
राजवीर सिंह भारतीय
स्वायत्त संवैधानिक संस्थाओं की निष्पक्षता पर उठ रहे सवालों का जवाब दे केंद्र सरकार; CEC ज्ञानेश कुमार नैतिक जिम्मेदारी निभाएं: राजबीर सिंह भारतीय
इंटरनेट बंद करना और परिवहन बाधित करना समाधान नहीं, सुप्रीम कोर्ट मामले का संज्ञान लेकर लोकतांत्रिक व्यवस्था में विश्वास बहाल करे: राजबीर
दक्ष दर्पण समाचार सेवा
चंडीगढ़। ऑल इंडिया अम्बेडकर महासभा (रजि.), चंडीगढ़ प्रदेश के अध्यक्ष राजबीर सिंह भारतीय ने वोट चोरी के आरोपों, SIR (विशेष गहन पुनरीक्षण) और संवैधानिक संस्थाओं की निष्पक्षता को लेकर उठ रहे सवालों पर गंभीर चिंता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि दिल्ली के जंतर-मंतर सहित राजधानी के विभिन्न हिस्सों में जन संगठनों, राजनीतिक दलों, सामाजिक संस्थाओं, किसान यूनियनों, युवाओं, महिलाओं, पुरुषों और मजदूर संगठनों, युनिवर्सिटी कालेज के विद्यार्थियों का सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन करना इस बात का संकेत है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था को लेकर लोगों के मन में गंभीर सवाल और आशंकाएं हैं। इन आवाजों को नजरअंदाज करने के बजाय उनके पीछे उठ रहे मुद्दों का निष्पक्षता से समाधान किया जाना चाहिए।
राजबीर सिंह भारतीय ने कहा कि यह सवाल केवल मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार तक सीमित नहीं है, बल्कि उन सभी संवैधानिक एवं स्वायत्त संस्थाओं की स्वतंत्रता, निष्पक्षता और जवाबदेही से भी जुड़ा है, जिनसे देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था मजबूत होती है। यदि इन संस्थाओं के कामकाज पर सरकार के प्रभाव या पक्षपात को लेकर सवाल उठ रहे हैं, तो संबंधित संस्थाओं और सरकार की जिम्मेदारी है कि वे तथ्यों के आधार पर स्थिति स्पष्ट करें। लोकतंत्र में संस्थाओं की विश्वसनीयता केवल दावों से नहीं, बल्कि उनके निष्पक्ष आचरण और पारदर्शिता से स्थापित होती है।
उन्होंने 10 अक्टूबर 2026 को तथा इससे पहले केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के खिलाफ हुए आंदोलनों का उल्लेख करते हुए कहा कि लगातार हो रहे प्रदर्शनों और जन असंतोष के बीच सरकार की चुप्पी या सवालों का स्पष्ट जवाब न मिलना लोगों की आशंकाओं को और बढ़ा सकता है। ऐसे में मन में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि आखिर ऐसा क्या है, जिस पर स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं हो पा रही है? जैसा कि लोकप्रिय धारावाहिक CID के अंदाज में कहा जाता है—“दया, कुछ तो गड़बड़ है!” या फिर सवाल उठता है—“राजा की जान तोते में है या दाल में कुछ काला है?” ये सवाल किसी निष्कर्ष का दावा नहीं, बल्कि मौजूदा परिस्थितियों में पारदर्शिता और जवाबदेही की जरूरत को रेखांकित करते हैं।
उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से आग्रह किया कि वे चुनाव प्रक्रिया और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर उठ रहे सवालों पर प्रेस के सामने आकर तथ्यात्मक स्पष्टीकरण दें। यदि किसी प्रकार की अनियमितता के आरोप लगाए जा रहे हैं, तो उनकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और वास्तविक स्थिति जनता के सामने रखी जानी चाहिए।
संवैधानिक पदों पर बैठे व्यक्तियों से जनता का विश्वास बनाए रखने की विशेष अपेक्षा होती है।
राजबीर सिंह भारतीय ने माननीय सर्वोच्च न्यायालय से भी आग्रह किया कि वह मामले के संवैधानिक और कानूनी पहलुओं पर उचित संज्ञान लेकर आवश्यक कदम उठाए, ताकि लोकतांत्रिक संस्थाओं की स्वतंत्रता और नागरिकों के अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित हो सके।
उन्होंने कहा कि आंदोलनों के दौरान इंटरनेट सेवाएं बंद करना अथवा रेल, मेट्रो और अन्य परिवहन सेवाओं को बाधित करना समस्याओं का स्थायी समाधान नहीं है। आज बैंकिंग, व्यापार, शिक्षा, स्वास्थ्य और न्यायिक प्रक्रियाओं सहित जनजीवन के अनेक कार्य इंटरनेट पर निर्भर हैं। इंटरनेट बंद होने से कारोबार प्रभावित होता है, बैंकिंग सेवाओं में बाधा आती है और वकीलों तथा पक्षकारों के लिए अदालतों तक पहुंचने एवं जरूरी सूचनाएं प्राप्त करने में कठिनाइयां पैदा हो सकती हैं। किसी भी प्रतिबंध का निर्णय कानून के अनुरूप, आवश्यक और आनुपातिक होना चाहिए, ताकि आम जनता को अनावश्यक परेशानी न हो।
अंत में राजबीर सिंह भारतीय ने केंद्र सरकार से अपील की कि वह जनता की आवाज सुने, उठाए जा रहे सवालों का पारदर्शी जवाब दे और संवैधानिक संस्थाओं की निष्पक्षता में विश्वास मजबूत करने के लिए ठोस कदम उठाए। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में जनता-जनार्दन सर्वोपरि है। जब लोग अपने सवाल लेकर सड़कों पर उतरते हैं, तो इसे केवल विरोध नहीं, बल्कि व्यवस्था के प्रति उनकी चिंताओं को समझने और उनका समाधान करने का अवसर माना जाना चाहिए। लोकतंत्र की मजबूती सत्ता के साथ-साथ जवाबदेही, पारदर्शिता, असहमति के सम्मान और संविधान की मर्यादा में निहित है।
