
धर्मपाल वर्मा
दक्ष दर्पण समाचार सेवा
कालका ।
पंचकूला नगर निगम के चुनाव के बाद जिले में एक बार फिर इसी तरह की गहमा
गहमी देखने को मिलेगी ।आप समझ गए होंगे कि 2027 में कालका नगर परिषद का चुनाव होना है। बेशक यहां अभी चुनाव को लेकर धरातल पर शुरुआत जैसी कोई बड़ी खबर नहीं है लेकिन तीनों प्रमुख राजनीतिक दलों ने इस बारे में सोचना शुरू कर दिया है। कालका नगर परिषद के चुनाव में दो उम्मीदवार एक बार फिर मैदान में आ सकते हैं एक हैं पवन कुमारी शर्मा (भाजपा) और दूसरे हैं घनश्याम टगरा (आम आदमी पार्टी)।
कांग्रेस एक मौजूदा पार्षद या उनके पति और प्रतिनिधि को चुनाव लड़ा सकती है।
सबसे पहले बात करते हैं भाजपा की। वह इसलिए कि इस समय कालका नगर परिषद में भाजपा का बहुमत है ।भाजपा का हस्तक्षेप है मतलब भाजपा का ही अध्यक्ष है। यदि आज की बात की जाए तो विशेषज्ञ यह मानकर चल रहे हैं कि यहां भाजपा इस मामले में इस बार भी कमजोर नहीं है और कांग्रेस के लिए यह चुनाव आसान नहीं है। अभी यहां यही आम राय है।
भाजपा की बात करें तो तीन चीजों की संभावनाएं नजर आ रही है । एक यह कि पार्टी मौजूदा अध्यक्ष कृष्ण लांबा पर फिर से दाव खेलने को तैयार नहीं है। दूसरा कुछ मौजूदा पार्षदों की टिकट कट सकती है ।तीसरा यहां बीजेपी के अध्यक्ष पद के उम्मीदवार के नाम का फैसला कोई और नहीं स्थानीय विधायक शक्ति रानी शर्मा करने वाली हैं। बताया जा रहा है कि शक्ति रानी शर्मा पिछले चुनाव में निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ चुकी पवन कुमारी शर्मा या उनके पति हर्ष चढ़ा को चुनाव लड़ाने की योजना पर काम कर रही है। उनका कोई बयान नहीं आया है लेकिन आम राय यही है। उन्हें सबसे मजबूत उम्मीदवार के रूप में देखा जा रहा है। ब्राह्मण समुदाय की ही एक महिला उम्मीदवार का नाम भी चर्चा में है।
भाजपा संगठन के लोग भी इस बात को स्वीकार करते हैं कि कालका के मामले में वही होगा जिसे विधायक शक्ति रानी शर्मा और उनके सांसद पुत्र कार्तिकेय शर्मा चाहेंगे।
अभी तो यह फैसला होना भी बाकी है कि अध्यक्ष किस वर्ग से होगा महिला होगी या पुरुष।
आप सब जानते हैं कि नगर परिषद कालका के पिछले चुनाव के समय पूर्व विधायक लतिका शर्मा निर्णायक भूमिका मे थी और उनके विवेक पर ही अध्यक्ष पद के उम्मीदवार का फैसला हुआ था । शायद यह भी एक कारण है कि मौजूदा अध्यक्ष को इस बार चुनाव लड़ने का मौका नहीं मिल रहा। लोग मानते हैं कि मौजूदा अध्यक्ष की परफॉर्मेंस भी खास नहीं रही। इसके बावजूद लतिका शर्मा अपने समर्थक उम्मीदवारों को टिकट दिलाने की भरपूर कोशिश करेगी उन्हें पार्टी का प्रदेश उपाध्यक्ष बनाया गया है इस नाते भी उन्हें थोड़ा बहुत प्रतिनिधित्व मिल सकता है।
कांग्रेस की बात करें तो पूर्व विधायक प्रदीप चौधरी ही निर्णायक रहने वाले हैं । सूत्र बता रहे हैं कि वह एक मौजूदा महिला पार्षद या उनके पतिदेव पर दाव खेलने की तैयारी में है। यह चुनाव भी प्रदीप चौधरी की प्रतिष्ठा का सवाल बनने जा रहा है।
आम आदमी पार्टी की कोशिश फिर से पूर्व प्रत्याशी घनश्याम टगरा को अध्यक्ष पद का चुनाव लड़ाने की होगी परंतु टगरा चुनाव लड़ने के मूड में नजर नहीं आ रहे ।
ऐसे में पार्टी को उम्मीदवार के मामले में बड़ी मशक्कत करनी पड़ेगी। पिछले चुनाव में पार्टी को सम्मानजनक मत प्राप्त हुए थे इस बार इसी तरह की पुनरावृत्ति हो पाएगी, ऐसा कठिन लग रहा है। अध्यक्ष का उम्मीदवार तो इंडियन नेशनल लोकदल और बहुजन समाज पार्टी की ओर से भी आएगा लेकिन यह चुनाव अंत में एक बार फिर भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस के बीच ही लड़ा जाएगा। यह सवाल जरूर है कि इस चुनाव में कोई मजबूत निर्दलीय उम्मीदवार भी भाग्य आजमाएगा या नहीं।

