
अशोक कुमार कौशिक
दक्ष दर्पण समाचार सेवा
रावण के मर्दन के बाद भगवान श्रीराम जब वापस सीता और लक्ष्मण के साथ अयोध्या लौटे तो उसके कुछ ही समय बाद उन्हें रावण के पराक्रमी भाई सहस्रानन से युद्ध करना पड़ा. उस युद्ध में सहस्रानन ने राम समेत उनकी सेना को छिन्न-भिन्न कर दिया था. इस प्रसंग का वर्णन अदभुत रामायण में है. ये संस्कृत भाषा में रचित 27 सर्गों का काव्य विशेष है. इस ग्रन्थ के प्रणेता ‘वाल्मीकि’ थे. लेकिन ग्रन्थ की भाषा और रचना से ऐसा प्रतीत होता है कि बाद में ‘अद्भुत रामायण’ की रचना की गई.
क्यों मुस्कुराने लगी थीं सीता
दरअसल राज्याभिषेक होने के उपरांत जब मुनिगण राम के शौर्य की प्रशंसा कर रहे थे तो सीता जी मुस्कुरा उठीं. इस मुस्कुराहट में रहस्य था. जब राम ने सीता जी से हँसने का कारण पूछने पर उन्होंने जो जवाब दिया, उससे श्रीराम को एक और युद्ध की तैयारी करनी पड़ी.
तब सीता ने सहस्रानन का जिक्र किया
सीता ने राम के पूछने पर बताया कि आपने केवल ‘दशानन’ (रावण) का वध किया है, लेकिन उसी का भाई सहस्रानन अभी जीवित है. उसकी हार के बाद ही आपकी जीत और शौर्य गाथा का औचित्य सिद्ध हो सकेगा. ये सुनने के बाद श्रीराम ने अपनी चतुरंग सेना सजाई. उनकी इस सेना में विभीषण, लक्ष्मण, भरत, शत्रुघ्न, हनुमान आदि सभी थे.
