
धर्मपाल वर्मा
दक्ष दर्पण समाचार सेवा
आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल दिल्ली और पंजाब में सरकार बनाने में सफलता हासिल करके भी अपने गृह राज्य हरियाणा में संतोषजनक राजनीतिक मुकाम हासिल नहीं कर पाए हैं लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि उन्होंने हरियाणा की राजनीति से अपने हाथ पीछे खींच लिए है बल्कि हकीकत यह है कि केजरीवाल हरियाणा को लेकर मानसिक रूप से काफी आक्रामक हैं और पंजाब के चुनाव से निपटने के बाद वे हरियाणा में विशेष तौर पर आक्रामक मोड में नजर आ सकते है । वह हरियाणा में पार्टी का कलेवर बदलना चाहते हैं और सत्तारुढ़ भारतीय जनता पार्टी के इनकंबेंसी फैक्टर का लाभ भी उठाना चाहते हैं।
खबर यह है कि केजरीवाल संपूर्ण हरियाणा पर न केवल खुद नजर रखेंगे बल्कि हर हल्के में सारी प्रमुख नीतियों को खुद तय करने की कोशिश करेंगे। आपको बता दें कि पंजाब चुनाव में आम आदमी पार्टी फिर से सरकार बनाने में सफल हो गई तो हरियाणा में अरविंद केजरीवाल की मुहिम सरदार भी साबित हो सकती है।
आम आदमी पार्टी आज तक हरियाणा में एक भी विधायक नहीं बना पाई है। पिछले लोकसभा चुनाव में शानदार प्रदर्शन के बावजूद कुरुक्षेत्र लोकसभा सीट पर में पार्टी की जो हार हुई उसके बाद केजरीवाल कांग्रेस से भी दूर हो गए हैं।
अब कांग्रेस और आम आदमी पार्टी में गठबंधन के आसार पूरी तरह से खत्म हो गए हैं। इसलिए आम आदमी पार्टी हरियाणा में कांग्रेस की फूट जैसी कमजोरी का फायदा भी उठाना चाहती है। पिछले दिनों अरविंद केजरीवाल ने पार्टी के हरियाणा के संगठन की समीक्षा की और पार्टी के नेताओं को यह संदेश दिया कि हरियाणा को लेकर उनकी नई योजना क्या है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार आम आदमी पार्टी अगले सभी चुनाव अकेले और मजबूती से लड़ने की योजना पर काम कर रही है। इस बात के भी दावे किए जा रहे हैं कि पार्टी इसी वर्ष दिसंबर में होने जा रहे चंडीगढ़ नगर निगम के चुनाव में भी मजबूती से उतरेगी । पार्टी सभी 35 वार्डो में मजबूत उम्मीदवार तैयार कर रही है। पार्टी के नेता चंडीगढ़ में भी यह संदेश देने में सफल हो रहे हैं कि पंजाब चुनाव में एक बार फिर आम आदमी पार्टी की ही सरकार बनने जा रही है। लोग इस बात पर यकीन भी कर रहे हैं।
आम आदमी पार्टी हरियाणा में 2027 में होने वाले लोकल बॉडीज के चुनाव में भी अपनी पूरी ताकत झौंकने वाली है। आपको बता दें कि हरियाणा के पंजाब और दिल्ली की सीमा से सटे इलाकों में आम आदमी पार्टी का असर आज भी नजर आता है।
