
– दक्ष दर्पण समाचार सेवा
हिसार : प्रसिद्ध गोसेवक व समाजसेवी स्व. मोहनलाल लाहौरिया की आठवीं पुण्यतिथि पर उनकी स्मृति में हवन व श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। इस दौरान उनके द्वारा किए गए जनकल्याणकारी कार्यों को भी याद किया गया। लाहौरिया सीनियर सेकेंडरी स्कूल परिसर में स्वदेश शास्त्री ने मंत्रोच्चारण के साथ विधि-विधान से हवन किया। इस दौरान सभी उपस्थितजनों ने हवन में आहुति डालते हुए जनकल्याण की कामना की और स्व. मोहनलाल लाहौरिया के चित्र पर पुष्प अर्पित करके श्रद्धांजलि दी।
हवन व श्रद्धांजलि सभा के दौरान सेवा भारती के प्रांतीय उपाध्यक्ष कमल सर्राफ, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के विभाग संघचालक पवन जिंदल, भाविप केशव शाखा के सचिव दीपक गौतम, संदीप कोकचा, विजय शर्मा, तरुण खुराना, ट्रस्ट के चेयरमैन प्यारेलाल लाहौरिया, स्व. मोहनलाल लाहौरिया की पत्नी सीता देवी, सुरेंद्र लाहौरिया, वीरेंद्र लाहौरिया, राजेश लाहौरिया व अश्विनी लाहौरिया सपरिवार उपस्थित रहे। इस दौरान विद्यालय की प्रिंसिपल कृष्णा सोढी व डायरेक्टर विनय मल्होत्रा सहित शिक्षकगण व स्टाफ सदस्य भी मौजूद रहे। सभी अतिथियों व परिवारजनों ने लाहौरिया स्कूल मेें नव निर्मित ई लाइब्रेरी व दो कंप्यूटर सेंटर का अवलोकन भी किया।
इस अवसर पर कमल सर्राफ ने बताया कि मोहनलाल लाहौरिया बाल्यकाल से ही सामाजिक सरोकारों से जुड़े हुए थे। वे बाल्यकाल से ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से कार्यकर्ता के रूप में जुड़ गए। उन्होंने लाहौरिया विद्या मंदिर विद्यालय, विवेकानंद पुस्तकालय, सेवा भारती के छह विद्यालय व सिलाई केंद्र, दिव्यांग पुनर्वास केंद्र एवं काबरेल स्थित गो अनुसंधान केंद्र आदि के निर्माण व स्थापना में विशेष भूमिका निभाई।
लाहौरिया एजुकेशन सोसायटी के सचिव व कटला रामलीला कमेटी के पूर्व प्रधान सुरेंद्र लाहौरिया ने बताया कि स्व. मोहनलाल लाहौरिया को देशभक्ति के संस्कार विरासत में मिले। मोहनलाल के पिता स्वतंत्रता सेनानी सेठ जुगलकिशोर लाहौरिया नेताजी सुभाषचंद्र बोस के साथ रानी लक्ष्मीबाई बिग्रेड में रहे। स्व. मोहनलाल का पूरा जीवन समाज और राष्ट्र को समर्पित रहा। राष्ट्रभक्त होने के कारण वर्ष 1975 में आपातकाल के दौरान उन्हें जेल भेजकर प्रताड़ित किया गया। देश के प्रति इस निष्ठा के लिए वर्तमान सरकार ने उन्हें ताम्रपत्र देकर सम्मानित किया।
सुरेंद्र लाहौरिया ने बताया कि गोसेवक मोहनलाल लाहौरिया विश्व हिंदू परिषद, भाविप, विद्यार्थी परिषद व वनवासी कल्याण आश्रम सहित विभिन्न प्रकल्पों व संस्थाओं की सहायता के लिए जीवन पर्यंत संकल्पबद्ध रहे। प्रभु श्रीराम के प्रति गहरी आस्था रखते हुए श्रीराम जन्मभूमि अयोध्या धाम के सभी जन आंदोलनों के कारसेवक के रूप में वे सक्रिय रहे। जनहित के कार्यों में अग्रणी भूमिका निभाने के लिए मोहनलाल लाहौरिया को विभिन्न पुरस्कारों व उपाधियों से अलंकृत किया गया। वर्ष 2016 में हरियाणा सरकार द्वारा ताम्रपत्र से सम्मानित किया गया। उन्होंने कहा कि स्व. मोहनलाल लाहौरिया का व्यक्तित्व व कृतित्व आने वाली पीढिय़ों को सदकार्य करने की प्रेरणा देता रहेगा।
: समाज को शिक्षित करने के लिए करवाया विद्यालय का निर्माण
हिसार : मोहनलाल लाहौरिया ने समाज को शिक्षित व संस्कारित करने के उद्देश्य से विद्यालय का निर्माण करवाया। यह विद्यालय दो कमरों से 1980 में शुरू करने के पश्चात आज हरियाणा के बड़े विद्यालयों में गिना जाता है। न्यू लाहौरिया विद्या मंदिर सीनियर सेकेंडरी स्कूल के रूप में इस विद्यालय ने शिक्षा व संस्कारों की मिसाल कायम की है। इस विद्यालय में 2500 से अधिक विद्यार्थी उच्चकोटि की शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। यह विद्यालय केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड से संबद्ध है और यहां पर अनुशासन की जीवंत बानगी देखी जा सकती है।
काबरेल गोशाला के संचालन में विशेष भूमिका
हिसार : स्वर्गीय मोहनलाल लाहौरिया ने जनहित के लिए कई संस्थानों का निर्माण करवाया और उनके संचालन में विशेष भूमिका निभाई। केशव माधव धाम द्वारा संचालित काबरेल गोशाला के उपाध्यक्ष रहते हुए उन्होंने काबरेल में गो अनुसंधान केंद्र का काम अपने कंधों पर लिया और स्वास्थ्य ठीक न होने के बावजूद उसका निर्माण पूरा करवाया। गोसेवा को सर्वोपरि मानने वाले मोहनलाल अंतिम सांस तक काबरेल गो अनुसंधान केंद्र के कार्यों में सक्रिय रहे।

स्व. मोहनलाल लाहौरिया की आठवीं पुण्यतिथि पर हवन में हिस्सा लेते परिवारजन व गणमान्य लोग।

: स्व. मोहनलाल लाहौरिया की आठवीं पुण्यतिथि पर उपस्थित परिवारजन व गणमान्य लोग।
