भाजपा जिला प्रधान दिल्ली रवाना।
आज ही हो जाएगा फैसला 20 अप्रैल का दिन मंत्रणा नहीं घोषणा का।

धर्मपाल वर्मा
दक्ष दर्पण समाचार सेवा
चण्डीगढ़।
पंचकूला नगर निगम के चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ही नहीं कांग्रेस के मेयर उम्मीदवारों को लेकर बड़ा संशय बना हुआ है। पता चला है कि इसके लिए भारतीय जनता पार्टी न केवल कैलकुलेटिव तरीके से कम कर रही है बल्कि इस बारे में कोई अप्रत्याशित फैसला भी सामने आ सकता है। कांग्रेस ने सोनीपत और अंबाला शहर के मेयर उम्मीदवार बेशक सबसे पहले घोषित कर दिए हैं लेकिन पंचकूला नगर निगम के मामले में उसके नेता दो में से एक का फैसला शायद 20 अप्रैल से पहले करने वाले नहीं है।
आम आदमी की रुचि भारतीय जनता पार्टी के मेयर उम्मीदवार को लेकर कुछ ज्यादा ही बनी हुई है। सवाल यह है कि निवृत्तमान मेयर कुलभूषण गोयल टिकट मिलेगी या किसी नए नाम पर विचार होगा। इन में एक नाम उपेंद्र कौर अहलूवालिया का भी है जो भाजपा में न होते हुए भी प्रमुख उम्मीदवारों में गिनी जा रही हैं। उन्होंने न फॉर्म भरा है न भाजपा में जाने का ऐलान किया है परंतु इस बारे में सवाल सब पूछ रहे हैं कि अहलूवालिया के मामले में क्या होने जा रहा है। परिवार भी अपने पत्ते नहीं खोल रहा है वेट एंड सी की मुद्रा में नजर आ रहा है।
पंचकूला में सबसे बड़ा सवाल यह है कि निवर्तमान मेयर को टिकट मिलेगी या नहीं। उनके पक्ष में एक बात तो यही है कि उन्हें सिटिंग गेटिंग का लाभ मिल सकता है। दूसरा यह कि लॉबिंग करने के मामले में वह किसी से पीछे नहीं है ।तीसरा यह की भाजपा में जिला इकाई में कुछ प्रभावशाली लोगों का पलड़ा उनकी ओर झुक रहा है। इसके अलावा मीडिया का एक गुट भी उन्हें सपोर्ट करता नजर आ रहा है। आपको बता दें कि कुल भूषण गोयल को कई राज्यों के भाजपा के मेयर भी सपोर्ट कर सकते हैं।
अब जो चीज इस मामले में निर्णायक साबित हो सकती है वह यह है कि पंचकूला का ही एक बड़ा पावर सेंटर उनके खिलाफ खड़ा हो गया बताया गया है। पंचकूला नगर निगम में सैकड़ो करोड़ का एक फ्रॉड भी उम्मीदवारों के भाग्य का फैसला कर सकता है। तीसरा यह कि पार्टी विधानसभा के पिछले चुनाव में भाजपा प्रत्याशी के खिलाफ काम करने वाली काली भेड़ भी भाजपा के निशाने पर हैं। लोग कह रहे हैं कि सोनीपत के निवृतमान मेयर राजीव जैन की टिकट सलामत रही तो इसका लाभ पंचकूला में भी कुलभूषण गोयल को मिल सकता है। मामला कितना भी फंसा हुआ हो पंचकूला में बहुत लोग अब भी कुल भूषण गोयल को मजबूत उम्मीदवार के रूप में देख रहे हैं। कुलभूषण गोयल को छोड़कर भाजपा के अग्रवाल उम्मीदवारों की बात करें तो उनमें अमित जिंदल प्रदीप गोयल आदि के नाम की चर्चा आम है।
जहां तक कांग्रेस का सवाल है सूत्र बता रहे हैं कि यहां दो उम्मीदवार रह गए हैं। एक है सुधा भारद्वाज दूसरे हैं रविंद्र रावल। पहले यह माना जा रहा था कि सुधा भारद्वाज को एक तरह से फ्री हैंड मिल गया है लेकिन कांग्रेस ने मामले को लंबित रख कर यह संकेत दे दिया है कि यहां दोनों के लिए हालात 50-50 के बन गए हैं। सुधा भारद्वाज को महिला होने का लाभ मिल सकता है जबकि रविंद्र रावल को पंजाबी होने का। बताते हैं कि एक को विधायक का समर्थन प्राप्त है दूसरे को भूपेंद्र सिंह हुड्डा का।
भारतीय जनता पार्टी कैलकुलेटिव तरीके से चल रही है इसका अनुमान इस बात से लगाया जा सकता है कि पार्टी ने सारा काम योजनाबद्ध तरीके से किया है।
अब आज दिल्ली में जहां प्रभारियों की बैठक होगी वहीं जिला अध्यक्ष और चुनाव समिति परस्पर चर्चा करके अंतिम फैसला लेने वाले हैं। बताते हैं कि सब कुछ आज दिल्ली में ही तय हो जाएगा । 20 अप्रैल को तो केवल उम्मीदवारों की घोषणा की जाएगी।
