हालांकि सूत्रों के अनुसार, रनवे, हैंगर और ड्रोन संचालन इकाइयों को भारी क्षति पहुंची है।
