
महेश कौशिक
रोहतक।
हरियाणा की राजनीति में इन दिनों राज्यसभा चुनाव और संभावित परिसीमन को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि परिसीमन के कारण हरियाणा में कांग्रेस की राज्यसभा में हार भी हो सकती है। यही कारण है कि चुनाव से पहले ही कुछ नेता संभावित हार की स्क्रिप्ट लिखते दिखाई दे रहे हैं और बीजेपी पर विधायकों की खरीद-फरोख्त के आरोप लगाए जा रहे हैं। इन चर्चाओं के बीच कांग्रेस के भीतर अफरा-तफरी का माहौल भी नजर आने लगा है।
सियासी हलकों में यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या कांग्रेस के कुछ विधायक आने वाले समय को देखते हुए असमंजस में हैं। चर्चा है कि कई विधायक यह सोच रहे हैं कि यदि परिसीमन के बाद उनका हलका आरक्षित हो गया या उसकी सीमाएं बदल गईं तो उनकी राजनीतिक जमीन खिसक सकती है। ऐसे में यह अटकलें भी लगाई जा रही हैं कि बीजेपी की नजर कांग्रेस के करीब एक दर्जन विधायकों पर हो सकती है और पार्टी बिना इनेलो के समर्थन के राज्यसभा में अपना दूसरा उम्मीदवार जिताने की रणनीति पर काम कर रही है।
राजनीतिक चर्चाओं में यह भी कहा जा रहा है कि इस पूरे सियासी गणित में केंद्रीय नेता और पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर, मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी और वरिष्ठ नेता राव इंदरजीत सिंह भी अहम भूमिका में नजर आ रहे हैं। बताया जा रहा है कि बीजेपी की नजर खास तौर पर उन कांग्रेस नेताओं पर है जो पुराने रोहतक क्षेत्र की राजनीति से जुड़े हैं या फिर जिन्होंने सीधे राहुल गांधी से टिकट हासिल कर अपनी राजनीतिक पहचान बनाई है।
दरअसल हरियाणा की राजनीति में प्रस्तावित परिसीमन के बाद बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। मीडिया में सामने आए संभावित आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2026 के परिसीमन के बाद प्रदेश की विधानसभा सीटों की संख्या 90 से बढ़कर करीब 126 होने का अनुमान है। यानी लगभग 36 नई विधानसभा सीटें जुड़ सकती हैं। इसी प्रकार लोकसभा सीटों की संख्या भी बढ़ने की संभावना जताई जा रही है। वर्तमान में हरियाणा से 10 सांसद लोकसभा में जाते हैं, जबकि परिसीमन के बाद यह संख्या बढ़कर 14 हो सकती है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि परिसीमन के बाद कई विधानसभा क्षेत्रों की सीमाएं बदल सकती हैं और कुछ सीटें आरक्षित भी हो सकती हैं। ऐसे में कई मौजूदा विधायकों के सामने अपनी राजनीतिक जमीन बचाने की चुनौती खड़ी हो सकती है। यही कारण है कि राज्यसभा चुनाव के साथ-साथ भविष्य की राजनीति को लेकर भी विधायकों के मन में संशय की स्थिति बताई जा रही है।
इसी बीच राजनीतिक गलियारों में यह भी माना जा रहा है कि क्रॉस वोटिंग की चर्चा के पीछे कई संभावित कारण हो सकते हैं। इनमें राजनीतिक भविष्य की चिंता, टिकट की गारंटी, पारिवारिक राजनीतिक हित और धनबल जैसी संभावनाएं प्रमुख मानी जा रही हैं। वहीं दूसरी ओर यह भी चर्चा है कि राजनीतिक दल अपने विधायकों को सुरक्षित स्थानों पर रखकर उनके वोटों को सुरक्षित रखने की रणनीति पर भी काम कर सकते हैं।
हालांकि ये सभी ऐसे यक्ष प्रश्न हैं जिनके जवाब आने वाले दिनों में ही स्पष्ट होंगे। लेकिन यदि इन सवालों के उत्तर ‘हां’ में मिलते हैं तो इसमें कोई ताज्जुब नहीं होगा, क्योंकि हरियाणा की राजनीति में “आया राम, गया राम” की कहावत काफी पुरानी रही है। फिलहाल राज्यसभा चुनाव और परिसीमन की संभावनाओं ने प्रदेश की राजनीति में सस्पेंस और सियासी हलचल दोनों को बढ़ा दिया है।
