
धर्मपाल वर्मा
दक्ष दर्पण
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चण्डीगढ़।
केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह पंजाब में चुनाव की तैयारी की औपचारिक शुरुआत मोगा में रैली से कर गए हैं। इस रैली के माध्यम से अमित शाह कई संदेश देकर गए हैं। उन्होंने एक महत्वपूर्ण संदेश यह दिया है कि पंजाब में भाजपा किसी भी दल के साथ गठबंधन करने की बजाय अकेले चुनाव लड़ने की तैयारी में है और उसका फोकस धार्मिक डेरों, हिंदू वोटर्स और दलित वोटर्स पर है। उन्होंने यह जता दिया है कि भाजपा यह चाहती है कि अकाली दल अलग कांग्रेस और आम आदमी पार्टी अलग-अलग चुनाव लड़े और बहुजन समाज पार्टी भी सभी सीटों पर और अकेले चुनाव लड़े। भाजपा के रणनीतिकार इस बात को मन मस्तिष्क में रखकर चल रहे हैं कि आगामी चुनाव में पंजाब में उसके कट्टर विरोधी जाट सिक्ख मतदाताओं में विभाजन हो। पंजाब में जट्ट सिख आम आदमी पार्टी ,अकाली दाल और कांग्रेस तीन जगह बंट सकता है। उन्होंने कांग्रेस से आए दो बड़े नेताओं जो मंच पर मौजूद थे मतलब प्रदेश अध्यक्ष सुनील जाखड़ और पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह को यह संदेश दे दिया कि पार्टी उनकी इस बात को बिल्कुल नहीं सुनेगी कि भाजपा शिरोमणि अकाली दल से गठबंधन करे। भाजपा में बहुत नेता यह दावा कर रहे हैं कि कांग्रेस से आए कई नेता इस योजना पर काम कर रहे हैं कि गठबंधन के बाद सरकार बने और उन्हें सरकार में रहने का लाभ मिले । मतलब यह वही लोग हैं जो राज के बिना नहीं रह सकते।लेकिन पार्टी इस कोशिश में है कि चुनाव अकेले लड़ा जाए परिणाम चाहे कुछ भी हो। भारतीय जनता पार्टी एक बार फिर पंजाब को पॉलिटिकल लैबोरेट्री की तरह देख रही है। इस बात को मुख्यमंत्री भगवत मान भी समझ गए हैं कि भाजपा सभी सीटों पर अकेले चुनाव लड़ने की तैयारी में है यही कारण है कि इस विचार का मजाक उड़ाते हुए उन्होंने एक बयान में कहा भी है कि जो लोग 117 सीटों पर चुनाव लड़ने का दावा कर रहे हैं उनके नाम पर 117 लोग भी इकट्ठे नहीं हो सकते।
मोगा रैली में अमित शाह ने सिक्ख धर्म, गुरुओं और और 1984 के दंगों की बड़ी चतुराई से चर्चा की परंतु वह पंजाब की कई समस्याओं और उनके समाधान को लेकर चुप रहे उन्होंने एसवाईएल और चंडीगढ़ पर लगभग चुप्पी सादे रखी। गृहमंत्री ने पंजाब की कानून व्यवस्था भ्रष्टाचार पर सवाल उठाए और नशे और धारी धर्म परिवर्तन को लेकर चर्चा की।
आपको बता दें कि पंजाब में चुनाव इसी वर्ष नवंबर दिसंबर में भी संभव है ।इसका कारण यह है कि 2027 के आरंभ में जब पंजाब में चुनाव होने हैं देश में जनगणना का कार्यक्रम शुरू हो जाएगा।इससे बचने के लिए सरकार नवम्बर दिसंबर में चुनाव करा सकती है। इसमें कोई कानूनी अड़चन आने वाली नहीं है।
भारतीय जनता पार्टी पंजाब में चुनाव की पूरी तैयारी में है और अकेले चुनाव लड़ने की तैयारी में है ।इसका एक संकेत इस बात से मिल रहा है कि पार्टी के नेता शिरोमणि अकाली दल सहित दूसरे सभी राजनीतिक दलों के मजबूत नेताओं को पार्टी में भाजपा में शामिल कराने की मुहिम छेड़े हुए हैं।यदि शिरोमणि अकाली दल के नेताओं से कोई अंडरस्टैंडिंग बन गई होती तो शिरोमणि अकाली दल के नेताओं को तोड़कर भाजपा में शामिल करने से तौबा जरूर की गई होती। अमित शाह ने पंजाब की जनता से इस तरह का राजनीतिक आह्वान किया है जैसा 2022 में सत्ता में आने के लिए आम आदमी पार्टी ने किया था । गृहमंत्री अमित शाह ने कहा कि आप लोगों ने कांग्रेस, शिरोमणि अकाली दल और आम आदमी पार्टी को पंजाब में सरकार बनाने और चलाने का मौका दिया है एक मौका भारतीय जनता पार्टी को भी दिया जाना चाहिए।
भाजपा ने जिस तरह 2014 में हरियाणा में अकेले चुनाव लड़कर जिस व्यूह रचना से चुनाव जीता था उसी तरह की मुहिम पंजाब में शुरू कर दी गई है ।चुनाव आने तक कांग्रेस और आम आदमी पार्टी ही नहीं अकाली दल के भी कई नेता भाजपा में शामिल हो सकते हैं। राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि भारतीय जनता पार्टी के नेता पंजाब में कांग्रेस की फूट और मुख्यमंत्री भगवंत मान की अकाली दल के नेताओं के साथ दुश्मनी जैसे हालातों का लाभ उठाने से भी नहीं चूकेंगे। भाजपा का पंजाब में अकेले चुनाव लड़ने का आर पार का फैसला चुनाव में उसके काम भी आ सकता है। कुछ लोग अब यह भी मानने लगे हैं कि कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हुए दो बड़े नेता पूर्व मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह और पूर्व सांसद सुनील जाखड़ को अब शायद अपने राजनीतिक फैसले पर पछताना पड़ रहा हो उनकी स्थिति हरियाणा के नेता चौधरी बीरेंद्र सिंह जैसी हो गई लगती है लेकिन वह उनकी तरह भाजपा छोड़ने की हिम्मत नहीं कर पा रहे ।कैप्टन अमरिंदर सिंह ने एक बार ऐसा संकेत दिया था परंतु उनका एक बयान आते ही उन्हें ईडी का नोटिस आ गया और शायद इस नोटिस ने ही उन्हें भाजपा में ही बने रहने को मतलब पुनर्विचार करने को मजबूर कर दिया है।
