
image साभार
धर्मपाल वर्मा
दक्ष दर्पण समाचार सेवा
नई दिल्ली।
पंजाब की विधानसभा चुनाव के संदर्भ में इस बार भाजपा की रणनीति क्या है इसका असली खुलासा तो चुनाव की घोषणा के वक्त ही हो पाएगा। पहले दो चीज साफ लग रही थी एक यह कि केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह पंजाब के चुनाव में फिर से चाणक्य की भूमिका में होंगे और वह इस सोच के है कि भाजपा बिना गठबंधन के अकेले चुनाव लड़े लेकिन उनकी सोच यह भी है कि भाजपा की तरह शेष सभी राजनीतिक दल भी अकेले चुनाव लड़े। लोग कहने लगे थे कि पंजाब के मामले में भाजपा के दोनों हाथों में लड्डू हैं। वह अकेले भी लड़ सकती है और शिरोमणि काली दल से गठबंधन भी कर सकती है। भाजपा के पंजाब के ही कई नेता यह चाहते हैं कि चुनाव में उनकी पार्टी अकाली दल से गठबंधन करें । वह इस गठबंधन को चुनाव में जीत की गारंटी भी मानते हैं। जानकर यह भी मानकर चल रहे हैं कि गठबंधन की सूरत में भारतीय जनता पार्टी अकाली दल के समक्ष यह प्रस्ताव ला सकती है कि गठबंधन 50-50 सीट फॉर्मूले पर होगा। पंजाब के विशेषज्ञ इस मामले में इस राय के है कि अकाली दल इस प्रस्ताव को भी स्वीकार कर सकता है। आपको बता दें कि जहां भाजपा की प्राथमिकता पंजाब में कांग्रेस को सरकार में आने से रोकने की है वहीं अकाली दल आम आदमी पार्टी की सरकार को चलते करना चाहता है। सरकार किसी की भी बने भगवंत मन की छुट्टी होनी चाहिए मतलब आम आदमी पार्टी की सरकार के सत्ता बाहर होने से है।
पिछले दिनों एक खबर और आई कि भाजपा ने संगठन में जो फेरबदल करना था वह हो गया है ।अब सरकार का स्वरूप बदलने की स्थिति बन रही है मतलब मोदी सरकार में बड़ा फेरबदल किसी भी समय हो सकता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी नए मंत्रिमंडल में भी पंजाब का प्रतिनिधित्व चाहते हैं इसमें एक मंत्री भाजपा का होगा लेकिन एक मंत्री अकाली दल का भी हो सकता है ।
जाहिर है यह सभी संभव होगा जब दोनों दल गठबंधन के मामले में सहमत हो जाएंगे। बता दें कि बदले हुए हालात में भारतीय जनता पार्टी ने शिरोमणि अकाली दल से गठबंधन के सवाल पर नए सिरे से विचार किया है और इस मामले में सकारात्मक समाचार प्राप्त हुए हैं परंतु अब भाजपा की नई शर्त सामने आई है।
बताते हैं कि अकाली दल संग गठबंधन पर एक पेच फंसा हुआ है । भाजपा ने बड़े भाई का रोल मांगा है। यह खबर खास है कि 2027 पंजाब विधानसभा चुनाव से पहले शिरोमणि अकाली दल और बीजेपी के बीच फिर गठबंधन की चर्चा तेज हो गई है! SAD नेताओं ने गठबंधन को पंजाब की जरूरत बताया, जबकि बीजेपी ने साफ किया कि गठबंधन की स्थिति में वह ‘बड़े भाई’ की भूमिका चाहती है! पंजाब को लेकर भारतीय जनता पार्टी कई संभावनाओं पर विचार कर रही है लेकिन पंजाब के कोने-कोने से यह आवाज जरूर आ रही है कि शिरोमणि अकाली दाल और बीजेपी में गठबंधन हो गया तो आम आदमी पार्टी का सुपड़ा साफ हो जाएगा मुकाबला गठबंधन और कांग्रेस में होगा और गठबंधन की सरकार बनने की संभावना बनी रहेगी।
