
“एक 34 साल का व्यक्ति जब जीवन में सबकुछ हार गया, उसका बिज़नेस डूब गया, कर्ज़दार हो गया तो वह अपने उन सभी दोस्तों से मुँह छिपाकर जिनसे उसने कर्ज़ लिया था, दूसरे शहर भागकर चला आया और थका हारा एक बगीचे में बैठ गया। वह बहुत रोया, सिसका और सिर घुटने के बल रखकर बैठ गया।
तभी उसके पास 74 साल का एक बूढ़ा व्यक्ति आया और उस बूढ़े व्यक्ति ने उससे पूछा कि क्यों निराश हो? तो उस 34 साल के व्यक्ति ने अपनी पूरी व्यथा सुनाई। बूढ़े व्यक्ति ने जब उसे बताया कि उसका नाम रिचर्ड स्मिथ है तो वह 34 साल का व्यक्ति चौंक गया क्योंकि रिचर्ड स्मिथ उस देश का सबसे अमीर व्यक्ति था और बड़े बड़े राजनीति वाले लोग उसके आगे झुकते थे।
रिचर्ड स्मिथ ने उससे कहा कि तुमपर कितना कर्ज़ है, उस व्यक्ति ने अपना कर्ज़ बताया। तब रिचर्ड स्मिथ ने अपनी जेब से एक बैंक चेक निकाला और उस चेक पर कर्ज से चौगुना Amount भरकर उसे दिया और कहा कि “तुम इस चेक को यूज़ करने से पहले अपनी तरफ से एक कोशिश और करना और अगर फिर भी असफल रहो तो ये चेक यूज़ कर लेना। लेकिन जबतक तुम असफल न हो तबतक इस चेक को देखना नहीं, बगैर देखे अपने पास रख लो।
आगे रिचर्ड स्मिथ ने उससे कहा कि ” मुझे पैसे लौटाने की कोई जरूरत नहीं है।”
34 साल के व्यक्ति ने कहा कि ” आप अपना पता दे दीजिए मैं Thank-you बोलने तो आपके पास आऊँगा।”
रिचर्ड स्मिथ ने कहा ” मैं यही इसी पार्क ने इतने बजे रोज़ आता हूँ तुम यही मिल लेना।”
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34 साल का वह व्यक्ति वापिस अपने शहर गया और उसने उस चेक को संभाल कर रख दिया और खुद से कहा मैं इस चेक को यूज करने से पहले एक आखिरी कोशिश खुद से करता हूँ।
उसने कोशिश शुरू की और धीरे-धीरे सफल हुआ और ठीक एक साल बाद अपने शहर का सबसे सफल बिज़नेसमेन बना।
अब वह व्यक्ति रिचर्ड स्मिथ को धन्यवाद कहना चाहता था सो वो वही चेक लेकर उसी शहर के उसी बगीचे में गया, उसने 1 घण्टा इंतज़ार किया पर रिचर्ड स्मिथ नहीं आए।
जब वह जाने लगा तो उसने देखा बगीचे के दूसरे कोने में रिचर्ड स्मिथ किसी व्यक्ति से बतिया रहे है। वह व्यक्ति छिपकर उनकी बात सुनने लगा।
रिचर्ड स्मिथ उस दूसरे व्यक्ति को भी चेक काट दे रहे थे, तभी 4 लोग भागकर आए और रिचर्ड स्मिथ को जबरदस्ती पकड़कर ले जाने लगे तभी वह व्यक्ति जो सफल बिज़नेसमेन बन चुका था, वो भागकर गया और रिचर्ड स्मिथ को छुड़ाने लगा। उन चार लोगों ने उस व्यक्ति को बताया कि “यह कोई रिचर्ड स्मिथ नहीं है, ये एक पागल व्यक्ति है जो हर रोज़ हॉस्पिटल से मरीज़ों के नाम लिखने वाली डायरी लेकर इस बगीचे में भागकर आता है और सबको बोलता है कि मैं रिचर्ड स्मिथ हूँ ये लो चेक, ये लो चेक। ये रिचर्ड स्मिथ नहीं है ये हमारा मरीज है जो 20 सालो से पागल है।”
जब उस 34 साल के व्यक्ति ने अपनी कोट की जेब मे हाथ डालकर वह चेक निकाला तो उसने पाया कि वह चेक नहीं मरीज़ों के नाम लिखने वाली पर्ची है।
एक पागल व्यक्ति के फ़र्ज़ी कागज़ ने उस व्यक्ति में इतनी आशा भरी कि वह उस फ़र्ज़ी कागज़ के भरोसे सुकून से रहा और उसे यूज़ करने से पहले उसने अपनी आखिरी कोशिश की और सफल रहा।
कहानी ख़त्म हुई।
नोट:- कोशिश करते रहो, हिम्मत न हारो, पता नहीं किस रूप में नारायण मिल जाएगा।
