
महेश कौशिक।
रोहतक।
हरियाणा की राजनीति में राज्यसभा चुनाव के बाद घमासान थमने का नाम नहीं ले रहा। कांग्रेस के पांच विधायकों पर क्रॉस वोटिंग के आरोप लगने के बाद जहां एक ओर पार्टी हाईकमान सख्त नजर आ रहा है, वहीं दूसरी ओर एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने सियासी गलियारों में नई बहस छेड़ दी है। बादली से विधायक कुलदीप वत्स, जिन्होंने कथित तौर पर पार्टी लाइन के अनुसार ही वोट डाला, उन्हीं पर पार्टी के कुछ नेताओं द्वारा क्रॉस वोटिंग का आरोप लगा दिया गया।
सूत्रों की मानें तो शुरुआत में प्रदेश प्रभारी द्वारा चार विधायकों के नाम सार्वजनिक किए गए थे, जबकि पांचवां नाम गुप्त रखा गया। लेकिन अब वह नाम भी सामने आ चुका है, जिससे पार्टी के अंदरूनी मतभेद उजागर हो गए हैं। मतदान वाले दिन ही कुलदीप वत्स पर उंगली उठाई गई, जिससे राजनीतिक माहौल गरमा गया। हालांकि बाद में वरिष्ठ नेता भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने साफ कर दिया कि कुलदीप वत्स का वोट कांग्रेस के पक्ष में गया, लेकिन तब तक आरोपों का “रायता” फैल चुका था।
इस पूरे घटनाक्रम से नाराज कुलदीप वत्स ने पार्टी के भीतर “भ्रष्ट और कामचोर तत्वों” को बढ़ावा देने का गंभीर आरोप लगाया है। उन्होंने यह भी संकेत दिए कि उनके खिलाफ साजिश रची जा रही है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि बादली सीट को लेकर पहले से ही अंदरखाने खींचतान चल रही थी, जहां कुछ नेता बजरंग पुनिया को टिकट दिलाने के प्रयास में थे। हालांकि ब्राह्मण चेहरा और सिटिंग विधायक होने के कारण कुलदीप की टिकट तो बच गई, लेकिन अब उन पर दबाव बनाने की कोशिशें तेज हो गई हैं।
सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि जब वोट पार्टी के पक्ष में गया, तो फिर आरोप क्यों लगाए गए? क्या यह किसी बड़ी रणनीति का हिस्सा है? क्या कुलदीप वत्स को पार्टी छोड़ने के लिए मजबूर किया जा रहा है, या फिर यह बजरंग पुनिया के लिए रास्ता साफ करने की कोशिश है?
यदि पार्टी नेतृत्व ब्राह्मण सम्मेलन और सामाजिक संतुलन की लाज रखना चाहता है, तो जरूरी है कि आरोप लगाने वाले नेताओं से सार्वजनिक माफी मंगवाई जाए। अन्यथा यह संदेश जाएगा कि एक वर्ग विशेष को साधने के लिए एक मौजूदा विधायक को बलि का बकरा बनाया जा रहा है, जो आने वाले समय में कांग्रेस के लिए भारी पड़ सकता है।
