
धर्मपाल वर्मा
दक्ष दर्पण समाचार सेवा dakshdarpandaily@gmail.com
चण्डीगढ़ ।
कालका विधानसभा क्षेत्र में भारतीय जनता पार्टी की उम्मीदवार शक्ति रानी शर्मा के लिए मौजूदा चुनाव एक बड़ी चुनौती के रूप में सामने आ रहा है। चुनाव की इन चुनौतियों से पार पाना आसान नहीं है। लेकिन चुनावी प्रबंधन भाजपा उम्मीदवार के काम आ सकता है। अभी तक ऐसा माना जा रहा है कि कालका में सबसे अधिक निर्णायक भूमिका में माने-जाने वाले ब्राह्मण मतदाता ,इस क्षेत्र के राजपूत मतदाता और दलित मतदाताओं के एकतरफे से सहयोग के बिना शक्ति रानी शर्मा चुनाव नहीं जीत पाएंगी। भाजपा उम्मीदवार को इन परिस्थितियों में भी ब्राह्मण मतदाताओं का एक तरफा सहयोग और समर्थन नहीं मिला तो इसे उनकी बड़ी कमजोरी समझ लिया जाएगा क्योंकि उम्मीदवार खुद ब्राह्मण है और भारतीय जनता पार्टी का प्रदेश अध्यक्ष ब्राह्मण है। वह कालका से एक राष्ट्रीय दल की टिकट पर चुनाव लड़ रही है और 2014 में भी कालका से ही चुनाव लड़कर देख चुकी हैं।
भारतीय जनता पार्टी की उम्मीदवार शक्ति रानी के लिए एक चुनौती यह भी है कि इस समय राजपूत मतदाता पहले की तरह बीजेपी को समर्थन करता नहीं दिख रहा है। इससे पहले राजपूत मतदाताओं के बारे में आम राय यह थी कि क्योंकि देश में कई मुख्यमंत्री राजपूत हैं देश का रक्षा मंत्री राजपूत है इसलिए राजपूत मतदाता भारतीय जनता पार्टी के पक्ष में खुलकर मतदान करता है। परंतु अब यह बात सामने आई है कि राजपूत मतदाता भारतीय जनता पार्टी से दूरी बनाए हुए हैं ।उसकी नाराजगी साफ नजर आ रही है और शायद इसी के दृष्टिगत शक्ति रानी शर्मा ने कालका में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का कार्यक्रम बनवा लिया है। मुख्यमंत्री योगी 30 सितंबर को कालका में एक चुनावी जनसभा को संबोधित करेंगे ।बुधवार को हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री और अब केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल ने कालका पिंजौर में भाजपा उम्मीदवार के पक्ष में कार्यकर्ताओं को संबोधित किया और पंजाबी समुदाय के लोगों की एक बैठक को भी संबोधित करने का कार्यक्रम बनाया । ऐसा माना जा रहा है की कालका विधानसभा क्षेत्र के पंजाबी मतदाता भाजपा के पक्ष में मतदान कर सकते हैं। इसी कारण भाजपा शहरों में मजबूत नजर आ रही है। कांग्रेस के नेता भी वहां भाजपा को मजबूत मानकर चल रहे हैं ।
लेकिन जहां तक देहात का सवाल है वहां कांग्रेस की मजबूती साफ नजर आ रही है।। भारतीय जनता पार्टी देहात में ही कांग्रेस से मार खायेगी, इसमें कोई संदेह नहीं है लेकिन कालका विधानसभा क्षेत्र में पिछड़े वर्ग के मतदाता काफी संख्या में है यदि इनका एक तरफा समर्थन भारतीय जनता पार्टी को जाता है तो कालका में चुनाव काफी रोचक हो जाएगा।
जहां तक कांग्रेस का सवाल है जहां एक तरफ कांग्रेस के समर्थक प्रत्याशी की स्थिति को बहुत मजबूत मानकर चल रहे हैं वहीं कांग्रेस में ही यह मानने वाले भी कम नहीं है कि उम्मीदवार प्रदीप चौधरी को कांग्रेस के पुराने लोग अपेक्षा अनुरूप सपोर्ट नहीं करेंगे। उनका दिखावा और हो सकता है और व्यावहारिकता कुछ और। कांग्रेस के उम्मीदवार को एक बात का लाभ और मिल रहा है कि पूरे हरियाणा में एक प्रचार यह है कि कांग्रेस की सरकार बनने जा रही है। ऐसे में चुनाव के अंतिम दौर में कालका में कोई भी स्थिति बन सकती है।
वैसे जानकारों का यह दावा है कि कांग्रेस के अधिकांश सिटिंग एमएलए चुनाव में फंसे हुए हैं। कालका में जैसी स्थिति होगी इसका असर आसपास की कई सीटों पर भी जा सकता है। कालका में भारतीय जनता पार्टी की उम्मीदवार को बाहरी उम्मीदवार के रूप में देखा जा रहा है । यद्यपि उनके समर्थक उन्हें बाहरी नहीं भारी उम्मीदवार बता रहे हैं लेकिन कांग्रेस के उम्मीदवार प्रदीप चौधरी को लोकल होने का लाभ भी मिल रहा है।
कुल मिलाकर भारतीय जनता पार्टी के लिए कालका विधानसभा क्षेत्र के चुनाव को एक बड़ी चुनौती के रूप में देखा जा रहा है ।यदि शक्ति रानी चुनाव हारती है तो उनके परिवार की राजनीति बुरी तरह से प्रभावित होगी। क्योंकि इससे उनको कालका से ही दो चुनाव हारने का टैग लग जाएगा। भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार के चुनाव में मैनेजमेंट की भारी कमी देखी जा रही है। लोग कहते हैं कि यहां कुछ ऐसे मतदाता भी हैं जो उनसे पैसे भी ऐंठ लेंगे और वोट भी किसी और उम्मीदवार को दे देंगे। कालका में भाजपा की उम्मीदवार के लिए अगले चार दिन बहुत महत्वपूर्ण होने जा रहे हैं।
भाजपा की उम्मीदवार के लिए सुखद खबर यह है कि उन्हें पिछड़े वर्ग के मतदाता बड़ी संख्या में वोट डालते नजर आ रहे हैं ।इसके बावजूद कालका में चुनाव जीतने को उनके लिए बड़ी चुनौती के रूप में देखा जा रहा है।
