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धर्मपाल वर्मा
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दक्ष दर्पण समाचार सेवा ।
चण्डीगढ़।
राज्यसभा के चुनाव में क्रॉस वोटिंग और वोट कैंसिलेशन के मामले में अभी भी एक रहस्य न केवल सवाल बना हुआ है बल्कि इसे एक झोल के रूप में भी देखा जा रहा है। कांग्रेस से जुड़े लोग ही नहीं जन सामान्य इस बात को लेकर हैरान है कि एक तरह से हरियाणा का कांग्रेस का आला कमान बड़ी सफाई और चतुराई से एक बात को सामने नहीं आने दे रहा है। इसके पीछे की मंशा को सब तो नहीं बहुत लोग जरूर समझ रहे हैं। इसीलिए कहा जाता है कू राजनीति में जो होता है वह दिखता नहीं ,तो दिखता है वह होता नहीं। ऐसा लगता है कि पार्टी में कुछ नेता अपने विरोधियों को निपटाने की योजना को बड़ी सफाई के साथ अंजाम देने में लगे हुए हैं। हैरानी की बात यह है कि हाई कमान प्रदेश के इस मामले से दूरी बनाता नजर आ रहा है इस बात की पुष्टि तब हुई जब 30 मार्च को दिल्ली में संपन्न हुई विधायक दल की बैठक में राहुल गांधी और पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे नहीं पहुंचे जबकि पहले यह बताया था कि इनकी देखरेख में ही बैठक होगी। दो महिला विधायकों ने भी इस बैठक से दूरी बना बनाकर रखी इनमें एक विनेश फोगाट भी थी ।कुछ लोगों का मानना है कि विनेश कांग्रेस के हालातों से खुश नहीं है।
बताते हैं कि बैठक में एक गुट क्रॉस वोटिंग करने वाले पांच विधायकों को सबक सिखाने की बात करता नजर आया तो एक पक्ष यह सवाल करता भी दिखा कि जिनकी वोट कैंसिल हुई है उनके नाम भी सार्वजनिक होने चाहिए लेकिन नेताओं द्वारा यह जानने की कोशिश शायद जानबूझकर नहीं की जा रही है। शायद इन्हें एक कूटनीति के तहत बचाया जा रहा है।
समझने के लिए यह पर्याप्त है कि एक व्यक्ति ने कमर में छुरा घोंपा तो दूसरे ने छाती पर सामने से वार कर दिया तो इसमें कमर में छुरा घोंपने वाला ज्यादा खतरनाक माना जाना चाहिए क्योंकि वह वार भी कर गया और बच भी गया। हैरानी की बात यह है कि धीरे-धीरे उन नामों पर मिट्टी डालने की कोशिश हो रही है जिन्होंने क्रॉस वोटिंग की है ।आस्तीन के यह सांप एक बार फिर परिवार के साथ घूमने लगे हैं और इनके चेहरों को छुपाने की जो कोशिश हो रही है वह कांग्रेस के लिए बहुत खतरनाक साबित हो सकती है।
दूसरा झोल यह है कि राज्यसभा चुनाव में वोटिंग के दौरान कांग्रेस के जो दो एजेंट विद्यमान थे उनके एक्शन पर एक बड़ा सवाल यह उठ रहा है।यह कि जब वोटिंग के दौरान उन्हें पांच विधायकों द्वारा क्रॉस वोटिंग करने की जानकारी मिल गई थी तो उन्होंने नियमानुसार कार्रवाई करते हुए वोट कैंसिल करने की मांग क्यों नहीं की। इनके नाम इस समय सार्वजनिक क्यों नहीं किए गए। इससे इस आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता कि कहीं ना कहीं मकसद ही इन विधायकों को फाउल करना भी था । क्योंकि कांटा निकालने का यह उपयुक्त समय रहा होगा। एजेंट और हरियाणा मामलों के प्रभारी बीके हरिप्रसाद ने तो एक बयान में यह कहकर सबको चौंका दिया था कि इतने विधायकों ने क्रॉस वोटिंग की है और 5 या 6 की वोट कैंसिल हुई है। पांचवे विधायक का नाम बाद में तय किया गया। जो व्यक्ति एजेंट था उसे यही नहीं पता कि वोट पांच कैंसिल हुए हैं या छह ।
जिन नेताओं ने यह कह कर मामले से पल्ला झाड़ने की भी कोशिश की है कि पार्टी के साथ दगा करने वाले इन गद्दारों का हिसाब जनता करेगी लेकिन उन्हें यह भी जान लेना चाहिए कि यदि उपचुनाव हुए तो कांग्रेस को एक एक सीट बचाने के भी लाले पड़ सकते हैं यदि ऐसा हुआ तो फिर भी पता चलेगा कि ओलावृष्टि के बाद फसल का नुकसान कितना हुआ है। अभी तो कांग्रेस को अपने विधायकों को भाजपा से बचाकर रखना पड़ेगा। क्योंकि 2028 में भी राज्यसभा के दो सदस्य फिर चुने जाएंगे और भाजपा फिर से दो उम्मीदवार खड़ा करेगी और उसे एक दो और विधायकों की जरूरत फिर से कांग्रेस से ही पूरी करनी पड़ सकती है।
चलते-चलते एक बात और यह कहीं जा सकती है कि नवनिर्वाचित सांसद कर्मवीर बौद्ध की जीत से भूपेंद्र सिंह हुड्डा का पक्ष मजबूत हो गया है और लोग यह मानने लगे हैं कि यह सांसद हुड्डा के ग्रुप से बाहर नहीं आ पाएगा ।लेकिन इससे कांग्रेस के तीन दलित नेताओं को जो नुकसान हो सकता है इसका अनुमान अभी से लगाया जा रहा है यह है कुमारी शैलजा, डॉ अशोक तंवर और वरुण मुलाना।
3 अप्रैल को अनुशासन समिति की बैठक होने जा रही है। इसमें पांच विधायकों के खिलाफ कार्रवाई को लेकर कयास लगाए जा रहे हैं कि इन्हें निलंबित करने की सिफारिश हो सकती है।लेकिन ऐसा भी संभव है कि जिन दो विधायकों ने नोटिस के जवाब ही नहीं दिए हैं उन्हें बर्खास्त करने की सिफारिश भी की जा सकती है। यह दोनों विधायक मुस्लिम है और न केवल कांग्रेस से दूरी बनाकर चल रहे हैं बल्कि भाजपा के साथ हो गए हैं। चुनाव लड़ने की तैयारी में भी दिख रहे हैं।
