
दक्ष दर्पण समाचार सेवा
पंचकूला, 3 अगस्त 2026।
“पंचकूला की जनता की संपत्ति कोई निजी जागीर नहीं है।
₹ 400 करोड़ की सरकारी संपत्ति का संचालन महज
₹ 20.11 लाख सालाना में 25 वर्षों के लिए दे दिया गया है और उसी के साथ होटल निर्माण की छूट भी दे दी गई है, सरकार को एक-एक रुपये और एक-एक निर्णय का हिसाब देना होगा।”

यह तीखा हमला इनेलो जिलाध्यक्ष पंचकूला शहरी एवं प्रदेश कोषाध्यक्ष मनोज अग्रवाल ने सेक्टर-3 स्थित हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण के जिमखाना क्लब के ठेके को लेकर किया।
मनोज अग्रवाल ने कहा कि उपलब्ध दस्तावेजों के अनुसार टेंडर में क्लब का आरक्षित मूल्य ₹15 लाख प्रतिवर्ष रखा गया और अंततः ₹20.11 लाख प्रतिवर्ष की दर से 25 वर्षों के लिए लाइसेंस दिया गया। इसके साथ ही क्लब परिसर में होटल निर्माण एवं संचालन की अनुमति की भी अनुमति दे दी गई है।

उन्होंने सवाल किया—
“₹400 करोड़ की संपत्ति का मूल्यांकन किसने किया और ₹20 लाख का मूल्य कैसे तय हुआ?”
मनोज अग्रवाल ने कहा कि सरकार को यह बताना होगा कि जिमखाना क्लब की भूमि, भवन और अन्य परिसंपत्तियों का PWD (B&R) से विधिवत मूल्यांकन हुआ था या नहीं।
“अगर मूल्यांकन हुआ था तो रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए। अगर नहीं हुआ था तो इतनी बड़ी सरकारी संपत्ति पर 25 साल का लाइसेंस और होटल निर्माण की अनुमति किस आर्थिक आधार पर दी गई?”
उन्होंने कहा कि यह सामान्य टेंडर नहीं है। यह सरकारी संपत्ति के दीर्घकालीन उपयोग और उसके भविष्य के स्वरूप से जुड़ा मामला है, इसलिए हर निर्णय की स्वतंत्र जांच आवश्यक है।

“होटल बनाने की अनुमति किसने दी—अधिकारी सामने आए”
मनोज अग्रवाल ने कहा कि HSVP के जिमखाना क्लब संबंधी दिशा-निर्देशों के अनुसार क्लब की मूल संरचना में स्थायी परिवर्तन के लिए सक्षम प्राधिकारी की पूर्व अनुमति आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि ना तो
बोर्ड ऑफ पैट्रन्स की अनुमति ली गई, ना ही एस्टेट कार्यालय और नगर निगम से आवश्यक नक्शे स्वीकृत करवाए गए?
होटल निर्माण की अनुमति किस अधिकारी ने दी?
क्लब की मूल संरचना में बदलाव की अनुमति किस नियम के तहत दी गई?

उन्होंने कहा कि इन सवालों के जवाब सार्वजनिक किए बिना पूरी प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठते हैं।
“180 दिन की वैधता वाला टेंडर नौ महीने बाद कैसे खुला?”
इनेलो नेता ने टेंडर प्रक्रिया पर भी गंभीर सवाल उठाते हुए कहा कि उपलब्ध रिकॉर्ड के अनुसार टेंडर 1 सितंबर 2024 को खुलना था, जबकि इसे लगभग नौ महीने बाद खोला गया, जबकि टेंडर की वैधता अवधि केवल 180 दिन थी।

उन्होंने कहा कि यह जांच का विषय है कि:
टेंडर की वैधता समाप्त होने के बाद उसी प्रक्रिया को आगे बढ़ाने का आधार क्या था?
क्या नया टेंडर जारी होना चाहिए था?
टेंडर का तकनीकी और वित्तीय मूल्यांकन किस सक्षम समिति ने किया?
क्या HSVP की इंजीनियरिंग विंग की राय ली गई?
और सबसे महत्वपूर्ण—पूरी प्रक्रिया को किस स्तर पर मंजूरी दी गई?
“पहले ₹24 लाख, फिर पूरे क्लब का ₹15 लाख—यह हिसाब कौन देगा?”
मनोज अग्रवाल ने कहा कि उपलब्ध रिकॉर्ड के अनुसार पहले केवल बार एवं रेस्टोरेंट के लिए लगभग ₹24 लाख प्रतिवर्ष आरक्षित मूल्य रखा गया था, लेकिन बाद में खेल सुविधाओं और स्विमिंग पूल को छोड़कर लगभग पूरे क्लब का आरक्षित मूल्य घटाकर ₹15 लाख प्रतिवर्ष कर दिया गया।
उन्होंने कहा कि वर्ष 2020 तक केवल रेस्टोरेंट का किराया लगभग ₹1.55 लाख प्रतिमाह, यानी करीब ₹18.60 लाख सालाना होने की जानकारी है।
“जब केवल रेस्टोरेंट से ही लगभग ₹18.60 लाख सालाना मिल रहे थे, तो लगभग पूरे क्लब का आरक्षित मूल्य ₹15 लाख क्यों रखा गया? यह गणित पंचकूला की जनता को समझाया जाए।”
“करोड़ों की सरकारी संपत्ति में तोड़फोड़ के आरोप—जिम्मेदार कौन?”
मनोज अग्रवाल ने कहा कि क्लब परिसर में मूल भवन एवं विभिन्न सरकारी परिसंपत्तियों को नुकसान पहुंचाने के गंभीर मामला भी सामने आया हैं।
इनमें स्क्वैश कोर्ट, टेबल टेनिस कक्ष, टेनिस कोर्ट, महाप्रबंधक कार्यालय, आधुनिक किचन, कोल्ड स्टोर, स्टोर, रिसेप्शन, कार्ड रूम, फर्नीचर, गजीबो और लॉन आदि शामिल हैं।
उन्होंने कहा कि लगभग ₹20 लाख की लागत से नवीनीकृत महाप्रबंधक कार्यालय तथा लगभग ₹70 लाख की लागत से नवीनीकृत किचन एवं कोल्ड स्टोर से जुड़ी परिसंपत्तियों को भी पूर्ण रूप से तोड दिया गया है।

“₹20 लाख की सुरक्षा राशि के सामने करोड़ों की संपत्ति—अगर ठेका कल रद्द हुआ तो नुकसान कौन भरेगा?”
मनोज अग्रवाल ने कहा कि यदि सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचने की पुष्टि होती है तो उसकी पूरी जिम्मेदारी तय होनी चाहिए।
उन्होंने कहा:
“सरकार पहले क्लब की एक-एक परिसंपत्ति की वीडियोग्राफी करवाए। ठेका देने से पहले क्लब की क्या स्थिति थी और आज क्या स्थिति है, इसका रिकॉर्ड सामने रखा जाए। अगर एक रुपये की भी सरकारी संपत्ति बिना अनुमति नष्ट हुई है तो उसकी वसूली जिम्मेदार लोगों से होनी चाहिए।”
मनोज अग्रवाल की सीधी मांग—ठेका रोको, संपत्ति बचाओ, CBI जांच करवाओ
मनोज अग्रवाल ने मांग की कि:
पूरे जिमखाना क्लब ठेका प्रकरण की CBI से स्वतंत्र जांच करवाई जाए।
जांच पूरी होने तक तोड़फोड़ एवं स्थायी निर्माण पर तत्काल रोक लगाई जाए।
पूरे टेंडर, DNIT, तकनीकी एवं वित्तीय मूल्यांकन और स्वीकृतियां सार्वजनिक की जाएं।
PWD (B&R) से क्लब की भूमि एवं भवन का मूल्यांकन करवाया जाए।
क्लब की सभी सरकारी परिसंपत्तियों का भौतिक सत्यापन एवं वीडियोग्राफी करवाई जाए।
सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचने की पुष्टि होने पर पूरी क्षतिपूर्ति वसूल की जाए।
दोषी अधिकारियों एवं संबंधित पक्षों के विरुद्ध कठोर कानूनी एवं विभागीय कार्रवाई की जाए।
हरियाणा के अन्य जिमखाना क्लबों के ठेकों की भी जांच करवाई जाए।
मनोज अग्रवाल ने कहा—
“यह लड़ाई किसी व्यक्ति या कंपनी के खिलाफ नहीं, बल्कि सरकारी संपत्ति और पंचकूला के लोगों के अधिकार की लड़ाई है। यदि पूरी प्रक्रिया नियमों के अनुसार हुई है तो सरकार दस्तावेज सार्वजनिक करने से क्यों डर रही है? और यदि सब कुछ नियमों के अनुसार नहीं हुआ, तो जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई क्यों नहीं हो रही?”
उन्होंने कहा कि इनेलो इस मुद्दे को जनता के बीच मजबूती से उठाएगा और सरकारी संपत्ति की कथित लूट या नुकसान को किसी भी कीमत पर नजरअंदाज नहीं किया जाएगा।
