
धर्मपाल वर्मा
दक्ष दर्पण समाचार सेवा dakshdarpan2024@gmail.com
चण्डीगढ़: लोकसभा के चुनाव के बाद कांग्रेस के कुछ नेताओं ने भाजपा को निशाना बनाते हुए एक नारा दिया था कि लोकसभा में हाफ विधानसभा में साफ। देखा जाए तो भाजपा के लोग अब यह कहने की स्थिति में आ गए हैं कि कांग्रेस मैं केवल साफ हो गई है बल्कि उसके भविष्य पर भी सवाल खड़े हो गए हैं। अब एक सवाल यह उठ रहा है कि लोकसभा चुनाव की तरह विधानसभा के चुनाव में भी आम आदमी पार्टी का कांग्रेस से गठबंधन हो गया होता तो भी हरियाणा में भाजपा की ही सरकार बनती। क्योंकि आंकड़े यह बता रहे हैं कि भारतीय जनता पार्टी के 48 की बजाय 46 विधायक बनकर आते। लेकिन गठबंधन हुआ होता तो मौजूदा समय विधानसभा में इंडियन नेशनल लोकदल का शायद खाता नहीं खुलता। परंतु इंडियन नेशनल लोकदल के दो युवा नेताओं आदित्य देवीलाल और अर्जुन सिंह चौटाला के भाग्य में 2024 में विधायक बनना लिखा था।
यदि यह उलटफेर हुआ होता तो फिर भी कांग्रेस की नहीं भाजपा की ही सरकार बनती।
यह समझने की बात है कि कैसे भाजपा के 46 और कांग्रेस के 41 विधायक जीतकर आने के हालात बन सकते थे । लेकिन एक बात साफ है कि आम आदमी पार्टी और कांग्रेस का गठबंधन हुआ होता तो शायद हरियाणा विधानसभा में इंडियन नेशनल लोकदल का एक भी विधायक जीत कर नहीं आता। आप आदमी पार्टी के उम्मीदवारों को जो वोट मिले हैं इसकी कैलकुलेशन की जाए तो स्थिति समझ में आ सकती है। फिर हम कह सकते हैं कि इस स्थिति में भी असंध विधानसभा क्षेत्र कांग्रेस के शमशेर सिंह गोगी चुनाव जीत सकते थे और भारतीय जनता पार्टी के योगेंद्र राणा हार सकते थे। उदाहरण के तौर पर असंध विधानसभा क्षेत्र में कांग्रेस के उम्मीदवार श्री गोगी 2306 मतों से हारे हैं जबकि आम आदमी पार्टी के उम्मीदवार को 4290 मत प्राप्त हुए हैं । इससे इससे समझा जा सकता है कि गठबंधन हुआ होता तो 4290 वोट जो आम आदमी पार्टी को मिले हैं यह कांग्रेस के शमशेर सिंह जोगी को मिल सकते थे और वह चुनाव जीत सकते थें। इसी तरह डबवाली में कांग्रेस के उम्मीदवार अमित सिहाग 610 वोटो से हारे हैं जबकि आम आदमी पार्टी के डबवाली के उम्मीदवार को 66 06 वोट मिले हैं । आम आदमी पार्टी के उम्मीदवार 4 विधानसभा क्षेत्रों में इस स्थिति में रहे हैं कि उन्हें निर्णायक माना जा सकता है। मतलब उन्हें जो वोट मिले हैं वह हार जीत के अंतर से ज्यादा हैं। माना यह जा रहा है कि यदि गठबंधन हुआ होता तो यह है वोट जो आम आदमी पार्टी के उम्मीदवारों को मिली है कांग्रेस के उम्मीदवारों को मिल सकती थी और कम से कम उनका बेड़ा पार हो सकता था । लेकिन यदि ऐसा हो भी जाता तो इससे भाजपा के दो उम्मीदवारों की जीत ही हार में बदल सकती थी। यह दो विधानसभा क्षेत्र हैं दादरी और असंध। यदि ऐसा हुआ होता तो भी सरकार भारतीय जनता पार्टी की ही बनती उदाहरण के तौर पर दादरी और असंध ही ऐसे विधानसभा क्षेत्र हैं जहां भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार जीते हैं और जहां आम आदमी पार्टी के उम्मीदवारों को जीत के अंतर से ज्यादा मत प्राप्त हुए हैं। डबवाली से इंडियन नेशनल लोकदल के आदित्य देवीलाल 610 मतों से विजय हुए और उन्होंने कांग्रेस के अमित सिहाग को हराया। डबवाली में आम आदमी पार्टी के उम्मीदवार कुलदीप गदराना को 6606 वोट मिले हैं। गठबंधन हुआ होता तो इंडियन नेशनल लोकदल के आदित्य देवीलाल शायद चुनाव नहीं जीत पाते और यह सीट कांग्रेस के खाते में चली जाती। इनेलो की जीती गई दूसरी सीट रानियां है। यहां इंडियन नेशनल लोकदल के उम्मीदवार अर्जुन चौटाला 4191 मतों से जीते हैं उनका मुकाबला कांग्रेस के उम्मीदवार से था जबकि आम आदमी पार्टी के उम्मीदवार को रनिया में 4697 वोट मिले हैं ।ऐसे में कांग्रेस की जीत की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। यदि ऐसा हुआ होता तो आम आदमी पार्टी के कारण ही इंडियन नेशनल लोकदल की जीत हार में बदल सकती थी। आप जानते हैं कि इंडियन नेशनल लोकदल दो सीटों पर ही जीत हासिल कर पाया है।यदि गठबंधन हुआ होता तो आप मान कर चले कि ऊपर का माल नीचे और नीचे का माल ऊपर भी हो सकता था परंतु इससे भाजपा के सत्ता में आने में कोई संदेह नहीं था।
यह उलट फेर हरियाणा में ऐसी स्थिति पैदा कर सकता था कि भाजपा के 46 कांग्रेस को 41 निर्दलीय तीन विधायक जीतकर आते और जेजेपी आम आदमी पार्टी और बसपा की तरह इंडियन नेशनल लोकदल का खाता भी नहीं खुल पाता। लेकिन राजनीति में भाग्य को भी निर्णायक मानकर चलना चाहिए। यह भाग्य ही है कि रामकुमार गौतम सफीदों चुनाव जीत गए चौधरी भजनलाल का पोता आदमपुर में भी हार गया। हरियाणा का वित्त मंत्री एक बार फिर चुनाव नहीं जीत पाया। कितने वर्षों के बाद कांग्रेस का नारनौंद मे खाता खुल गया। अभय सिंह चौटाला ऐलनाबाद से ही चुनाव हार गए। 70 सीट जीतने का दावा करने वाली कांग्रेस पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष उदयभान भी चुनाव हार गए। पूर्व सांसद और कांग्रेस के उम्मीदवार बृजेंद्र सिंह 40 से भी काम वोटो से हार गए। उचाना का भाजपा विधायक पार्टी में खास हो गया है। अपनी पार्टी बनाकर मुख्यमंत्री बनने का सपना ले रहे निर्दलीय विधायक बलराज कुंडू सहित एक भी निर्दलीय विधायक विधानसभा नहीं पहुंचा है।
