
धर्मपाल वर्मा
दक्ष दर्पण समाचार सेवा dakshdarpan2024@gmail.com
चण्डीगढ़।
हरियाणा में लोकल बॉडीज चुनाव में तीन नगर निगम सोनीपत अंबाला और पंचकूला सतारूढ़ भाजपा के लिए खुद को लोकप्रिय साबित करने का एक अवसर है। माना जा रहा है कि मेयर चुनाव में कांग्रेस फिर से भाजपा के निशाने पर होगी और इस मामले में भाजपा आक्रामक तरीके से चुनाव लड़ती नजर आ सकती है। विधानसभा चुनाव में अंबाला और पंचकूला में भाजपा की हार उसके नेता गले से नीचे नहीं उतार पा रहे हैं क्योंकि 2014 और 2019 के चुनाव में इन दोनों विधानसभा क्षेत्रों में भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार विजयी हुए थे लेकिन 2024 की हार को पार्टी की अंदरुनी फुट का परिणाम माना जा रहा है । दूसरा कारण यह है कि भारतीय जनता पार्टी जिस कांग्रेस को अपना प्रतिद्वंदी मानती है वह उसे किसी भी सूरत में मजबूत नहीं होने देना चाहती । इसी कड़ी में पंचकूला और अंबाला में कांग्रेस मुक्त अभियान चलाया जा सकता है। मेयर के उम्मीदवार तय करने में भाजपा प्रभावी रणनीति को प्रतिपालित करते हुए ऐसे उम्मीदवारों को आगे ला सकती है जिन्हें अप्रत्याशित कहा जाए।
इस सिलसिले में लोग पंचकूला को विशेष तौर पर फोकस करके चल रहे हैं। यहां जीत को सुनिश्चित करने के लिए भाजपा निवृत्तमान मेयर की टिकट काट सकती है, किसी महिला को टिकट दे सकती है और कांग्रेस मुक्त पंचकूला बनाने की चेष्टा कर सकती है ।यह भी कि किसी गैर अग्रवाल को भी टिकट दे सकती है। यह अनुमान हमारा नहीं जनता का और पर्यवेक्षकों का है। वह कहते हैं कि भारतीय जनता पार्टी के नेता ही नहीं राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की कोशिश भी सदा कांग्रेस को कमजोर करने ,उसकी कमजोरियों का फायदा उठाने की रही है।
पंचकूला में लगातार दो बार चुनाव जीतकर 2024 में हारने वाले नेता ज्ञानचंद गुप्ता की इस चुनाव में जो प्राथमिकता हो सकती हैं उस पर पार्टी भी अपनी मोहर लगा सकती है। यहां छुटभैये लोग नहीं बड़े नेता फैसला करने वाले हैं।
जहां तक पार्षद उम्मीदवारों का सवाल है ज्ञानचंद गुप्ता के समर्थक भाजपा के लगभग सभी निवृत्तमान पार्षदों को टिकट मिलने के आसार उनके पार्टी में हस्तक्षेप के कारण ही नजर आ रहे हैं ।ज्ञानचंद गुप्ता समर्थक कई कार्यकर्ताओं को इस चुनाव में उनके आशीर्वाद का प्रसाद मिल सकता है ।
यह अलग बात है कि पार्टी पंचकूला क्षेत्र की तीन महिला भाजपा नेताओं सांसद रेखा शर्मा, विधायक शक्ति रानी शर्मा और अंबाला लोकसभा क्षेत्र की पूर्व प्रत्याशी बन्तो कटारिया के अलावा जिला अध्यक्ष अजय मित्तल की संस्तुति पर भी टिकट देने वाली है।
ज्ञानचंद गुप्ता को अहमियत देने के पीछे कई कारण है। एक यह कि वे 2024 के चुनाव में देखी गई सभी काली भेड़ों को पहचानते हैं ।दूसरे यह की पार्टी के दो प्रमुख नेता पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर लाल और मौजूदा मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी उनको लेकर सकारात्मक रहे हैं।
हाल में नगर निगम पंचकूला के एक ताजा घोटाले में भाजपा के कुछ नेताओं के प्रत्यक्ष परोक्ष नाम आने से भी चुनाव की दशा और दिशा बदल गई है। एक उम्मीदवार के रिश्तेदार का नाम सामने आ गया है तो एक के खाते सील हो गए बताए गए हैं। ऐसे में प्रतिद्वंदी कांग्रेस के पास भाजपा को बैक फुट पर लाने का एक अस्त्र हाथ लग गया है। इस प्रकरण के कारण नफे नुकसान को लेकर भाजपा नेताओं की चोटी भी खड़ी हो गई होगी । इस प्रकरण के बाद भाजपा के पास मेयर उम्मीदवारी के विकल्प और कम हो गए हैं।
पर्यवेक्षक करते हैं कि भारतीय जनता पार्टी पंचकूला में न केवल कांग्रेस को तोड़ने की कोशिश कर सकती हैं बल्कि कांग्रेस की फूट का लाभ भी निश्चित तौर पर उठाएगी। यही कारण है कि पंचकूला का चुनाव कांग्रेस के लिए भाजपा से भी बड़ी चुनौती है। मेयर पद का कांग्रेस का उम्मीदवार कौन होगा यह शायद कांग्रेस के लोगों को पता ना हो परंतु भाजपा के नेता अच्छी तरह से जानते हैं और अब से पहले इस पर पॉलिटिकल एक्सरसाइज शुरू कर दी गई है। भारतीय जनता पार्टी को स्थानीय स्वशासन के चुनाव में जीत हासिल करने में महारत हासिल है। उसके नेता एक बार फिर इस मान्यता को सिद्ध और साबित करने के लिए जिस थिंक टैंक पर निर्भर है उनका मूल मंत्र भी यही है कि जहां अवसर मिले वहीं कांग्रेस मुक्त माहौल बनाने की कोशिश की जानी चाहिए। लेकिन भाजपा की टिकट के फैसले पर कोई भविष्यवाणी नहीं की जा सकती क्योंकि पार्टी के नेता अप्रत्याशित फैसले लेते रहते हैं। भारतीय जनता पार्टी तीनों नगर निगमों में जीत हासिल करके राज्यसभा में अपनी हार के गम को काम करने और जीत को पंजाब के चुनाव में कैश कराने की कोशिश भी करेगी। इस समय भाजपा दलित मतदाताओं के तुष्टीकरण पर पूरी तरह से फोकस करती नजर आ रही है इससे भी कांग्रेस का ही पक्ष कमजोर होगा।
