
आचार्य संतोष त्रिपाठी
पुण्डरीक तीर्थ पर श्रीराम मन्दिर के प्रांगण, में राम नवमी के उपलक्ष में जन कल्याणार्थ हेतु श्रीराम कथा का आयोजन किया गया है जिसमें परम पूज्य आदरणीय श्री संतोष जी महाराज अपनी सुमधुर वाणी से राम कथा का रसास्वाद करा रहे हैं।
श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि
‘राम’ हमारी जीवनीय शक्ति है। जिस तत्व के आधार पर हम जीवित हैं, वह ‘राम तत्व’ ही है। यह तत्व जब हमारे शरीर का त्याग कर देता है तब शरीर शव बन जाता है। यही कारण है कि अर्थी को शमशान ले जाते समय “राम नाम सत्य है” का बार-बार उच्चारण किया जाता है। सत्य राम ही परात्पर ब्रह्म है, परम तत्व है।
वस्तुतः राम मात्र राजा दशरथ के पुत्र अथवा अयोध्या के राजा नहीं थे। वरन् वह साक्षात् परम ब्रह्म है जिसकी सत्ता सृष्टि के कण-कण में एवं जन मानस के घट-घट में व्याप्त हैं।
यही परात्पर पर ब्रह्म धर्म संस्थापनार्थ एवं लोक कल्याणार्थ समय समय पर भारत की पावन वसुन्धरा पर अवतरित होते हैं। भारत की भूमि पर अवतार ग्रहण के लिये भगवान वचनबद्ध है।
राम कथा चिंतामणि है। यह कथा जीवन की व्यथा मिटाती है। कथा से जीवन में विवेक उत्पन्न होता है। जीवन में दिव्यता आती है। यह शोक, मोह एवं भय से मुक्त करती है। कथा व्यक्ति की दशा व दिशा बदल देती है। संत कहते है-राम चन्द्र है तो कथा चन्द्र किरण है जो मस्त भी करती तथा मुक्त भी करती है। यह कलियुग के क्लेशों से का अमोध शस्त्र है। कलियुग में राम कथा से मनुष्य के भय का नाश होता है।
