जुबैर खान
दक्ष दर्पण
नूंह ।
नूंह रमजान के महीने को सब्र का महीना कहते हैं। यह पवित्र महीना हमें अल्लाहताला की इबादत करना सिखाता है। रमजान का महीना हमें प्यार, त्याग, भलाई व भाईचारे का संदेश भी देता है। रमजान का महीना अल्लाहताला की इबादत व बुराइयों को छोड़ने का महीना है। इस माह से अल्लाह का नूर बरसाता है। रमजान सिखाता है कि लोगों से मोहब्बत करें। एक दूसरे के सुख-दुख मे शरीक हों और किसी से झगड़ा व गलत बात ना करें। रमजान माह में हम सभी को बुरे कामों से तौबा करनी चाहिए। अगर इस माह में कोई भी बुरे काम करता है तो अल्लाह का उस पर कहर गिरता है। इस महीने में गरीबों व बेसहारा की हर मुसलमान को मदद करनी चाहिए। रमजान में रोजेदारों को गर्मी के कारण थोड़ी दिक्कत आती है, लेकिन रोजा रखने के बाद एक बेहतर अनुभव होता है। रमजान के पाक महीने में हमें क्षेत्र में अमन व शांति की दुआ मांगनी चाहिए। देश में अमन-शांति होगी तभी हम और हमारा मुल्क उन्नत होगा।
इरशाद खान बीरसीका का कहना है कि रमजान के महीने को खुदा की इबादत का महीना कहते हैं। इस महीने के दौरान जो रोजा रखता है, उसे सत्तर गुणा खुदा की इबादत का लाभ मिलता है। रमजान के मुताबिक निर्धारित समय में कुछ न खाना और न ही कुछ पीना होता है। इससे स्वास्थ्य के ऊपर अच्छा प्रभाव पड़ता है। रमजान के महीने में सबको इन बातों से सबक लेना चाहिए।

