
दक्ष दर्पण
चंडीगढ़।
पंजाब-हरियाणा की सीमाओं और बॉर्डरों पर किसानों के कूच को लेकर बड़े पैमाने पर बैरिकेड लगाकर आवाजाही प्रभावित किए जाने को ऑल मनीमाजरा रेजिडेंट्स एंड वेलफेयर एसोसिएशन, सेक्टर-13 चंडीगढ़ के अध्यक्ष राजबीर सिंह भारतीय ने दुर्भाग्यपूर्ण और चिंताजनक स्थिति बताया है।
राजबीर सिंह भारतीय ने कहा कि किसानों को अपनी बात सरकार तक पहुंचाने का पूरा लोकतांत्रिक अधिकार है। किसान केवल देश का ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया का पेट पालने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। खेतों में पैदा होने वाला अन्न इंसानों के साथ-साथ पशु-पक्षियों के भोजन और चारे का भी आधार है। यदि किसानों को कोई समस्या है तो सरकारों की जिम्मेदारी बनती है कि उनके साथ वार्तालाप और संवाद करके उसका समाधान निकाला जाए।

उन्होंने कहा कि किसान शांतिपूर्ण तरीके से और कानून के दायरे में रहकर अपनी बात सरकार तक पहुंचाने के लिए दिल्ली जाना चाहते हैं। ऐसे में सरकार और प्रशासन को टकराव का रास्ता अपनाने के बजाय किसानों को अपनी बात रखने का अवसर देना चाहिए। किसानों के प्रतिनिधियों के साथ बातचीत कर उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए।
राजबीर सिंह भारतीय ने कहा कि देश पहले एक लंबे किसान आंदोलन का दर्द झेल चुका है, जिसमें लगभग 750 किसानों की जान जाने की बात सामने आई थी। वे किसी के बेटे, भाई, पिता या पति थे। यह केवल किसानों का नहीं, बल्कि पूरे देश का मानवीय नुकसान था। उस आंदोलन के दौरान आम लोगों की आवाजाही और व्यापारिक गतिविधियां भी प्रभावित हुई थीं। सरकारों को उस अनुभव से सीख लेते हुए ऐसी परिस्थितियों को दोबारा पैदा होने से रोकना चाहिए।
उन्होंने गंभीर सवाल उठाते हुए कहा कि स्वतंत्र भारत में एक नागरिक को एक शहर से दूसरे शहर अथवा एक राज्य से दूसरे राज्य में जाने से रोकने का कानूनी और संवैधानिक आधार क्या है? यदि किसी विशेष परिस्थिति में अंतरराज्यीय आवाजाही पर प्रतिबंध लगाया जाता है तो सरकार को जनता के सामने उसका स्पष्ट कानूनी आधार, आवश्यकता और अवधि बतानी चाहिए।
उन्होंने कहा कि देश ने हाल ही में अपना 80वां स्वतंत्रता दिवस मनाया है। ऐसे समय में यदि नागरिकों को शांतिपूर्ण तरीके से एक राज्य से दूसरे राज्य में जाने में बाधाओं का सामना करना पड़े तो यह गंभीर चिंता का विषय है। लोकतंत्र का अर्थ केवल चुनाव नहीं, बल्कि नागरिकों के अधिकारों, स्वतंत्र आवाजाही और शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने के अधिकार का सम्मान भी है।
राजबीर सिंह भारतीय ने कहा कि पंजाब-हरियाणा सीमा पर बैरिकेडिंग का असर केवल किसानों तक सीमित नहीं रहता। इससे आम नागरिकों, नौकरीपेशा लोगों, विद्यार्थियों, मरीजों, व्यापारियों, उद्योगों और जरूरी कार्यों के लिए यात्रा करने वाले लोगों को परेशानी होती है। इससे रोजमर्रा के काम, व्यापार, रोजगार और आर्थिक गतिविधियां प्रभावित होती हैं।
उन्होंने सरकार से अपील की कि बैरिकेड लगाने के बजाय बातचीत का रास्ता खोला जाए। किसानों की मांगों को सुना जाए और उनकी समस्याओं पर गंभीरता से चर्चा कर ऐसा समाधान निकाला जाए, जिससे किसानों को भी न्याय मिले और आम जनता की आवाजाही भी बाधित न हो।
राजबीर सिंह भारतीय ने कहा, “सरकारों का काम रास्ते बंद करना नहीं, रास्ता निकालना होना चाहिए। किसान और आम जनता दोनों हमारे देश की ताकत हैं। टकराव किसी समस्या का स्थायी समाधान नहीं है। संवाद, संवेदनशीलता और लोकतांत्रिक तरीके से बातचीत ही किसी भी समस्या का बेहतर समाधान है।”
