
धर्मपाल वर्मा
दक्ष दर्पण (पॉलिटिकल डेस्क )
चंडीगढ़। 2024 के लोकसभा के आम चुनाव को लेकर सतारूढ़ भारतीय जनता पार्टी सबसे ज्यादा पॉलिटिकल एक्सरसाइज करती नजर आ रही है। पार्टी के नेता लगातार तीसरी बार सरकार बनाने की अपनी योजना पर पूरे देश में भाजपा शासन के 9 वर्ष पूरे होने और विकास कार्यों तथा उपलब्धियों को लेकर योजनाबद्ध जनसंपर्क चला रहे हैं। इसी परिपेक्ष में हरियाणा की बात की जाए तो भारतीय जनता पार्टी के नेता एक बार फिर 10 का दम दिखाने का दावा करते हुए यह साबित करने में लगे हैं कि हरियाणा प्रदेश भारतीय जनता पार्टी के लिए बहुत महत्वपूर्ण प्रदेश है। बेशक भाजपा की लोकसभा के चुनाव की डगर थोड़ी कठिन बताई जा रही है लेकिन केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह इस मामले में हरियाणा के मामले अपने हाथ में लेकर चल रहे हैं और उनकी रणनीति यह दर्शा रही है कि पार्टी हरियाणा में किसी से गठबंधन की बजाय 10 की 10 सीटों पर खुद चुनाव लड़ेगी। भारतीय जनता पार्टी के समर्थक एक लाइन में बात समाप्त करते हुए कहते हैं कि भारतीय जनता पार्टी का एकमात्र सीट रोहतक पर ही मुकाबला नजर आता है बाकी सीटों पर एक बार फिर 2014 की तरह जो सीटों पर भाजपा का ही दबदबा है।
लेकिन इन्हीं लोगों में यह कहने वाले भी बहुत है कि पार्टी आला कमान इस बार हरियाणा में लोकसभा चुनाव की टिकट एक योजना के तहत बाटेगी।

ठेकेदार जय सिंह भारतीय जनता पार्टी
ऐसा लगता है कि पार्टी के नेता दो सांसदों केंद्रीय मंत्री राव इंद्रजीत सिंह और कृष्ण पाल गुर्जर से ही यह पूछने की जरूरत महसूस कर सकती है कि बताओ आप चुनाव खुद लड़ेंगे या किसी और को लड़ाएंगे। बाकी 8 सीटों पर किसे चुनाव लड़ाना है इसकी खबर भाजपा के मौजूदा सांसदों को भी शायद ही हो पाएंगी।
हरियाणा में भारतीय जनता पार्टी एक बात अच्छी तरह से जान चुकी है कि जाट मतदाता भाजपा से पहले से भी ज्यादा नाराज हैं और यह भी कि जाटों के बिना उसका काम भी नहीं चल आएगा। बताया जा रहा है कि ऐसे में भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने लोकसभा के चुनाव में कई सीटों पर नए उम्मीदवारों को मैदान में उतरने की रणनीति पर काम करना शुरू कर दिया है। मजे की बात यह है कि पार्टी जहां हिसार लोकसभा क्षेत्र में किसी गैर जाट प्रत्याशी को मैदान में उतरने की योजना पर कम कर रही है वहीं सोनीपत जैसे देशवाली जाटों के गढ़ में जाट प्रत्याशी पर दाव खेलने की रणनीति बन रही है वह भी उस स्थिति में जब सोनीपत से ब्राह्मण प्रतिनिधि के रूप में रमेश चंद्र कौशिक लगातार चुनाव जीतते आ रहे हैं। यहां यह बताना जरूरी है कि पार्टी की नई रणनीति के तहत कई मौजूदा सांसदों को उनके निर्वाचन क्षेत्र में विधानसभा का चुनाव लड़ाया जा सकता है। ऐसा सोनीपत के सांसद रमेश चंद्र कौशिक के मामले में भी संभव है। एक बात और उभर कर सामने आ रही है कि पार्टी ब्राह्मण को तो टिकट दे सकती है लेकिन यह अगला ब्राह्मण उम्मीदवार रमेश चंद्र कौशिक नहीं कोई और होगा इस मामले में सबसे ज्यादा चर्चा राई के भाजपा के विधायक और पार्टी के प्रदेश महामंत्री मोहनलाल बडोली की है। इस मामले में ओलंपियन योगेश्वर दत्त के नाम पर भी विचार संभव है।

कृष्णा गहलोत पूर्व मंत्री
भारतीय जनता पार्टी
सोनीपत भाजपा और अमित शाह के लिए कई मामलों में महत्वपूर्ण है ।यही कारण है कि लोकसभा चुनाव की तैयारी के लिए उन्होंने सबसे पहला कार्यक्रम सोनीपत जिले के गोहाना कस्बे में रखा था परंतु वे इस कार्यक्रम में नहीं पहुंच पाए थे।
जननायक जनता पार्टी ने भी चुनाव के लिए जनसंपर्क की अपनी पहल सोनीपत लोकसभा क्षेत्र से ही की है इसे राजनीतिक दृष्टि से समझना जरूरी है।
सोनीपत जैसे लोकसभा क्षेत्र में जाट उम्मीदवार को टिकट देने की भाजपा के नेताओं की कथित सोच के पीछे की परिकल्पना यह है कि इससे उसे जाट मतदाताओं की सहानुभूति बटोरने में मदद मिलेगी और उम्मीदवार के कारण भाजपा को जाटों की पहले से ज्यादा वोट मिलने की संभावना होगी।भाजपा नेतृत्व का मानना है कि सोनीपत से कांग्रेस ही नहीं जेजेपी और इंडियन नेशनल लोकदल के पास भी जाट उम्मीदवार को मैदान में उतारने के अलावा कोई चारा नहीं है ।ऐसे में जाट मतदाताओं में मत विभाजन तो होगा ही, भाजपा के जाट उम्मीदवार के कारण पार्टी को पहले की तुलना में जाट मतदाताओं के ज्यादा वोट मिल सकेंगे।
यह माना जा रहा है कि यदि गैर जाटों में स्वीकार्य अच्छी छवि के साधन संपन्न सकारात्मक प्रवृत्ति के किसी ऐसे जाट को मैदान में उतार दिया जाए जिनका ताल्लुक गोहाना क्षेत्र से हो, तो इसके अच्छे परिणाम सामने आ सकते हैं। भाजपा के नेता इस बात पर विशेष तौर पर गौर कर रहे हैं कि सोनीपत के अधिकांश सांसद इसीलिए गोहाना क्षेत्र से बने हैं कि उन्हें यहां के दो विधानसभा क्षेत्र बरोदा और गोहाना के साथ जींद जिले की साथ लगते तीन विधानसभा क्षेत्रों की भी सहानुभूति प्राप्त हो जाती है । इस विचार से भाजपा के हरियाणा मामलों के प्रभारी विप्लव कुमार देव भी प्रभावित बताए गए हैं। उन्हें बताया गया है कि सोनीपत से संबंधित जींद जिले के तीन विधानसभा क्षेत्रों के मतदाता सोनीपत के दिल्ली से सटे क्षेत्र के उम्मीदवारों की तुलना में गोहाना और बरोदा क्षेत्र के उम्मीदवारों को अपने ज्यादा करीब मानते हैं। जींद जिले के यह तीन विधानसभा क्षेत्र सोनीपत जिले के गोहाना क्षेत्र की सीमा से लगते हैं। यही कारण है कि गोहाना क्षेत्र से ताल्लुक रखने वाले नेता पूर्व सांसद धर्मपाल सिंह मलिक दो बार, किशन सिंह सांगवान तीन बार और कपिल देव शास्त्री एक बार सोनीपत से सांसद बने। भारतीय जनता पार्टी के नेताओं की एक सोच यह भी बताई गई है कि 2019 के लोकसभा के चुनाव में इस जाट बाहुल्य क्षेत्र में सोनीपत से रमेश कौशिक और रोहतक से डॉक्टर अरविंद शर्मा के रूप में दो ब्राह्मण उम्मीदवार भाजपा की टिकट पर लड़े और दोनों सांसद बने । दोनों ने जाटों के दो बड़े नेताओं को हराया। इस बात को सोनीपत और रोहतक क्षेत्र के जाट अब भी दिल से लगाए हुए हैं।ऐसे में भारतीय जनता पार्टी आगामी चुनाव में सोनीपत से जाट उम्मीदवार को मैदान में उतार कर जाटों को मनोवैज्ञानिक तथा भावनात्मक ट्रीटमेंट देना चाहती है। पार्टी के नेता जिस तरह से फोकस करके चल रहे हैं उसमें दो नाम उभर कर सामने आए हैं।
एक है जय सिंह ठेकेदार गोहाना और दूसरी हैं पूर्व मंत्री कृष्णा गहलावत राई( सोनीपत)। कृष्ण गहलावत ने पिछले विधानसभा चुनाव में राई से टिकट मांगी थी परंतु बात नहीं बन पाई थी ।
2014 में वे भाजपा की टिकट पर ही राई से चुनाव हार गई थी। श्रीमती गहलावत इससे पहले सोनीपत से भी लोकसभा के टिकट की प्रबल दावेदार थी परंतु उस समय कांग्रेस छोड़कर भारतीय जनता पार्टी में आए रमेश चंद्र कौशिक टिकट ले आए और उन्हें लगातार दो बार सांसद बनने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। उधर जयसिंह ठेकेदार को भारतीय जनता पार्टी ने 2014 में गोहाना से विधानसभा की टिकट देने की घोषणा कर दी थी परंतु बाद में अचानक उनकी टिकट काटकर पिछड़े वर्ग को प्रतिनिधित्व देने के नाम पर मौजूदा राज्यसभा सांसद रामचंद्र जांगड़ा को दे दी गई थी।
भाजपा के दो संभावित जाट उम्मीदवारों की बात करें तो जय सिंह ठेकेदार का पलड़ा इसलिए भी भारी लगता है कि उनका ताल्लुक गोहाना क्षेत्र से है और वह पहले भी लोकसभा का चुनाव लड़ चुके हैं। गोहाना क्षेत्र के खानपुर कलां और भैंसवाल कला ग्रामीण अंचल में स्थित देश की प्रख्यात शिक्षण संस्थाओं में प्रबंध समिति में महत्वपूर्ण पदों पर रहकर सेवा करने का जय सिंह ठेकेदार का अनुभव उनके लिए एक बड़ी सामाजिक उपलब्धि है इसके अलावा गोहाना बार एसोसिएशन में उनका दबदबा विशेष तौर पर चर्चा में रहता है। ठेकेदार जय सिंह स्वच्छ छवि के मुक्तहस्त से सामाजिक संस्थाओं को दान देने वाले और सामाजिक कार्यों में बढ़-चढ़कर भाग लेने वाले संपन्न व्यक्ति हैं।ऐसा माना जाता है कि पार्टी उन्हें उम्मीदवार बनाती है तो इसके सकारात्मक परिणाम सामने आ सकते हैं। ठेकेदार जय सिंह के लिए गोहाना और बरोदा ही नहीं, इस क्षेत्र के कई बड़े गांवों के प्रमुख लोग भाजपा के पक्ष में चुनाव प्रचार में खुलकर हिस्सा लेंगे, इसमें कोई संदेह नहीं है।
भाजपा के नेता जय सिंह ठेकेदार में एक और गुण यह देखते हैं कि सोनीपत जिले में बड़ा दखल रखने वाले मलिक गोत्र के जाट मतदाता उनके पैतृक गांव कासन्ढी को अपने गोत्र का हिस्सा मानकर चलते हैं। मलिक गोत्र के मतदाताओं की यह सहानुभूति जय सिंह ठेकेदार और भारतीय जनता पार्टी दोनों के काम आ सकती है।
बेशक इस समय जाट भारतीय जनता पार्टी से नाराज नजर आ रहे हैं लेकिन राजनीति में भाजपा के विशेषज्ञ इस बात का दावा कर रहे हैं कि चुनाव आते-आते बहुत चीजें बदल जाएगी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक बार फिर पहले की तरह जन समर्थन प्राप्त होगा। लोग कहते हैं कि जाट भी नरेंद्र मोदी से इतने नाराज नहीं हैं जितने मौजूदा प्रदेश सरकार से हैं ।वह कांग्रेस या राहुल गांधी को मोदी के विकल्प के रूप में नहीं देख रहे हैं। भाजपा समर्थकों का मानना है कि पार्टी का परंपरागत मतदाता थोड़ा बहुत नाराज हो सकता है लेकिन चुनाव के समय उसकी पसंद कोई और दल बिल्कुल नहीं होगा ऐसे में भाजपा को परंपरागत मतदाताओं के साथ पहले से अधिक जाट मतदाताओं का समर्थन प्राप्त हुआ तो फिर सोनीपत में भी भाजपा का प्रत्याशी पहले की तरह चुनाव जीत सकेगा।
जय सिंह ठेकेदार को 2014 में टिकट दी गई फिर वापस ले ली गई फिर जी तोड़ मेहनत तथा प्रयासों के बावजूद 2019 के चुनाव में उनके नाम पर विचार न करके एक नए चेहरे को मैदान में उतार दिया गया। पार्टी के विचारशील नेता इस बात को मन मस्तिष्क में लेकर चल रहे हैं कि 2014 में जय सिंह ठेकेदार की टिकट काटकर जिस उम्मीदवार को दी गई या फिर 2019 में नए चेहरे को उतारा गया दोनों ही चुनाव नहीं जीत पाए ।ऐसे में जय सिंह ठेकेदार किंचित मात्र भी विचलित नहीं हुए और ,पार्टी के लिए तन मन धन से काम करते आ रहे हैं सवाल यह है कि उन्हें मिला क्या है । इसलिए पार्टी के कई नेता जाट उम्मीदवार को टिकट देने के सवाल पर ठेकेदार जय सिंह की वकालत करने में पीछे नहीं है। उन्हें पार्टी के नेता एक सक्षम और मजबूत उम्मीदवार के रूप में देख रहे हैं । उधर जयसिंग ठेकेदार के समर्थक चुनाव में जोर आजमाइश के लिए तैयार बैठे हैं।
सूत्र बता रहे हैं कि भारतीय जनता पार्टी नए उम्मीदवार के रूप में हिसार लोकसभा क्षेत्र से पिछड़े और गैर जाट प्रत्याशी के रूप में हरियाणा विधानसभा के मौजूदा डिप्टी स्पीकर रणबीर गंगवा को मैदान में उतर सकती है। वे जहां दूसरी बार विधायक बने हैं वहीं राज्यसभा के सदस्य भी रहे हैं ।यह भी भाजपा का एक बड़ा गेम प्लान है।
हरियाणा प्रदेश भाजपा के अध्यक्ष ओमप्रकाश धनखड़ की तैयारी भिवानी महेंद्रगढ़ से लोकसभा का चुनाव लड़ने की हो रही है। उनका साथ गुरुग्राम से भाजपा सांसद और केंद्रीय मंत्री राव इंद्रजीत सिंह विशेष तौर पर दे रहे हैं । इन दोनों में गाढ़ी छनती है। भिवानी महेंद्रगढ़ के यादव बाहुल्य चार विधानसभा क्षेत्रों मे राव इंद्रजीत सिंह का जो दबदबा है इसका लाभ ओमप्रकाश धनखड़ उठाना चाहेंगे। बताते हैं कि मौजूदा संसद धर्मवीर सिंह को या उनके पुत्र को तोशाम से विधानसभा की टिकट देने की गारंटी देकर मनाया जाना है।
डॉ अरविंद शर्मा करनाल से भाजपा के प्रत्याशी हो सकते हैं। करनाल के सांसद संजय भाटिया बयान कुछ भी दे रहे हो उनकी रुचि विधानसभा के चुनाव में बताई जा रही है। भारतीय जनता पार्टी सिरसा लोकसभा क्षेत्र में भी नए प्रत्याशी की तलाश कर रही है अंबाला और कुरुक्षेत्र में भी नये उम्मीदवार आ सकते हैं। कुरुक्षेत्र के सांसद नायब सैनी की रुचि फिर से विधानसभा चुनाव में बताई जा रही है । शायद इसी सोच के दृष्टिगत श्री सैनी ने अपनी पत्नी को अंबाला जिला परिषद का चुनाव लड़ाया यह अलग बात है कि वह चुनाव में हार गई।शायद नायब सैनी की जगह हिसार में पिछड़ों को प्रतिनिधित्व देने के लिए रणबीर गंगवा का नाम आगे किया गया है। रोहतक के नए भावी उम्मीदवार को लेकर भाजपा थिंक टैंक कई उम्मीदवारों के नाम पर मंथन कर रहा है, ऐसी खबरें हैं। हिसार की बात करें तो पता चला है कि पार्टी चौधरी वीरेंद्र सिंह के परिवार को उचाना से विधानसभा की टिकट देने की योजना पर काम कर रही है यह टिकट चौधरी वीरेंद्र सिंह की पत्नी प्रेमलता या उनके पुत्र मौजूदा सांसद बृजेंद्र सिंह को दी जा सकती है। बताते हैं कि हरियाणा में भी भाजपा परिवारवाद की अपनी नीति से कोई समझौता नहीं करना चाहती।
