
दक्ष दर्पण
चण्डीगढ़।
देश के प्रख्यात समाजसेवी शशिकांत कौशिक बेशक राजनीति में है लेकिन उनका सामाजिक और धार्मिक दृष्टिकोण इतना व्यापक और उदार है कि लोग उन्हें दानवीर कर्ण कह सम्मान देते हैं। श्री कौशिक का यह विचार न केवल सार्थक है बल्कि व्यावहारिक भी है की दान देने से धन घटता नहीं बढ़ता है। वह कहते हैं कोई भी हो यह कर के देख ले ।
‘तुम एक हाथ से दोगे तो परमपिता परमात्मा इसी धन को तुम्हें असंख्य हाथों से कई गुणा करके बक्शेगा । मूल मंत्र और मतलब यह कि तुम एक पैसा दोगे, वह 10 लाख देगा। हाथ से दान करने की नीयत होनी चाहिए। दान हमेशा फलता है। यही कारण है कि समाज और जरूरतमंदों के लिए मदद सहायता और दान देने के मामले में शशिकांत कौशिक बहुत उदार हैं। जन सेवा हो, गौ सेवा हो, किसी तरह की समाज सेवा हो ,संतों और साधुओं की सेवा हो ,धर्म स्थलों का सवाल हो, शशिकांत कौशिक दान और धर्म के मामले में कभी पीछे नहीं रहते और बड़े और उदार दृष्टिकोण से समाज सेवा करते रहते हैं। उनका इस मामले में मूल मंत्र यही है कि सेवा ही सबसे बड़ा धर्म है।
वह समय-समय पर तरह-तरह से दान, सेवा और सहयोग करते रहते हैं।
इसी महीने उन्होंने दिल्ली जाकर उस समय अवर्णनीय सेवा की जब भामाशाहों की संस्था महाराजा अग्रसेन हॉस्पिटल चैरिटेबल ट्रस्ट पंजाबी बाग को 25 लाख रुपए दान राशि भेंट किए। उनके इस जज्बे को उपस्थित अग्रवाल समाज ने दिल की गहराइयों से सम्मान दिया। 2 मार्च को आयोजित इस कार्यक्रम में नई दिल्ली क्षेत्र के बड़े-बड़े व्यापारी, संबंधित ट्रस्ट के ट्रस्टी विशेष तौर पर उपस्थित थे इनमें उद्योगपति और आम आदमी पार्टी के नेता पूर्व सांसद सुशील गुप्ता विशेष तौर पर शामिल हुए। शशिकांत कौशिक द्वारा शशिकांत कौशिक चैरिटेबल ट्रस्ट के नाम से दी गई यह राशि चर्चा का विषय रही। प्रचार माध्यमों में शशिकांत कौशिक की यह पहल सुर्खीयों में रही।
इसके एक सप्ताह बाद शशिकांत कौशिक ने कुरुक्षेत्र के मशहूर थीम पार्क में एक कार्यक्रम में यज्ञ सम्राट श्री श्री 1008 हरिओम महाराज जी को 11 लख रुपए की धनराशि दान के रूप में भेंट की ।इस अवसर पर उनके साथ हरियाणा प्रदेश भाजपा के अध्यक्ष मोहनलाल बडोली भी यजमान के रूप में उपस्थित थे।
बता दे कि भारतीय जनता पार्टी में सक्रिय शशिकांत कौशिक समालखा विधानसभा क्षेत्र के गांव चुलकाना से ताल्लुक रखते हैं और अपनी आय का बड़ा हिस्सा दान देते रहते हैं। उन्होंने गांव में अपना पुश्तैनी मकान भी जनता के लिए समर्पित कर दिया है। उन्होंने लगातार दो बार भाजपा की टिकट पर समालखा विधानसभा के चुनाव लड़े लेकिन 2019 में थोड़े से मतों के अंतर से हार गए । 2024 के चुनाव में उन्हें पार्टी ने टिकट नहीं दिया तो इस पर उन्होंने ऊफ तक नहीं की और पार्टी के लिए काम किया। श्री कौशिक कहते हैं कि टिकट पर केवल मेरा ही अधिकार नहीं है ।पार्टी ने मुझे दो बार मौका दिया। टिकट नहीं मिलने का उन्हें कोई मलाल नहीं है। वह कहते हैं कि सारी चीजें सबको कभी नहीं मिलती । उन्होंने कहा वह राजनीति में है परंतु चुनावी राजनीति को बहुत ज्यादा अहमियत नहीं देते। पार्टी टिकट देती तो चुनाव लड़ लेते नहीं दी तो कोई बात नहीं। शशिकांत कौशिक छात्र-छात्राओं के कल्याण उनके रोजगार, सामाजिक सुरक्षा और उनके सर्वांगीण विकास के लिए भी प्रयासरत रहते हैं इसके लिए वह विशेष तौर पर जाने जाते हैं।
